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अच्छी खबर : चंबल में कछुओं की हैचिंग पूरी, जन्मे 5160 नन्हे मेहमान
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चंबल के कुनबे में शामिल हुए साल और ढोर प्रजाति के 5160 कछुओं के नन्हें मेहमान, हैचिंग हुई पूरी
- फोटो : संवाद
बाह। अच्छी खबर ये है कि दुनिया में लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचे बटागुर कछुओं की साल और ढोर प्रजाति के 5,160 बच्चे चंबल नदी के कुनबे में शामिल हो गए हैं। कुल 235 नेस्ट में 5,455 अंडे रिकॉर्ड किए गए थे। इनमें 5,160 बच्चों का जन्म हुआ है।
बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कछुओं की हैचिंग का काम पूरा हो गया है। हैचिंग के दौरान सरसराहट की आवाज पर पहुंची मादा कछुआ ने नेस्ट की बालू को कुरेदा तो अंडों के भीतर विकसित हुए नन्हे कछुए बाहर निकले। वन कर्मियों ने उन्हें चंबल नदी तक पहुंचाने का काम किया। उन्होंने बताया कि फरवरी-मार्च में मादा कछुआ नदी किनारे की बालू में करीब एक फीट गहरा गड्ढा अपने पंजों से खोद कर 10 से 30 अंडे देती है। ढोर प्रजाति के 182 नेस्ट में 4,300 अंडे थे, जिनमें से हैचिंग के जरिए 4,144 बच्चों का जन्म हुआ है। जबकि साल प्रजाति के 53 नेस्ट थे, जिनमें 1,155 अंडे थे, 1,016 नन्हे मेहमानों का जन्म हुआ है।
चंबल नदी की स्वच्छता में अहम हैं कछुए
रेंजर ने बताया कि चंबल नदी में कछुओं की 8 प्रजातियां संरक्षित हो रही हैं। ये संकटग्रस्त प्रजातियां हैं ढोर, साल, पचेड़ा, काली ढोर, स्योत्तर, कटहवा, सुंदरी, मोरपंखी। जिनमें कठोर कवच वाली ढोर, साल, पचेड़ा, काली ढोर तथा नरम कवच वाली स्योत्तर, कटहवा, सुंदरी, मोरपंखी शामिल हैं। कठोर कवच वाले कछुए शाकाहारी होते हैं। ये नदी की सड़ी-गली वनस्पतियों को खाते हैं, जबकि नरम कवच वाले कछुए मांसाहारी होते हैं। ये नदी के मरे और सड़े-गले जीव जंतुओं को खाकर पानी को साफ रखते हैं।
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बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कछुओं की हैचिंग का काम पूरा हो गया है। हैचिंग के दौरान सरसराहट की आवाज पर पहुंची मादा कछुआ ने नेस्ट की बालू को कुरेदा तो अंडों के भीतर विकसित हुए नन्हे कछुए बाहर निकले। वन कर्मियों ने उन्हें चंबल नदी तक पहुंचाने का काम किया। उन्होंने बताया कि फरवरी-मार्च में मादा कछुआ नदी किनारे की बालू में करीब एक फीट गहरा गड्ढा अपने पंजों से खोद कर 10 से 30 अंडे देती है। ढोर प्रजाति के 182 नेस्ट में 4,300 अंडे थे, जिनमें से हैचिंग के जरिए 4,144 बच्चों का जन्म हुआ है। जबकि साल प्रजाति के 53 नेस्ट थे, जिनमें 1,155 अंडे थे, 1,016 नन्हे मेहमानों का जन्म हुआ है।
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चंबल नदी की स्वच्छता में अहम हैं कछुए
रेंजर ने बताया कि चंबल नदी में कछुओं की 8 प्रजातियां संरक्षित हो रही हैं। ये संकटग्रस्त प्रजातियां हैं ढोर, साल, पचेड़ा, काली ढोर, स्योत्तर, कटहवा, सुंदरी, मोरपंखी। जिनमें कठोर कवच वाली ढोर, साल, पचेड़ा, काली ढोर तथा नरम कवच वाली स्योत्तर, कटहवा, सुंदरी, मोरपंखी शामिल हैं। कठोर कवच वाले कछुए शाकाहारी होते हैं। ये नदी की सड़ी-गली वनस्पतियों को खाते हैं, जबकि नरम कवच वाले कछुए मांसाहारी होते हैं। ये नदी के मरे और सड़े-गले जीव जंतुओं को खाकर पानी को साफ रखते हैं।
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