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नौकरी दे दो या इच्छा मृत्यु
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Tue, 15 Sep 2015 02:13 AM IST
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प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक के तौर पर समायोजन रद होने से समायोजित शिक्षामित्र सोमवार को भी सड़क पर उतरे। जुलूस निकाल कलेक्ट्रेट का घेराव किया। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की मांग करते हुए एसीएम को ज्ञापन सौंपा। जिलाधिकारी कार्यालय में प्रवेश करने को लेकर शिक्षामित्रों की पुलिस से झड़प भी हुई। उधर, उमस भरी गर्मी में कई घंटे धूप में रहने की वजह से चार महिलाओं सहित पांच शिक्षामित्र बेहोश होकर गिर पड़े। इससे कलेक्ट्रेट में अफरातफरी मच गई। तुरंत एंबुलेंस बुलाई गई और उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया।
जिले के तकरीबन 3200 शिक्षामित्र सुबह नौ बजे से डायट परिसर में एकत्र होने लगे थे। यहां से करीब 11 बजे जुलूस की शुरुआत हुई। महिला शिक्षामित्र बड़ी संख्या में थीं। शिक्षामित्रों के साथ न्याय करो, या फिर इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दो...। नौकरी दो या इच्छा मृत्यु दे दो.. नारे लिखी तख्तियां और बैनर लिए कलेक्ट्रेट पर पहुंचे। गेट पर पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन एमजी रोड पर जाम के हालात पैदा होने पर उन्हें कलेक्ट्रेट परिसर में दाखिल होने दिया गया। जिलाधिकारी कार्यालय से पहले पुलिस ने बैरियर लगा दिए। इसके उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया गया। शिक्षामित्रों ने बैरियर तोड़ने की कोशिश की। इस पर पुलिस से धक्कामुक्की हुई। मौके की नजाकत को देखते हुए एसीएम अरुण कुमार पहुंचे और ज्ञापन लिया।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह छौंकर ने कहा कि 2250 रुपये के मानदेय में अपने परिवार का जैसे तैसे भरणपोषण किया। भविष्य में स्थायी होने का सपना लेकर जीतोड़ मेहनत की। समायोजन की प्रक्रिया हुई, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले ने रद कर दिया। आगरा जिले में करीब तीन हजार शिक्षामित्र प्रभावित हुए हैं। शिक्षामित्र आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। उन्होेंने कहा कि या तो उनकी आजीविका वापस दें अन्यथा जीवन से निराश और हताश हो चुके शिक्षामित्रों को इच्छा मृत्यु की अनुमित दें।
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कलेक्ट्रेट को बना दिया था छावनी
शिक्षामित्रों के प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया। थाना नाई की मंडी, रकाबगंज सहित कई थानों की पुलिस फोर्स के अलावा पीएसी के जवानों को तैनात किया गया था। डायट परिसर से कलेक्ट्रेट तक जुलूस के दौरान भी पुलिस फोर्स साथ थी।
आज बीएसए कार्यालय पर प्रदर्शन
शिक्षामित्रों का कहना था कि उनका यह आंदोलन नौकरी मिलने तक जारी रहेगा। नेतृत्व की ओर से 14 और 15 को स्कूल बंदी के निर्देश मिले थे। इसलिए कल भी स्कूल बंद रखें जाएंगे। महामंत्री राम प्रकाश लवानिया ने बताया कि 15 सितंबर को बीएसए कार्यालय पर प्रदर्शन होगा। उसके बाद भाजपा के पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसपी सिंह बघेल के आवास पर ज्ञापन देने जाएंगे।
अब इससे बुरा क्या होगा
शिक्षामित्र सुशील कुमार ने कहा कि अब तो न स्कूल में पढ़ाएंगे और ना ही बीएलओ या अन्य सरकारी काम करेंगे। अब उनके साथ इससे भी बुरा क्या होगा। पिछले 15 वर्ष से दिन रात एक करके शिक्षामित्र इस आस में काम कर रहे थे समायोजित होने के बाद उनका भविष्य संवर जाएगा। लेकिन उनका सपना टूट गया। अन्य किसी सरकारी नौकरी के लिए वे ओवरएज हो चुके हैं।
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जिले के तकरीबन 3200 शिक्षामित्र सुबह नौ बजे से डायट परिसर में एकत्र होने लगे थे। यहां से करीब 11 बजे जुलूस की शुरुआत हुई। महिला शिक्षामित्र बड़ी संख्या में थीं। शिक्षामित्रों के साथ न्याय करो, या फिर इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दो...। नौकरी दो या इच्छा मृत्यु दे दो.. नारे लिखी तख्तियां और बैनर लिए कलेक्ट्रेट पर पहुंचे। गेट पर पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन एमजी रोड पर जाम के हालात पैदा होने पर उन्हें कलेक्ट्रेट परिसर में दाखिल होने दिया गया। जिलाधिकारी कार्यालय से पहले पुलिस ने बैरियर लगा दिए। इसके उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया गया। शिक्षामित्रों ने बैरियर तोड़ने की कोशिश की। इस पर पुलिस से धक्कामुक्की हुई। मौके की नजाकत को देखते हुए एसीएम अरुण कुमार पहुंचे और ज्ञापन लिया।
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उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह छौंकर ने कहा कि 2250 रुपये के मानदेय में अपने परिवार का जैसे तैसे भरणपोषण किया। भविष्य में स्थायी होने का सपना लेकर जीतोड़ मेहनत की। समायोजन की प्रक्रिया हुई, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले ने रद कर दिया। आगरा जिले में करीब तीन हजार शिक्षामित्र प्रभावित हुए हैं। शिक्षामित्र आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। उन्होेंने कहा कि या तो उनकी आजीविका वापस दें अन्यथा जीवन से निराश और हताश हो चुके शिक्षामित्रों को इच्छा मृत्यु की अनुमित दें।
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कलेक्ट्रेट को बना दिया था छावनी
शिक्षामित्रों के प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया। थाना नाई की मंडी, रकाबगंज सहित कई थानों की पुलिस फोर्स के अलावा पीएसी के जवानों को तैनात किया गया था। डायट परिसर से कलेक्ट्रेट तक जुलूस के दौरान भी पुलिस फोर्स साथ थी।
आज बीएसए कार्यालय पर प्रदर्शन
शिक्षामित्रों का कहना था कि उनका यह आंदोलन नौकरी मिलने तक जारी रहेगा। नेतृत्व की ओर से 14 और 15 को स्कूल बंदी के निर्देश मिले थे। इसलिए कल भी स्कूल बंद रखें जाएंगे। महामंत्री राम प्रकाश लवानिया ने बताया कि 15 सितंबर को बीएसए कार्यालय पर प्रदर्शन होगा। उसके बाद भाजपा के पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसपी सिंह बघेल के आवास पर ज्ञापन देने जाएंगे।
अब इससे बुरा क्या होगा
शिक्षामित्र सुशील कुमार ने कहा कि अब तो न स्कूल में पढ़ाएंगे और ना ही बीएलओ या अन्य सरकारी काम करेंगे। अब उनके साथ इससे भी बुरा क्या होगा। पिछले 15 वर्ष से दिन रात एक करके शिक्षामित्र इस आस में काम कर रहे थे समायोजित होने के बाद उनका भविष्य संवर जाएगा। लेकिन उनका सपना टूट गया। अन्य किसी सरकारी नौकरी के लिए वे ओवरएज हो चुके हैं।