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रिवर फ्रंट घोटाला: मैनपुरी तक पहुंची जांच की आंच, सीबीआई की एफआईआर में दंपती के नाम

Wed, 07 Jul 2021 12:10 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 07 Jul 2021 12:10 AM IST
सार

मैनपुरी निवासी दंपती की दो फर्मों ने एक ही काम के लिए टेंडर डाले थे। सीबीआई की एफआईआर में दंपती का नाम है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई टीम जल्द ही जांच के सिलसिले में मैनपुरी पहुंच सकती है। 

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Gomti River Front Scam CBI FIR filed against husband wife of mainpuri
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में मैनपुरी की दो फर्मों ने टेंडर पूल किए थे। एक ही कार्य के लिए स्थानीय दंपती ने अलग-अलग फर्मों के नाम से टेंडर डाले थे। इसमें एक फर्म को टेंडर आवंटित कर दिया गया था। दोनों टेंडर के प्रपत्र एक ही व्यक्ति द्वारा डाले गए थे। मामले में दोनों के विरुद्ध सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कराई है। 

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पिछली सपा सरकार में गोमती रिवर फ्रंट परियोजना में 14.37 अरब रुपये खर्च किए गए थे। जांच में बड़ा घोटाला सामने आया। इसमें टेंडर से लेकर कार्यों तक घोटाला किया गया। इसमें मैनपुरी की भी चार फर्मों के नाम शामिल हैं। इसमें ग्लोबल कंस्ट्रक्शन प्रोपराइटर सुनीता यादव, मां अवंतिका बिल्डर्स प्रोपराइटर तुरसन पाल यादव, श्रीराम कंस्ट्रक्शन, प्रोपराइटर नीरज यादव और रामनाथ यादव निवासी बैंक कॉलोनी ने कार्य किए थे। 
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इसमें से ग्लोबल कंस्ट्रक्शन को लगभग सवा किलोमीटर नदी में सिल्ट सफाई का ठेका दिया गया था। ये ठेका उन्हें 188.50 लाख रुपये की कीमत का मिला था। सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर में बताया गया कि यह ठेका टेंडर पूल करके लिया गया था। इसके लिए ग्लोबल कंस्ट्रक्शन और मां अवंतिका बिल्डर्स ने टेंडर डाला था। 

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मां अवंतिका बिल्डर्स के मालिक तुरसन पाल यादव ग्लोबल कंस्ट्रक्शन की मालिक सुनीता यादव के पति हैं। एफआईआर में कहा गया है कि कार्य के लिए ग्लोबल कंस्ट्रक्शन की ओर से डाले गए टेंडर में सुनीता यादव के हस्ताक्षर भी उनके पति तुरसन पाल यादव ने किए थे। ये टेंडर तत्कालीन अधीक्षण अभियंता शिवमंगल यादव की जानकारी में रहे होंगे। ऐसे में रिवर फ्रंट घोटाले के तार सीधे तौर पर मैनपुरी से जुड़ने पर सीबीआई जल्द ही यहां दस्तक दे सकती है।

नहीं कराया गया था टेंडर का प्रकाशन 
मैनपुरी की फर्म ग्लोबल कंस्ट्रक्शन को जो टेंडर मिला था उसे न केवल पूल किया गया, बल्कि नियमों की अनदेखी भी की गई। सिल्ट सफाई के कार्य के लिए दो टेंडर निकाले गए थे। टेंडर के प्रकाशन की जिम्मेदारी अधीक्षण अभियंता शिवमंगल सिंह यादव पर थी, लेकिन उनके द्वारा टेंडर का प्रकाशन ही नहीं कराया गया। सीबीआई द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में इसका भी जिक्र किया गया है। 

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