Banke Bihari Temple: बांके बिहारी मंदिर के आसपास पांच एकड़ में विकास कार्य कराएगी सरकार
प्रदेश सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने विशेष सचिव धर्मार्थ कार्य की तरफ से एक हलफनामा दाखिल किया। इसमें बताया गया कि सरकार ने लगभग पांच एकड़ में मंदिरों के विकास के लिए जमीन अधिकृत कर काम करने की योजना बनाई है।
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वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दर्शनार्थियों की सुरक्षा के लिए सरकार की प्रस्तावित सुरक्षा योजना व विकास के नाम पर किए जाने वाले खर्च का वहां के गोस्वामियों ने विरोध किया है। हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा कि वे विकास के नाम पर स्थानीय प्रशासन के मंदिर के चढ़ावे से काम कराने के पक्षधर नहीं हैं। गोस्वामियों का कहना था कि मंदिर का चढ़ावा चाहे कैश में हो अथवा सोना चांदी के रूप में, सभी प्रकार का चढ़ावा भगवान के नाम पर खुले बैंक अकाउंट में जमा होता है। प्रशासन को उन पैसों का खर्च उनकी निगरानी में वहां के विकास के लिए करने की वे अनुमति नहीं देना चाहते।
सरकार की ओर से दाखिल किया हलफनामा
चीफ जस्टिस राजेश बिंदल एवं जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ मथुरा के बांके बिहारी व अन्य मंदिरों में सुरक्षा को लेकर दाखिल अनंत शर्मा व अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही है। प्रदेश सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने विशेष सचिव धर्मार्थ कार्य की तरफ से एक हलफनामा दाखिल किया। इसमें बताया गया कि सरकार ने लगभग पांच एकड़ में मंदिरों के विकास के लिए जमीन अधिकृत कर काम करने की योजना बनाई है। सरकार की योजना है कि वहां का विकास ऐसा किया जाए ताकि भविष्य में दर्शनार्थियों अथवा श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन में कोई बाधा न हो और उन्हें सुविधाजनक दर्शन हो सके।
'सरकार पूजा-अर्चना में न करे हस्तक्षेप'
मंदिर के सेवायतों का कहना था कि कोर्ट आदेश पारित कर यह सुनिश्चित कराए कि सरकार उनके पूजा अर्चना आदि में हस्तक्षेप न करे। उनका कहना है कि उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों पर विश्वास नहीं है। कहा गया कि मथुरा के न्यायिक अधिकारियों पर मंदिरों की देखरेख आदि को लेकर उनका भरोसा है। परंतु, प्रशासनिक अधिकारियों पर नहीं है। कहा गया कि प्रशासनिक अधिकारी मंदिरों के चढ़ावे का पैसा विकास के नाम पर गलत तरीके से खर्च कर सकते हैं।
मंगलवार को इस केस की सुनवाई के दौरान काफी देर तक बहस चली। मंदिरों की देखरेख में लगे पुजारियों वह सेवायतों का कहना था कि दर्शनार्थी भगवान को चढ़ावा चढ़ाते हैं। यह उनकी श्रद्धा है कि उनके चढ़ाए हुए पैसों का उपयोग भगवान व भगवान के सेवा में लगे लोगों के बीच हो।
कहा गया कि प्रशासन को कोई अधिकार नहीं है कि किसी श्रद्धालु के पैसे, जो भगवान के नाम पर चढ़ाए गए हैं, उसे निकालकर उस रूप में खर्च करें जो श्रद्धालुओं की श्रद्धा के प्रतिकूल हो। हाईकोर्ट ने सरकार से इस मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट हलफनामे के साथ मांगा है तथा केस की सुनवाई के लिए 17 नवंबर 2022 की तिथि निर्धारित की है।