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कुपोषण की गिरफ्त में कराह रहा बचपन
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कुपोषण (प्रतीकात्मक चित्र)
- फोटो : demo
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मैनपुरी। जिले में बचपन कुपोषण की गिरफ्त में कराह रहा है। लाख कोशिशों के बाद भी कुपोषण रूपी दानव को खत्म कर पाना प्रशासन के लिए संभव नहीं हो रहा है। हर साल सरकार लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहता है। जिले में बच्चे आज भी कुपोषण से जूझ रहे हैं। 12 हजार बच्चे जहां कुपोषण की श्रेणी में हैं तो वहीं दो हजार से अधिक बच्चे अतिकुपोषण की श्रेणी में हैं। शासन और प्रशासन कुपोषण मुक्त भारत के लिए पहल कर रहे हैं, लेकिन दूर-दूर तक कहीं कुपोषण मुक्त भारत नजर नहीं आ रहा है।
बिना योजना के ही कुपोषण को मिटाने के दावे किए जा रहे हैं। दरअसल वर्तमान समय में कुपोषित बच्चों की सेहत केवल पुष्टाहार के सहारे है। दलिया, पुष्टाहार और लड्डू प्रीमिक्स का वितरण आंगनबाड़ी केंद्रों पर किया जा रहा है। जबकि पहले कुपोषित बच्चों को पूरा भोजन और दूध मिलता था, लेकिन, प्रदेश में सरकार बदलने के बाद ये योजना बंद हो गई। हालांकि विभाग कुपोषण से जल्द छुटकारा दिलाने का दावा कर रहा है। ये दावा कितना सही है, ये तो बाद में ही पता चलेगा।
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बिना योजना के ही कुपोषण को मिटाने के दावे किए जा रहे हैं। दरअसल वर्तमान समय में कुपोषित बच्चों की सेहत केवल पुष्टाहार के सहारे है। दलिया, पुष्टाहार और लड्डू प्रीमिक्स का वितरण आंगनबाड़ी केंद्रों पर किया जा रहा है। जबकि पहले कुपोषित बच्चों को पूरा भोजन और दूध मिलता था, लेकिन, प्रदेश में सरकार बदलने के बाद ये योजना बंद हो गई। हालांकि विभाग कुपोषण से जल्द छुटकारा दिलाने का दावा कर रहा है। ये दावा कितना सही है, ये तो बाद में ही पता चलेगा।
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