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शक्ति स्थल 250 वर्ष पुराना है माता भूरी देवी का मंदिर
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कासगंज सोरोंजी का भूरीदेवी मंदिर
- फोटो : KASGANJ
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सोरोंजी। तीर्थंनगरी में स्थित माता भूरी देवी का मंदिर 250 वर्ष पुराना है। एक किसान का खेत में हल चलाते समय माता की मूर्ति मिली। किसान ने मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराकर मठिया स्थापित कर ली। आज यह स्थल भव्य मंदिर का रूप ले चुका है।
किसान काशीराम बघेल को खेत में हल चलाते समय भूरी देवी की मूर्ति मिली थी। किसान ने एक मठिया बनवाकर माता की मूर्ति प्रतिष्ठित कर दी, बाद में धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने उस स्थान पर माता रानी के भव्य मंदिर का निर्माण कर दिया। मान्यता है कि इस मूर्ति की स्थापना के कुछ वर्ष बाद चोर इस मूर्ति को चुरा कर ले गए। मूर्ति चोरों के साथ आए दिन कुछ अनहोनी घटित होने लगी, माता रानी ने चोरों से स्वप्न में मूर्ति वापस मन्दिर में स्थापित करने को कहा। तब चोरों ने पुन: इस मंदिर में विधिविधान से मूर्ति की पुनर्स्थापना कराई। मंदिर के प्रति लोगों में अगाध श्रद्धा है। माता रानी के दर्शन व पूजन से श्रद्धालुओं के असाधारण कार्य भी आसानी से बन जाते हैं, ऐसी मान्यता है। वैसे तो प्रतिदिन ही भक्त मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्र में दूर दूर से लोग माता रानी की जात करने सपरिवार आते हैं।
भूरी देवी के सेवायत कुलभूषण दास ने बताया कि माता रानी का दरबार काफी सच्चा है, माता अपने दर से किसी को खाली हाथ नही लौटाती, सच्चे मन से नवरात्रों में मैया की उपासना कर घी का दीपक जलाने से असाध्य कार्य भी शीघ्र पूरे होते हैं।
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यह है मंदिर जाने का रास्ता
माता रानी का मन्दिर सोरों के बदरिया बसन्तनगर मार्ग पर स्थित है। इसकी दूरी बस स्टेशन व रेलवे स्टेशन से ढाई किमी है, ई रिक्शा व थ्री व्हीलर टेंपो हर समय तैयार मिलते हैं।
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किसान काशीराम बघेल को खेत में हल चलाते समय भूरी देवी की मूर्ति मिली थी। किसान ने एक मठिया बनवाकर माता की मूर्ति प्रतिष्ठित कर दी, बाद में धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने उस स्थान पर माता रानी के भव्य मंदिर का निर्माण कर दिया। मान्यता है कि इस मूर्ति की स्थापना के कुछ वर्ष बाद चोर इस मूर्ति को चुरा कर ले गए। मूर्ति चोरों के साथ आए दिन कुछ अनहोनी घटित होने लगी, माता रानी ने चोरों से स्वप्न में मूर्ति वापस मन्दिर में स्थापित करने को कहा। तब चोरों ने पुन: इस मंदिर में विधिविधान से मूर्ति की पुनर्स्थापना कराई। मंदिर के प्रति लोगों में अगाध श्रद्धा है। माता रानी के दर्शन व पूजन से श्रद्धालुओं के असाधारण कार्य भी आसानी से बन जाते हैं, ऐसी मान्यता है। वैसे तो प्रतिदिन ही भक्त मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्र में दूर दूर से लोग माता रानी की जात करने सपरिवार आते हैं।
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भूरी देवी के सेवायत कुलभूषण दास ने बताया कि माता रानी का दरबार काफी सच्चा है, माता अपने दर से किसी को खाली हाथ नही लौटाती, सच्चे मन से नवरात्रों में मैया की उपासना कर घी का दीपक जलाने से असाध्य कार्य भी शीघ्र पूरे होते हैं।
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यह है मंदिर जाने का रास्ता
माता रानी का मन्दिर सोरों के बदरिया बसन्तनगर मार्ग पर स्थित है। इसकी दूरी बस स्टेशन व रेलवे स्टेशन से ढाई किमी है, ई रिक्शा व थ्री व्हीलर टेंपो हर समय तैयार मिलते हैं।