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आत्मनिर्भरता नई उड़ान: आगरा की 36,655 महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी', कुटीर उद्योगों से बदल रही तकदीर
Fri, 19 Jun 2026 10:25 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 19 Jun 2026 10:25 AM IST
सार
आगरा में 36,655 ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर लघु और कुटीर उद्योगों के माध्यम से लखपति दीदी' बन चुकी हैं। साबुन, डिटर्जेंट और अन्य घरेलू उत्पाद बनाकर ये महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ भी बन रही हैं।
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लखपति दीदी योजना
- फोटो : AI Generated
विस्तार
महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास रंग ला रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर लखपति दीदी बन रही हैं। जिले की 36,655 महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में चिह्नित किया गया है, जो लघु और कुटीर उद्योगों के जरिए स्वावलंबन की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में वर्तमान में करीब 1,73,324 ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुकी हैं। इस आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम में 22,131 नई महिलाएं हाल ही में अभियान से जुड़ी हैं। विकास खंडों में इन समूहों को आपस में मिलाकर संकुल (क्लस्टर) बनाए गए हैं, जिसके माध्यम से बड़े स्तर पर लघु उद्योगों का संचालन किया जा रहा है।
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उपायुक्त स्वत (रोजगार) रामायण सिंह यादव ने बताया कि कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए उन्हें कौशल विकास के विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दिए जाते हैं। उद्देश्य सिर्फ महिलाओं को समूह से जोड़ना नहीं, बल्कि विभिन्न तरह के घरेलू, कुटीर और लघु उद्योगों के माध्यम से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है।
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ममता की कृष्णा हर्बल बनी सफलता की मिसाल
ब्लाॅक सैंया क्षेत्र की ग्राम पंचायत बिरथला में संचालित कृष्णा हर्बल लघु उद्योग समिति इसका जीवंत उदाहरण है। इस समिति की अध्यक्ष ममता आज जिले की प्रमुख लखपति दीदियों में से एक हैं। उनकी समिति साबुन, हैंडवॉश, डिटर्जेंट पाउडर और टॉयलेट क्लीनर जैसे घरेलू उत्पादों का निर्माण करती है, जिनकी सप्लाई जिले के कई क्षेत्रों में हो रही है। ममता की तरह ही हजारों महिलाएं अब घरेलू और कुटीर उद्योग संभालकर अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं।
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उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में वर्तमान में करीब 1,73,324 ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुकी हैं। इस आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम में 22,131 नई महिलाएं हाल ही में अभियान से जुड़ी हैं। विकास खंडों में इन समूहों को आपस में मिलाकर संकुल (क्लस्टर) बनाए गए हैं, जिसके माध्यम से बड़े स्तर पर लघु उद्योगों का संचालन किया जा रहा है।
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उपायुक्त स्वत (रोजगार) रामायण सिंह यादव ने बताया कि कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए उन्हें कौशल विकास के विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दिए जाते हैं। उद्देश्य सिर्फ महिलाओं को समूह से जोड़ना नहीं, बल्कि विभिन्न तरह के घरेलू, कुटीर और लघु उद्योगों के माध्यम से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है।
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ममता की कृष्णा हर्बल बनी सफलता की मिसाल
ब्लाॅक सैंया क्षेत्र की ग्राम पंचायत बिरथला में संचालित कृष्णा हर्बल लघु उद्योग समिति इसका जीवंत उदाहरण है। इस समिति की अध्यक्ष ममता आज जिले की प्रमुख लखपति दीदियों में से एक हैं। उनकी समिति साबुन, हैंडवॉश, डिटर्जेंट पाउडर और टॉयलेट क्लीनर जैसे घरेलू उत्पादों का निर्माण करती है, जिनकी सप्लाई जिले के कई क्षेत्रों में हो रही है। ममता की तरह ही हजारों महिलाएं अब घरेलू और कुटीर उद्योग संभालकर अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं।
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