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'गोसेवा ही छूट जाएगी तो पद्मश्री का क्या करूंगी', वीजा अवधि पर छलका जर्मनी की 'सुदेवी' का दर्द
Sun, 26 May 2019 08:41 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 26 May 2019 08:41 AM IST
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गोवंश के साथ सुदेवी दासी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा के राधाकुंड में रहकर गोवंश की सेवा में जीवन समर्पित करने वाली जर्मनी की सुदेवी दासी को भारत छोड़कर जाना पड़ सकता है। 'जर्मन माई' के नाम से प्रसिद्धि पा चुकीं सुदेवी दासी को कुछ दिन पहले ही राष्ट्रपति द्वारा गो सेवा के लिए पदमश्री से सम्मानित किया गया है।
सुदेवी के वीजा की अवधि 25 जून को समाप्त हो रही है। अगर वीजा की अवधि नहीं बढ़ाई गई तो उन्हें 1800 गोवंश को छोड़ अपने देश जर्मन वापस जाना पड़ेगा। सुदेवी दासी ने वीजा अवधि बढ़वाने के लिए भारत सरकार को प्रार्थना पत्र भेजा गया था, जिसे सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है। सुदेवी दासी ने कहा कि वो शीघ्र सुषमा स्वराज से मिलने दिल्ली जाएंगी।
गो भक्त सुदेवी दासी के अनुसार उन्होंने 38 वर्ष पहले राधाकुंड में गोशाला की स्थापना की थी। बीमार एवं अनाथ गायों की सेवा की। वर्तमान में गोशाला में 90 लोग गायों की सेवा करने के लिए काम कर रहे हैं। एक पशु डॉक्टर, बीमार गायों को लाने-ले जाने के लिए दो एंबुलेंस गोशाला में हैं।
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सुदेवी के वीजा की अवधि 25 जून को समाप्त हो रही है। अगर वीजा की अवधि नहीं बढ़ाई गई तो उन्हें 1800 गोवंश को छोड़ अपने देश जर्मन वापस जाना पड़ेगा। सुदेवी दासी ने वीजा अवधि बढ़वाने के लिए भारत सरकार को प्रार्थना पत्र भेजा गया था, जिसे सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है। सुदेवी दासी ने कहा कि वो शीघ्र सुषमा स्वराज से मिलने दिल्ली जाएंगी।
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गो भक्त सुदेवी दासी के अनुसार उन्होंने 38 वर्ष पहले राधाकुंड में गोशाला की स्थापना की थी। बीमार एवं अनाथ गायों की सेवा की। वर्तमान में गोशाला में 90 लोग गायों की सेवा करने के लिए काम कर रहे हैं। एक पशु डॉक्टर, बीमार गायों को लाने-ले जाने के लिए दो एंबुलेंस गोशाला में हैं।
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वीजा अवधि न बढ़ने पर छलका दर्द
सुदेवी दासी ने कहा कि 'जब गायों की सेवा ही छूट जाएगी तो मैं पद्मश्री सम्मान का क्या करूंगी..'। यह सम्मान उन्हें राष्ट्रपति द्वारा गो सेवा के लिए दिया गया था।
उम्मीद है कि सुषमा स्वराज मेरी वीजा अवधि को बढ़वा सकती हैं। सुदेवी दासी ने वीजा अवधि बढ़वाने को भारत सरकार को प्रार्थना पत्र भेजा गया था, जिसे सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है। यह कहते हुए सुदेवी दासी के आंसू निकल पड़े। उन्होंने कहा कि अगर वीजा अवधि नहीं बढ़ी तो मुझे बीमार और बेसहारा गायों की सेवा छोड़ कर अपने देश जर्मन जाना पड़ेगा।
सुदेवी दासी का वास्तविक नाम फ्रेडरिक इरिना ब्रूनिंग है। वो वर्ष 1978 में जर्मनी से ब्रज दर्शन के लिए आई थीं। इस पावन भूमि आकर इरिना इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने गुरु दीक्षा के बाद अपना नाम सुदेवी दासी रख लिया। इसके बाद यहां की होकर रह गईं।
सुदेवी दासी ने कौनहाई गांव में जमीन खरीद कर राधा सुरभि गोशाला का निर्माण करवाया। इसमें 1800 से अधिक गोवंश हैं। इनमें से करीब 800 गोवंश घायल एवं बीमार हैं, जिनका गोशाला में उपचार किया जा रहा है। सुदेवी दासी 40 वर्षों से यहां गोसेवा कर रही हैं।
उम्मीद है कि सुषमा स्वराज मेरी वीजा अवधि को बढ़वा सकती हैं। सुदेवी दासी ने वीजा अवधि बढ़वाने को भारत सरकार को प्रार्थना पत्र भेजा गया था, जिसे सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है। यह कहते हुए सुदेवी दासी के आंसू निकल पड़े। उन्होंने कहा कि अगर वीजा अवधि नहीं बढ़ी तो मुझे बीमार और बेसहारा गायों की सेवा छोड़ कर अपने देश जर्मन जाना पड़ेगा।
सुदेवी दासी का वास्तविक नाम फ्रेडरिक इरिना ब्रूनिंग है। वो वर्ष 1978 में जर्मनी से ब्रज दर्शन के लिए आई थीं। इस पावन भूमि आकर इरिना इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने गुरु दीक्षा के बाद अपना नाम सुदेवी दासी रख लिया। इसके बाद यहां की होकर रह गईं।
सुदेवी दासी ने कौनहाई गांव में जमीन खरीद कर राधा सुरभि गोशाला का निर्माण करवाया। इसमें 1800 से अधिक गोवंश हैं। इनमें से करीब 800 गोवंश घायल एवं बीमार हैं, जिनका गोशाला में उपचार किया जा रहा है। सुदेवी दासी 40 वर्षों से यहां गोसेवा कर रही हैं।