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Health: उमस और तेज धूप ने बढ़ाई मुसीबत! वायरल फीवर, डायरिया और निमोनिया से अस्पताल फुल; इन बातों का रखें ध्यान
Mon, 27 Jul 2026 09:54 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 27 Jul 2026 09:54 AM IST
सार
भीषण गर्मी, उमस और तेज धूप के कारण आगरा में वायरल फीवर, डायरिया, डिहाइड्रेशन और निमोनिया के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने से एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और वार्डों पर दबाव बढ़ गया है।
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डॉ. चंद्रप्रकाश गौतम मरीज को देखते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
भीषण गर्मी, उमस और तेज धूप लोगों को बीमार बना रही है। डायरिया, निमोनिया और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इमरजेंसी के मेडिसिन और बाल रोग विभाग के वार्ड फुल हो गए हैं। मरीज बढ़ने पर इनको 10-15 घंटे में वार्ड में शिफ्ट करना पड़ रहा है। सामान्य तौर पर इनको 24 घंटे रखा जाता है।
इमरजेंसी के सह प्रभारी अधिकारी डॉ. चंद्रप्रकाश गौतम ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण होने का वायरल फीवर, उल्टी-दस्त, पेट में दर्द और निमोनिया के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पसीना अधिक बहने के कारण बीपी भी कम हो रहा है। हालत खराब होने पर मरीज इमरजेंसी में भर्ती हो रहे हैं।
इनमें से 10-15 फीसदी मरीजों की हालत गंभीर मिल रही है, बाकी को उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया जा रहा है। मरीज बढ़ने पर इनको इमरजेंसी से विभागों के वार्ड में शिफ्ट कर रहे हैं। बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव से बच्चों में तेज बुखार, पेट में दर्द, उल्टी-दस्त की परेशानी मिल रही है। निमोनिया से भी पीड़ित आ रहे हैं। राहत की बात है कि उपचार के बाद एक दिन में इनको डिस्चार्ज कर रहे हैं, कुछ ही मरीजों को भर्ती करके रखना पड़ रहा है।
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इन बातों का रखें ध्यान
गले-कटे हुए फल न खाएं। बासी भोजन करने से बचें।
खुले और गंदगी में बनने वाली बाजार की सामग्री से बचें।
भोजन से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ करें।
जुकाम-खांसी होने पर खुद को क्वारंटाइन कर लें।
बुखार आने पर बच्चों को स्कूल भेजने न भेजें।
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इमरजेंसी के सह प्रभारी अधिकारी डॉ. चंद्रप्रकाश गौतम ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण होने का वायरल फीवर, उल्टी-दस्त, पेट में दर्द और निमोनिया के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पसीना अधिक बहने के कारण बीपी भी कम हो रहा है। हालत खराब होने पर मरीज इमरजेंसी में भर्ती हो रहे हैं।
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इनमें से 10-15 फीसदी मरीजों की हालत गंभीर मिल रही है, बाकी को उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया जा रहा है। मरीज बढ़ने पर इनको इमरजेंसी से विभागों के वार्ड में शिफ्ट कर रहे हैं। बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव से बच्चों में तेज बुखार, पेट में दर्द, उल्टी-दस्त की परेशानी मिल रही है। निमोनिया से भी पीड़ित आ रहे हैं। राहत की बात है कि उपचार के बाद एक दिन में इनको डिस्चार्ज कर रहे हैं, कुछ ही मरीजों को भर्ती करके रखना पड़ रहा है।
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इन बातों का रखें ध्यान
गले-कटे हुए फल न खाएं। बासी भोजन करने से बचें।
खुले और गंदगी में बनने वाली बाजार की सामग्री से बचें।
भोजन से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ करें।
जुकाम-खांसी होने पर खुद को क्वारंटाइन कर लें।
बुखार आने पर बच्चों को स्कूल भेजने न भेजें।