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Agra News: मिर्गी का पहला दौरा पड़ते ही कराएं इलाज, 70 फीसदी का ठीक हुआ मर्ज

Tue, 18 Nov 2025 02:29 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 18 Nov 2025 02:29 AM IST
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Get treatment as soon as the first epileptic attack occurs, 70% are cured
न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ़ आगरा की ओर से आयोजित राष्ट्रीय मिर्गी दिवस कार्यक्रम में जागरूकता पत्र - फोटो : samvad
आगरा। तंत्रमंत्र, झाड़-फूंक के फेर में पड़ने से मिर्गी की बीमारी गंभीर रूप ले रही है। पहला दौरा पड़ने पर ही चिकित्सक को दिखाएं। इलाज से 70 फीसदी मरीजों की बीमारी पूरी तरह से ठीक हो रही है। जरूरत पर सर्जरी भी हो रही है। एमजी रोड स्थित होटल में मीडिया से रूबरू होते हुए न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी आगरा एवं यूपी-यूके न्यूरोसाइंस सोसायटी के चिकित्सकों ने मिर्गी से जुड़ी भ्रांतियों के बारे में भी बताया।
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सोसायटी के डॉ. अरविंद अग्रवाल ने बताया कि अभी 60-65 फीसदी मरीज मिर्गी को दौरा आने पर झाड़-फूंक करा रहे हैं। मर्ज गंभीर होने पर चिकित्सक के पास पहुंचते हैं। दौरा पड़ने पर एक से तीन साल तक दवाएं चलती हैं, इससे 60-70 फीसदी की बीमारी पूरी तरह से ठीक हो गई। डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि मिर्गी का दौरा एक से ढाई मिनट तक रहता है। इसके बाद मरीज प्राकृतिक रूप से पूर्व अवस्था में आ जाता है। ऐसा नहीं होने पर तत्काल मरीज को अस्पताल लेकर जाएं। इस दौरान नाक बंद करना, जूते-मोजे सुंघाना, दांतों के बीच चम्मच आदि लगान भ्रांति है और ऐसा करना खतरनाक है। नाक बंद होने से ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद होने से जान का खतरा है।
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जूते-मोजे सुंघाने से कीटाणु शरीर में जाने से संक्रमण का भी खतरा है। डॉ. आलोक अग्रवाल और डॉ. विनय अग्रवाल ने बताया कि मिर्गी के मरीज मंदबुद्धि होते हैं, ये भी भ्रांति है। इसका बौद्धिक स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अब तो मिर्गी के मरीजों की सर्जरी भी हो रही है। वार्ता में डॉ. मयंक अग्रवाल, डॉ. मयंक बंसल, डॉ. विकास बंसल, डॉ. तरुणेश शर्मा, डॉ. गौरव धाकरे, डॉ. नीरज बसंतानी, डॉ. राजीव बंसल और डॉ. नमित सिंघल भी मौजूद रहे।
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दौरा आने पर इन बातों का रखें ध्यान
- मरीज के आसपास भीड़ नहीं लगाएं, हवा आने दें। गले के आसपास कपड़े ढीले कर दें।
- मरीज के मुंह में खाने की सामग्री और चम्मच नहीं डालें।
- मरीज की गतिविधि को रोके नहीं, चिल्लाएं और शरीर हिलाएं नहीं।
- मरीज को करवट के बल बाईं तरफ लिटाएं, मुंह की लार और उल्टी को रोके नहीं।
- पूरी तरह होश में आने के बाद ही मरीज को दवा या खाने-पीने की सामग्री दें।
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