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ताजनगरी में एक और घोटाला, अब स्कूलों में हैंडपंप लगाए बगैर डकार ली गई रकम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 30 Nov 2018 08:15 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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ताजनगरी में शिक्षक नियुक्ति घोटाला, फर्नीचर घोटाला, विधायक निधि घोटाला और भूमि अधिग्रहण घोटाले के बाद हैंडपंप घोटाला सामने आया है। परिषदीय विद्यालयों में लगाए गए हैंडपंप में से सत्यापन कराए जाने पर 41 कम मिले हैं।
इनका पैसा डकार लिया गया है। बीएसए ने उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के प्रयागराज के क्षेत्रीय प्रबंधक, ठेकेदार और शिक्षा विभाग से संबंधित अन्य के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई है। शिक्षा विभाग से संबंधित अन्य इसलिए आरोपी बनाए गए हैं क्योंकि इन्होंने सत्यापन में गड़बड़ी की। बाद में सीडीओ रविंद्र मांदण ने टीम गठित कराई तो घोटाला सामने आ गया।
विद्यालयों में 517 हैंडपंप लगाए जाने थे। जिम्मेदारी पहले लघु उद्योग निगम कानपुर को दी गई। वहां से पहले से काम ज्यादा होने के कारण मना कर दिया तो 23 सितंबर 2016 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) को दे दी गई। दो करोड़ चार लाख 20 हजार रुपये के बजट में 517 हैंडपंप लगाए जाने थे।
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पहले चरण में एक करोड़ दो लाख दस हजार रुपये जारी किए गए। इनसे 259 हैंडपंप लगाए जाने थे। 28 अगस्त को कार्य समाप्ति का कर हैंडपंपों की सूची बेसिक शिक्षा विभाग को दी गई। विभाग के अफसरों ने सत्यापन किया, उन्हें घोटाला मिला लेकिन दबा गए।
बाद में शिकायत सीडीओ तक पहुंची तो उन्होंने टीम गठित कर जांच कराई तो मौके पर 259 की जगह 218 हैंडपंप ही मिले। 41 हैंडपंप लगाए बगैर पैसा डकार लिया गया। शुक्रवार को बीएसए ने इसकी रिपोर्ट शाहगंज थाना में दर्ज करा दी है।
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इनका पैसा डकार लिया गया है। बीएसए ने उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के प्रयागराज के क्षेत्रीय प्रबंधक, ठेकेदार और शिक्षा विभाग से संबंधित अन्य के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई है। शिक्षा विभाग से संबंधित अन्य इसलिए आरोपी बनाए गए हैं क्योंकि इन्होंने सत्यापन में गड़बड़ी की। बाद में सीडीओ रविंद्र मांदण ने टीम गठित कराई तो घोटाला सामने आ गया।
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विद्यालयों में 517 हैंडपंप लगाए जाने थे। जिम्मेदारी पहले लघु उद्योग निगम कानपुर को दी गई। वहां से पहले से काम ज्यादा होने के कारण मना कर दिया तो 23 सितंबर 2016 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) को दे दी गई। दो करोड़ चार लाख 20 हजार रुपये के बजट में 517 हैंडपंप लगाए जाने थे।
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पहले चरण में एक करोड़ दो लाख दस हजार रुपये जारी किए गए। इनसे 259 हैंडपंप लगाए जाने थे। 28 अगस्त को कार्य समाप्ति का कर हैंडपंपों की सूची बेसिक शिक्षा विभाग को दी गई। विभाग के अफसरों ने सत्यापन किया, उन्हें घोटाला मिला लेकिन दबा गए।
बाद में शिकायत सीडीओ तक पहुंची तो उन्होंने टीम गठित कर जांच कराई तो मौके पर 259 की जगह 218 हैंडपंप ही मिले। 41 हैंडपंप लगाए बगैर पैसा डकार लिया गया। शुक्रवार को बीएसए ने इसकी रिपोर्ट शाहगंज थाना में दर्ज करा दी है।