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प्रशिक्षित व्यापारी ही कर सकेंगे खाद्य पदार्थों की बिक्री
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मैनपुरी। खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए अब व्यापारियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को शासन से पत्र मिलने के बाद प्रशिक्षण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अब केवल प्रशिक्षित व्यापारी की खाद्य पदार्थों का कारोबार कर सकेंगे। जल्द ही प्रशिक्षण शुरू होगा।
लगातार प्रयास के बाद भी खाद्य पदार्थों में मिलावट और मानकों की अनदेखी रुक नहीं पा रही है। इसके लिए शासन ने फूड सेफ्टी ट्रेनिंग एंड सर्टीफिकेशन (फॉस्टेक) का आयोजन करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत व्यापारियों को एक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें उन्होंने खाद्य पदार्थ के मानक के साथ ही उसके बेहतर रख-रखाव के बारे में जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर उन्हें इसका प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले व्यापारी को ही विभाग द्वारा लाइसेंस जारी किया जाएगा। वहीं जिन व्यापारियों के पास पहले से पंजीकरण या लाइसेंस है, उन्हें भी प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। अगर वे प्रशिक्षण नहीं लेते हैं तो उनके पंजीकरण या लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं होगा। इस प्रशिक्षण के लिए शुल्क भी चुकाना होगा। स्ट्रीट वेंडरों के लिए जहां दो सौ रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है तो वहीं व्यापारियों के लिए सात सौ रुपये का शुल्क अदा करना होगा। जल्द ही प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा।
ये होंगे फायदे
खाद्य पदार्थ के नमूने जांच में फेल होने के बाद कई बार व्यापारी कोर्ट में दलील देते हैं, कि उन्हें मानकों की जानकारी ही नहीं है। वे नहीं जानते कि खाद्य पदार्थ में कितना रंग या रसायन प्रयोग किए जाएं। ऐसे में जब उन्हें प्रशिक्षण मिलेगा तो हर पहलू की बारीकी से अधिकारी जानकारी देंगे। इससे काफी हद तक खाद्य पदार्थों को बेहतर करने में मदद मिलेगी।
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शासन के आदेश पर फॉस्टेक प्रशिक्षण व्यापारियों और वेंडरों को दिया जाएगा। इसके संबंध में कार्यक्रमों का आयोजन कर व्यापारियों को जानकारी दी जा रही है। सभी व्यापारियों को प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है।
रामसुंदर प्रसाद, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
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लगातार प्रयास के बाद भी खाद्य पदार्थों में मिलावट और मानकों की अनदेखी रुक नहीं पा रही है। इसके लिए शासन ने फूड सेफ्टी ट्रेनिंग एंड सर्टीफिकेशन (फॉस्टेक) का आयोजन करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत व्यापारियों को एक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें उन्होंने खाद्य पदार्थ के मानक के साथ ही उसके बेहतर रख-रखाव के बारे में जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर उन्हें इसका प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले व्यापारी को ही विभाग द्वारा लाइसेंस जारी किया जाएगा। वहीं जिन व्यापारियों के पास पहले से पंजीकरण या लाइसेंस है, उन्हें भी प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। अगर वे प्रशिक्षण नहीं लेते हैं तो उनके पंजीकरण या लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं होगा। इस प्रशिक्षण के लिए शुल्क भी चुकाना होगा। स्ट्रीट वेंडरों के लिए जहां दो सौ रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है तो वहीं व्यापारियों के लिए सात सौ रुपये का शुल्क अदा करना होगा। जल्द ही प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा।
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ये होंगे फायदे
खाद्य पदार्थ के नमूने जांच में फेल होने के बाद कई बार व्यापारी कोर्ट में दलील देते हैं, कि उन्हें मानकों की जानकारी ही नहीं है। वे नहीं जानते कि खाद्य पदार्थ में कितना रंग या रसायन प्रयोग किए जाएं। ऐसे में जब उन्हें प्रशिक्षण मिलेगा तो हर पहलू की बारीकी से अधिकारी जानकारी देंगे। इससे काफी हद तक खाद्य पदार्थों को बेहतर करने में मदद मिलेगी।
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शासन के आदेश पर फॉस्टेक प्रशिक्षण व्यापारियों और वेंडरों को दिया जाएगा। इसके संबंध में कार्यक्रमों का आयोजन कर व्यापारियों को जानकारी दी जा रही है। सभी व्यापारियों को प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है।
रामसुंदर प्रसाद, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी।