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अगस्त क्रांति की ज्वाला में जल उठा था बरहन स्टेशन, एक हजार क्रांतिकारियों ने बोला था हमला
Tue, 13 Aug 2019 12:14 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 13 Aug 2019 12:14 AM IST
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बरहन रेलवे स्टेशन
- फोटो : अमर उजाला
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ताजनगरी में 1942 की अगस्त क्रांति की ज्वाला प्रचंड रूप में धधकी थी। फिरंगियों की हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए आजादी के दीवानों ने प्राणों की परवाह किए बगैर जोखिम भरे कदम उठाए। इन्हीं में से एक था बरहन रेलवे स्टेशन फूंकना।
14 अगस्त, 1942 को एक साथ एक हजार क्रांतिकारियों ने धावा बोला था। फिरंगी हुकूमत बर्बरता पर उतर चुकी थी। क्रांतिकारियों को सीधे गोली मारी जा रही थी। स्टेशन पर हमला क्रूरता का बदला लेने के लिए ही किया गया था। एक हजार लोग आठ-दस टुकड़ियों में बंटे, फिर एकसाथ हमला किया।
किताब समय चक्र में इसका विस्तार से उल्लेख किया गया है। हमले होते ही स्टेशन धूं-धूं कर जलने लगा। स्टेशन को तहस-नहस कर जनसमूह कस्बे की ओर बढ़ा। सरकारी गोदाम से हजार मन गल्ला लूटकर जरूरतमंद ग्रामीणों में बांट दिया गया था।
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गल्ला लुट जाने के बाद पुलिस आ गई। सीधे गोली चला दी। क्रांतिकारी हटे नहीं। इस फायरिंग में बैनई गांव के केवल सिंह जाटव शहीद हो गए। कई क्रांतिकारी घायल हुए। इसके बाद क्रांतिकारियों ने बैठक कर तय किया कि बरहन की तरह अन्य स्टेशनों को भी फूंका जाएगा।
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14 अगस्त, 1942 को एक साथ एक हजार क्रांतिकारियों ने धावा बोला था। फिरंगी हुकूमत बर्बरता पर उतर चुकी थी। क्रांतिकारियों को सीधे गोली मारी जा रही थी। स्टेशन पर हमला क्रूरता का बदला लेने के लिए ही किया गया था। एक हजार लोग आठ-दस टुकड़ियों में बंटे, फिर एकसाथ हमला किया।
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किताब समय चक्र में इसका विस्तार से उल्लेख किया गया है। हमले होते ही स्टेशन धूं-धूं कर जलने लगा। स्टेशन को तहस-नहस कर जनसमूह कस्बे की ओर बढ़ा। सरकारी गोदाम से हजार मन गल्ला लूटकर जरूरतमंद ग्रामीणों में बांट दिया गया था।
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गल्ला लुट जाने के बाद पुलिस आ गई। सीधे गोली चला दी। क्रांतिकारी हटे नहीं। इस फायरिंग में बैनई गांव के केवल सिंह जाटव शहीद हो गए। कई क्रांतिकारी घायल हुए। इसके बाद क्रांतिकारियों ने बैठक कर तय किया कि बरहन की तरह अन्य स्टेशनों को भी फूंका जाएगा।
अदालत में विस्फोट से हिल गए थे फिरंगी अधिकारी
अगस्त क्रांति के समय आगरा का जिलाधीश शिवदसानी था। वो क्रांतिकारियों के प्रति क्रूर था। उसे सबक सिखाने के लिए क्रांतिकारियों ने उस पर कई बार हमला किया लेकिन वो भाग्यवश बचता रहा। एक बार उसकी कार में बम रखा। यह उस समय फट गया जब वो बाहर था।
इसके बाद क्रांतिकारियों ने उसे अदालत में उड़ा देने की योजना बनाई। क्रांतिकारियों ने एक दिन उसकी मेज पर बम रख दिया लेकिन उसके आने से पहले बम फूट गया। इससे अदालत की दीवारों का नुकसान पहुंचा, वहां रखी मुकदमों से संबंधित फाइलें जल गई। इस घटना से फिरंगी अफसर सहम गए थे।
इसके बाद क्रांतिकारियों ने उसे अदालत में उड़ा देने की योजना बनाई। क्रांतिकारियों ने एक दिन उसकी मेज पर बम रख दिया लेकिन उसके आने से पहले बम फूट गया। इससे अदालत की दीवारों का नुकसान पहुंचा, वहां रखी मुकदमों से संबंधित फाइलें जल गई। इस घटना से फिरंगी अफसर सहम गए थे।
12 अगस्त को बनी थी फिरंगियों को सबक सिखाने की रणनीति
नौ अगस्त को अगस्त क्रांति की शुरुआत हुई। मुंबई में महात्मा गांधी और अन्य नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। करो या मरो का नारा लगाते हुए आगरा के लोग भी फिरंगियों की हुकूमत उखाड़ फेंकने के लिए पूरी तैयारी के साथ थे।
नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में दस अगस्त को आगरा बंद रखा गया, दुकानों के बाहर काले झंडे लगाए गए। आंवलखेड़ा में 12 अगस्त को क्षेत्र के कार्यकर्ता एकत्र हुए। इसकी अध्यक्षता जिला कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन मंत्री ठाकुर उल्फत सिंह चौहान निर्भय ने की।
राम सिंह चौहान, साहब सिंह, श्रीराम अधीर, सीताराम गर्ग, स्वामी जयंती प्रसाद, लक्ष्मीनारायण आजाद, पंडित सालिगराम, मिठ्ठूलाल, पंडित प्यारेलाल (हसनपुर), सोहनलाल गुप्ता, राम प्रसाद, महाराज सिंह, हरज्ञान सिंह मौजूद रहे। जगह-जगह बैठक कर रणनीति बनीं। इसके बाद क्रांति की ज्वाला और तेज हो गई थी।
नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में दस अगस्त को आगरा बंद रखा गया, दुकानों के बाहर काले झंडे लगाए गए। आंवलखेड़ा में 12 अगस्त को क्षेत्र के कार्यकर्ता एकत्र हुए। इसकी अध्यक्षता जिला कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन मंत्री ठाकुर उल्फत सिंह चौहान निर्भय ने की।
राम सिंह चौहान, साहब सिंह, श्रीराम अधीर, सीताराम गर्ग, स्वामी जयंती प्रसाद, लक्ष्मीनारायण आजाद, पंडित सालिगराम, मिठ्ठूलाल, पंडित प्यारेलाल (हसनपुर), सोहनलाल गुप्ता, राम प्रसाद, महाराज सिंह, हरज्ञान सिंह मौजूद रहे। जगह-जगह बैठक कर रणनीति बनीं। इसके बाद क्रांति की ज्वाला और तेज हो गई थी।