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गंगा-यमुना नदियां नहीं सभ्यता हैं
अागरा ब्यूूराे
Updated Sat, 27 Feb 2016 01:15 AM IST
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ताज लिटरेचर फेस्टिवल में पहले दिन के गुलदस्ते में साहित्य, कला और संगीत की त्रिवेणी बही। ताज लिटरेचर फेस्टिवल जैसे आयोजनों से इसे विश्व लिटरेचर सिटी के रूप में विकसित करने की बात उठी। प्रख्यात फिल्मकार मुजफ्फर अली ने गंगा और यमुना नदियों की बदहाली का जिक्र करके कहा कि गंगा और यमुना महज नदियां नहीं बल्कि सभ्यता हैं। इन्हें सहेजने की जरूरत है। बात आगे बढ़ी तो जाने माने कलाकार अन्नू कपूर ने फिल्मी गीतों के साहित्य पर चर्चा की। असहिष्णुता और जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर नब्ज टटोली गई तो मीर, गालिब और नजीर की गजलों पर कथक नृत्य की प्रस्तुतियों के साथ महोत्सव की शाम का समापन हुआ।
ताज लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरा संस्करण का शुक्रवार होटल क्लार्क्स शीराज में शुभारंभ मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर, पुलिस महानिरीक्षक आगरा जोन डीसी मिश्रा, एडीए वीसी मनीषा त्रिघाटिया ने दीप जलाकर किया। कमिश्नर ने कहा कि ताजनगरी सूरदास, मीर तकी मीर, गालिब, नजीर अकबराबादी जैसी हस्तियों की कर्मभूमि रही है। ऐसे में ताज लिटरेचर फेस्टिवल जैसे आयोजनों के जरिये इसे विश्व लिटरेचर सिटी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि यूनेस्को ने आयरलैंड के डबलिन और चेक गणराज्य के प्राग को वर्ल्ड लिटरेचर सिटी घोषित किया है। हार्डवेयर यानी मुगलकालीन स्मारक यहां हैं, जरूरत बस साफ्टवेयर यानी कला, साहित्य और संगीत के क्षेत्र में विकास करने की है।
बालीवुड कलाकार अन्नू कपूर ने नजीर और कबीर की शायरी को जनवादी बताते हुए कहा कि गोपालदास नीरज भी प्रेम के कवि हैं। उन्होंने सुदामा चरित से देख सुदामा की दीन दशा, करुणाकर के करुणानिधि रोए, पानी परात को छुओ नहीं, नैनन के जल से पग धोए समेत कई उदाहरण देकर बताया कि साहित्य में प्रेम और करुणा के भाव रचनाकारों के निश्चल जीवन से ही संभव हैं। उन्होंने कई फिल्मी गीतों के उदाहरण देकर उन्हें साहित्य से जोड़ा। गंगा जमुनी तहजीब में प्रख्यात फिल्मकार ने गंगा और यमुना को सभ्यता का प्रतीक बताया। उनकी बदहाली बयां करके नदियों तो प्रदूषण से दूर रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि दरियाओं से रोमांस को जिंदा रखना होगा। दरिया हमारी सभ्याताओं से जुड़ी हैं। आनलाइन मीडिया और टीवी चैनलों ने कितना बदलाव किया है। इस पर सिद्धार्थ भाटिया, सौरिश भट्टाचार्य और अविरुक सेन के बीच चर्चा हुई। अनूप जलोटा ने अपनी किताब ‘हार्ट फेल्ट’ के अनुभवों पर जानी मानी आलोचक भारती प्रधान से चर्चा की। समापन फिल्मकार मुजफ्फर अली की परिकल्पना पर आधारित नाट्य प्रस्तुति मीर से गालिब के साथ हुआ। जावेद ने मीर, गालिब और नजीर की गजलों को पेश किया। इन पर कलाकारों ने कथक की प्रस्तुति दी। फेस्टिवल की आर्ट गैलरी में पेंटिंग प्रदर्शनी में एक से बढ़कर एक पेंटिंग का प्रदर्शन किया गया है। फोटो प्रदर्शनी और बुक फेयर भी लगाए गए हैं।
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ताज लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरा संस्करण का शुक्रवार होटल क्लार्क्स शीराज में शुभारंभ मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर, पुलिस महानिरीक्षक आगरा जोन डीसी मिश्रा, एडीए वीसी मनीषा त्रिघाटिया ने दीप जलाकर किया। कमिश्नर ने कहा कि ताजनगरी सूरदास, मीर तकी मीर, गालिब, नजीर अकबराबादी जैसी हस्तियों की कर्मभूमि रही है। ऐसे में ताज लिटरेचर फेस्टिवल जैसे आयोजनों के जरिये इसे विश्व लिटरेचर सिटी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि यूनेस्को ने आयरलैंड के डबलिन और चेक गणराज्य के प्राग को वर्ल्ड लिटरेचर सिटी घोषित किया है। हार्डवेयर यानी मुगलकालीन स्मारक यहां हैं, जरूरत बस साफ्टवेयर यानी कला, साहित्य और संगीत के क्षेत्र में विकास करने की है।
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बालीवुड कलाकार अन्नू कपूर ने नजीर और कबीर की शायरी को जनवादी बताते हुए कहा कि गोपालदास नीरज भी प्रेम के कवि हैं। उन्होंने सुदामा चरित से देख सुदामा की दीन दशा, करुणाकर के करुणानिधि रोए, पानी परात को छुओ नहीं, नैनन के जल से पग धोए समेत कई उदाहरण देकर बताया कि साहित्य में प्रेम और करुणा के भाव रचनाकारों के निश्चल जीवन से ही संभव हैं। उन्होंने कई फिल्मी गीतों के उदाहरण देकर उन्हें साहित्य से जोड़ा। गंगा जमुनी तहजीब में प्रख्यात फिल्मकार ने गंगा और यमुना को सभ्यता का प्रतीक बताया। उनकी बदहाली बयां करके नदियों तो प्रदूषण से दूर रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि दरियाओं से रोमांस को जिंदा रखना होगा। दरिया हमारी सभ्याताओं से जुड़ी हैं। आनलाइन मीडिया और टीवी चैनलों ने कितना बदलाव किया है। इस पर सिद्धार्थ भाटिया, सौरिश भट्टाचार्य और अविरुक सेन के बीच चर्चा हुई। अनूप जलोटा ने अपनी किताब ‘हार्ट फेल्ट’ के अनुभवों पर जानी मानी आलोचक भारती प्रधान से चर्चा की। समापन फिल्मकार मुजफ्फर अली की परिकल्पना पर आधारित नाट्य प्रस्तुति मीर से गालिब के साथ हुआ। जावेद ने मीर, गालिब और नजीर की गजलों को पेश किया। इन पर कलाकारों ने कथक की प्रस्तुति दी। फेस्टिवल की आर्ट गैलरी में पेंटिंग प्रदर्शनी में एक से बढ़कर एक पेंटिंग का प्रदर्शन किया गया है। फोटो प्रदर्शनी और बुक फेयर भी लगाए गए हैं।
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