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UP: हाइड्रोसिफलस...छह माह के शिशु का मस्तिष्क हो गया दोगुना बड़ा, सिर फटने का था खतरा; ऐसे बचाई जान
Thu, 16 Oct 2025 09:49 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Thu, 16 Oct 2025 09:49 PM IST
सार
शिशु के सिर का आकार 30-35 सेमी होना चाहिए था, लेकिन उसका सिर 70 सेमी का हो गया था। ऐसे में सिर फटने से माैत होने का खतरा था। एसएन मेडिकल काॅलेज में पहली बार इतने बड़े सिर की सर्जरी की गई।
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शिशु का सिर दोगुना बड़ा हो गया।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मस्तिष्क में पानी भरने से छह माह के शिशु का सिर 70 सेमी का हो गया। इसका आकार लगातार बढ़ रहा था। इससे सिर फटने का खतरा था। परिजन ने शिशु को एसएन मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में भर्ती कराया। यहां चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर बच्चे की जान बचाई।
पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. पुनीत श्रीवास्तव ने बताया कि शमसाबाद निवासी व्यक्ति अपने छह माह के शिशु को दिखाने लाए। उसके सिर का आकार 70 सेमी था, जबकि इस उम्र में यह 30-35 सेमी होना चाहिए। इस बीमारी को हाइड्रोसिफलस कहते हैं। ये जन्मजात है और सिर में भरे फ्लूड की निकासी के लिए नली बंद होती है।
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पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. पुनीत श्रीवास्तव ने बताया कि शमसाबाद निवासी व्यक्ति अपने छह माह के शिशु को दिखाने लाए। उसके सिर का आकार 70 सेमी था, जबकि इस उम्र में यह 30-35 सेमी होना चाहिए। इस बीमारी को हाइड्रोसिफलस कहते हैं। ये जन्मजात है और सिर में भरे फ्लूड की निकासी के लिए नली बंद होती है।
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इसकी सर्जरी नहीं होने पर फ्लूड बढ़ने से सिर फटने से मौत का खतरा था इसलिए बच्चे की तत्काल सर्जरी करनी पड़ी। इसमें सिर के जरिये पेट तक कृत्रिम नस बनाई गई, जिससे अतिरिक्त फ्लूड पेट तक पहुंचने लगेगा। इसे चिकित्सकीय भाषा में वीपी शंट प्रक्रिया कहते हैं। इसका महीने से डेढ़ महीने में सिर का आकार सामान्य हो जाएगा। सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. अर्चना अग्रवाल, डाॅ. मनु बंसल रहे।
प्रदूषण, गर्भपात की दवा खाने से पनप रहा जन्मजात विकार
डॉ. पुनीत श्रीवास्तव ने बताया छह फीसदी बच्चों में यह बीमारी मिल रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह बढ़ता प्रदूषण, बार-बार गर्भपात की दवाएं लेना, विटामिन की कमी है। इससे भ्रूण पर असर पड़ता है। इसके चलते अन्य विकार भी पनपते हैं। महिलाओं को पौष्टिक आहार लेेने के साथ प्रदूषण से खुद को बचाना चाहिए। गर्भपात की दवाएं चिकित्सकीय परामर्श से ही लेनी चाहिए।
प्रदूषण, गर्भपात की दवा खाने से पनप रहा जन्मजात विकार
डॉ. पुनीत श्रीवास्तव ने बताया छह फीसदी बच्चों में यह बीमारी मिल रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह बढ़ता प्रदूषण, बार-बार गर्भपात की दवाएं लेना, विटामिन की कमी है। इससे भ्रूण पर असर पड़ता है। इसके चलते अन्य विकार भी पनपते हैं। महिलाओं को पौष्टिक आहार लेेने के साथ प्रदूषण से खुद को बचाना चाहिए। गर्भपात की दवाएं चिकित्सकीय परामर्श से ही लेनी चाहिए।