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Firozabad: क्रांतिकारियों ने फूंक दिया था हिरनगांव स्टेशन, अंग्रेजों से लगवाए थे महात्मा गांधी की जय के नारे

Thu, 11 Aug 2022 01:11 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 11 Aug 2022 01:11 PM IST
सार

फिरोजाबाद स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आगरा जिले का हिस्सा था। उस वक्त गांव रूपसपुर के निवासी भूप सिंह शर्मा के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी फौज से हथियार डलवाकर महात्मा गांधी की जय के नारे लगवाए थे । 

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freedom fighters burnt the Hirangaon station on 17 August 1942 in Agra
स्वतंत्रता सेनानी भूप सिंह शर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जंग-ए-आजादी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित भूप सिंह शर्मा के नेतृत्व में सक्रिय क्रांतिकारियों की टोली ने 17 अगस्त 1942 को हिरनगांव स्टेशन को जलाने का काम किया था। अंग्रेजों से लोहा लेने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजन इस बात से आहत हैं कि आजादी के पुरोधा को सम्मान नहीं मिल सका। उनके नाम पर बनाए गए स्टेडियम का नाम भी बदल दिया गया। 

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फिरोजाबाद स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आगरा जिले का हिस्सा था। भारत छोड़ो आंदोलन की रणनीति बनाते हुए देशभक्त क्रांतिकारियों ने 17 अगस्त 1942 को हिरनगांव रेलवे स्टेशन को जलाने का काम किया था। पंडित भूप सिंह शर्मा ने बड़ी क्रांति छेड़ दी थी। वह गांव रूपसपुर के निवासी थे। लेकिन इसकी रणनीति यमुना की तलहटी के गांव गुदाऊं में तैयार होती थी। 

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अंग्रेजों से लगवाए थे गांधी जी के जय के नारे 

तानाशाह दरोगा इमदाद खां और तहसीलदार अंग्रेजी सेना के साथ इन्हें पकड़ने को आ गए थे, लेकिन देशभक्ति के जज्बे ने फिरंगियों के हथियार गिरवा लिए थे। स्वतंत्रता सेनानी ने अंग्रेजों से महात्मा गांधी की जय के नारे लगवाए थे। खाली हाथ लौटी सेना की खबर गवर्नर जनरल को तार द्वारा दी गई। इसके बाद हैदराबाद रेजीमेंट सेनानी की कई कंपनियां आजादी के दीवानों को पकड़ने के लिए भेजी गईं। 

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काफी प्रयास के बाद स्वतंत्रता सेनानी भूपसिंह को गिरफ्तार करके आगरा की जेल में भेज दिया गया था। स्वतंत्रता सेनानी के नाम से गांव में जूनियर हाईस्कूल का नाम रखने के साथ उनके नाम से एक स्टेडियम का नाम रखा गया था। बाद में स्टेडियम से स्वतंत्रता सेनानी का नाम हटाकर उसे दाऊदयाल स्टेडियम कर दिया गया। 

बेटी ने कहा, पिता को नहीं मिला सम्मान  

स्वतंत्रता सेनानी भूप सिंह शर्मा की पुत्री मंजू शर्मा एडवोकेट बोलीं, पिता ने स्वतंत्रता आंदोलन को जितना संघर्ष किया वैसा सम्मान नहीं मिला। वह डॉ. राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण जैसे अनेक क्रांतिकारियों के साथ रहे। राज्यसभा भेजा जाना चाहिए। मेरे पिता के नाम से जलेसर रोड पर स्टेडियम का नामकरण किया गया। लेकिन तकलीफ तो तब हुई जब सपा शासन में उस स्टेडियम का नाम बदला गया। मैंने इसका विरोध भी किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 

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