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ई मेल के फेर में फंसे खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केंद्र के प्रधानाचार्य, गंवाए 30 लाख रुपए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 20 Oct 2018 11:55 AM IST
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- फोटो : डेमो
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अमेरिका की कंपनी से व्यापार के नाम पर आगरा के राजकीय खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केंद्र के प्रधानाचार्य के साथ 30 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई। उन्होंने थाना हरीपर्वत में तहरीर दी है। मामला साइबर सेल जांच के लिए भेजा गया है।
प्रशिक्षण केंद्र पालीवाल पार्क में है। इसके प्रधानाचार्य गांधी नगर निवासी अवध नारायण त्रिपाठी हैं। अगस्त में उनके पास एक ईमेल आया। ई मेल में एक व्यक्ति का नाम लिखा था। उसके नाम के आगे अमेरिका की फैलो पेट कंपनी का अधिकारी लिखा हुआ था।
जब उन्होंने कॉल किया तो बताया कि घोड़ों में कई बीमारियां सामने आ रही हैं। उनकी कंपनी बीमार घोड़ों के लिए वैक्सीन बनाती है। वैक्सीन एक ऑर्गेनिक मैटेरियल से तैयार होती है। मैटेरियल मुंबई की अवंतिका और पूजा इंटरप्राइजेज सप्लाई करती हैं। उनकी कंपनी सीधे मैटेरियल नहीं खरीद सकती है।
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प्रशिक्षण केंद्र पालीवाल पार्क में है। इसके प्रधानाचार्य गांधी नगर निवासी अवध नारायण त्रिपाठी हैं। अगस्त में उनके पास एक ईमेल आया। ई मेल में एक व्यक्ति का नाम लिखा था। उसके नाम के आगे अमेरिका की फैलो पेट कंपनी का अधिकारी लिखा हुआ था।
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जब उन्होंने कॉल किया तो बताया कि घोड़ों में कई बीमारियां सामने आ रही हैं। उनकी कंपनी बीमार घोड़ों के लिए वैक्सीन बनाती है। वैक्सीन एक ऑर्गेनिक मैटेरियल से तैयार होती है। मैटेरियल मुंबई की अवंतिका और पूजा इंटरप्राइजेज सप्लाई करती हैं। उनकी कंपनी सीधे मैटेरियल नहीं खरीद सकती है।
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ज्यादा मुनाफा का दिया लालच
अवध नारायण से कहा कि वो अवंतिका और पूजा इंटरप्राइजेज से मैटेरियल खरीदें। इसके बाद कंपनी को सप्लाई करें। उन्हें ज्यादा मुनाफा होगा। इस पर उन्होंने अपने बेरोजगार बेटों का व्यापार कराने का प्लान बनाया।
कंपनी के अधिकारी की बातों पर यकीन करते हुए माल मंगवाया। पहली बार कम माल मंगवाया। इसके बाद कंपनी का एजेंट आया। वह माल का सैंपल लेकर गया। कुछ दिन बाद बताया गया कि सेंपल लैब में पास हो गया है। उन्हें बड़ा आर्डर दे दिया गया।
पेमेंट माल की डिलीवरी के बाद करने की बात कही। मुंबई की एजेंसी के खाते में चार बार में 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। मगर, माल नहीं आया। अब विदेशी कंपनी का अधिकारी भी फोन नहीं उठा रहा है।
पहले भी आए हैं मामले सामने
साइबर सेल में घोड़ों की वैक्सीन के नाम पर ठगी करने के मामले पहले भी आ चुके हैं। इन मामलों में आरोपियों के फोन नंबर की आईडी गलत होने की वजह से कोई कार्रवाई भी नहीं हो पाती है। बिना सोचे समझें किसी कंपनी के खाते में रुपये जमा करने से लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं।
कंपनी के अधिकारी की बातों पर यकीन करते हुए माल मंगवाया। पहली बार कम माल मंगवाया। इसके बाद कंपनी का एजेंट आया। वह माल का सैंपल लेकर गया। कुछ दिन बाद बताया गया कि सेंपल लैब में पास हो गया है। उन्हें बड़ा आर्डर दे दिया गया।
पेमेंट माल की डिलीवरी के बाद करने की बात कही। मुंबई की एजेंसी के खाते में चार बार में 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। मगर, माल नहीं आया। अब विदेशी कंपनी का अधिकारी भी फोन नहीं उठा रहा है।
पहले भी आए हैं मामले सामने
साइबर सेल में घोड़ों की वैक्सीन के नाम पर ठगी करने के मामले पहले भी आ चुके हैं। इन मामलों में आरोपियों के फोन नंबर की आईडी गलत होने की वजह से कोई कार्रवाई भी नहीं हो पाती है। बिना सोचे समझें किसी कंपनी के खाते में रुपये जमा करने से लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं।