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यूपी: BJP सांसद रामशंकर कठेरिया की दो साल की सजा पर 20 सितंबर को सुनवाई, जिला जज की कोर्ट में होगी बहस
Tue, 19 Sep 2023 12:14 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 19 Sep 2023 12:14 PM IST
सार
भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया को एमपी-एमएलए कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई थी। इस मामले में सांसद ने जिला न्यायालय में अपील की थी। इस मामले में 20 सितंबर को सुनवाई है।
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कोर्ट से बाहर आते BJP सांसद रामशंकर कठेरिया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इटावा से बीजेपी सांसद रामशंकर कठेरिया की सजा के मामले में सोमवार को जिला जज की अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी। संसद का विशेष सत्र चलने के कारण सांसद अदालत में हाजिर नहीं हो सके। अब इस मामले में 20 सितंबर को सुनवाई होगी।
मामला वर्ष 2011 का है। टोरेंट पावर के साकेत माल स्थित कार्यालय में अधिकारी भावेश रसिक लाल शाह के साथ मारपीट और बलवे का मामला दर्ज हुआ था। इसके आरोप में 5 अगस्त को सांसद रामशंकर कठेरिया को विशेष मजिस्ट्रेट एमपी-एमएलए कोर्ट ने दो वर्ष कैद और 51 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया था।
सांसद के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय आहूजा, साजिद अहमद और अन्य अधिवक्ताओं ने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश के खिलाफ जिला जज की अदालत में अपील प्रस्तुत की थी। इस पर 7 अगस्त को जिला जज ने सजा के आदेश को स्थगित कर दिया था।
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जिला जज ने सांसद की ओर से प्रस्तुत अपील पर बहस के लिए 11 सितंबर नियत की थी। इसके साथ ही मामले में वादी समेधी लाल को पार्टी न बनाने पर एतराज जताया था। अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण उक्त सुनवाई नहीं हो सकी थी। जिला जज ने मामले में 18 सितंबर नियत की थी।
वरिष्ठ अधिवक्ता विजय आहूजा एवं अन्य ने कोर्ट में अवगत कराया कि मुकदमे के वादी समेधी लाल की अधीनस्थ न्यायालय में गवाही से पूर्व ही मृत्यु होने के कारण उनकी गवाही दर्ज नहीं हो सकी थी। वादी की मृत्यु होने के कारण ही उन्हें पार्टी (पक्षकार) नहीं बनाया गया है। जिला जज ने सांसद के अधिवक्ताओं के तर्क से सहमत होते हुए बहस के लिए 20 सितंबर नियत की।
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मामला वर्ष 2011 का है। टोरेंट पावर के साकेत माल स्थित कार्यालय में अधिकारी भावेश रसिक लाल शाह के साथ मारपीट और बलवे का मामला दर्ज हुआ था। इसके आरोप में 5 अगस्त को सांसद रामशंकर कठेरिया को विशेष मजिस्ट्रेट एमपी-एमएलए कोर्ट ने दो वर्ष कैद और 51 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया था।
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सांसद के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय आहूजा, साजिद अहमद और अन्य अधिवक्ताओं ने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश के खिलाफ जिला जज की अदालत में अपील प्रस्तुत की थी। इस पर 7 अगस्त को जिला जज ने सजा के आदेश को स्थगित कर दिया था।
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जिला जज ने सांसद की ओर से प्रस्तुत अपील पर बहस के लिए 11 सितंबर नियत की थी। इसके साथ ही मामले में वादी समेधी लाल को पार्टी न बनाने पर एतराज जताया था। अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण उक्त सुनवाई नहीं हो सकी थी। जिला जज ने मामले में 18 सितंबर नियत की थी।
वरिष्ठ अधिवक्ता विजय आहूजा एवं अन्य ने कोर्ट में अवगत कराया कि मुकदमे के वादी समेधी लाल की अधीनस्थ न्यायालय में गवाही से पूर्व ही मृत्यु होने के कारण उनकी गवाही दर्ज नहीं हो सकी थी। वादी की मृत्यु होने के कारण ही उन्हें पार्टी (पक्षकार) नहीं बनाया गया है। जिला जज ने सांसद के अधिवक्ताओं के तर्क से सहमत होते हुए बहस के लिए 20 सितंबर नियत की।