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चार पुलिसकर्मियों को करना होगा सच का सामना
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आगरा। पुलिस लाइन स्थित एसपी क्राइम के ऑफिस से विभागीय जांच की फाइल चोरी के मामले में चार पुलिसकर्मियों को सच का सामना करना होगा। इस संबंध में एसएसपी मुनिराज जी. ने केस के विवेचक को पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के निर्देश दिए हैं। शक के घेरे में चार पुलिसकर्मी हैं। विधि विज्ञान प्रयोगशाला को पत्र लिख दिया गया है।
दिसंबर 2020 में सोशल मीडिया पर एसआई सीमा रावल का एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ था। इसमें वो एक मुकदमे के संबंध में बात कर रही थीं। इसमें लेनदेन की बात हो रही थी। उन्होंने एक निरीक्षक को भी कठघरे में खड़ा किया था। इस मामले की जांच कराई गई थी। आईपीएस अधिकारी की प्रारंभिक जांच में दोनों को दोषी पाया गया था। विभागीय जांच की संस्तुति की गई थी। तत्कालीन एसपी क्राइम जांच कर रहे थे। जांच की फाइल कार्यालय में रखी हुई थी। इसमें एक सीडी, बयान और बहस के अलावा अन्य दस्तावेज भी थे। एक मार्च की रात को यह फाइल चोरी हो गई थी। इस पर कार्यालय के हेड कांस्टेबल जितेंद्र सिंह ने थाना शाहगंज में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
केस की विवेचना एसआई जितेंद्र गौतम कर रहे हैं। शुक्रवार को एसएसपी मुनिराज जी. ने उन्हें तलब किया। मुकदमे की प्रगति की जानकारी ली। विवेचक ने बताया कि निरीक्षक का तबादला हो गया है। पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला को पत्र भेजकर समय मांगा है। सच जानने के लिए चार पुलिसकर्मियों का टेस्ट कराया जाएगा।
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इस मामले में एसपी क्राइम कार्यालय में तैनात हेड कांस्टेबल सहित दो पुलिसकर्मियों से पूछताछ की गई थी। तत्कालीन एसएसपी बबलू कुमार और एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने भी पूछताछ की थी। मगर, कोई नतीजा नहीं निकल सका था। आशंका जताई गई कि बाहर का कोई व्यक्ति चोरी नहीं कर सकता है। फाइल गायब होने से जिन लोगों को फायदा होना था, उनको शक के घेरे में रखा गया है।
एसएसपी मुनिराज जी. ने बताया कि केस में विवेचना कराई जा रही है। पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का फैसला लिया गया है, जिससे सच सामने आ सके। मुकदमे को प्राथमिकता पर लिया गया है। पुलिसकर्मी दोषी साबित होते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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दिसंबर 2020 में सोशल मीडिया पर एसआई सीमा रावल का एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ था। इसमें वो एक मुकदमे के संबंध में बात कर रही थीं। इसमें लेनदेन की बात हो रही थी। उन्होंने एक निरीक्षक को भी कठघरे में खड़ा किया था। इस मामले की जांच कराई गई थी। आईपीएस अधिकारी की प्रारंभिक जांच में दोनों को दोषी पाया गया था। विभागीय जांच की संस्तुति की गई थी। तत्कालीन एसपी क्राइम जांच कर रहे थे। जांच की फाइल कार्यालय में रखी हुई थी। इसमें एक सीडी, बयान और बहस के अलावा अन्य दस्तावेज भी थे। एक मार्च की रात को यह फाइल चोरी हो गई थी। इस पर कार्यालय के हेड कांस्टेबल जितेंद्र सिंह ने थाना शाहगंज में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
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केस की विवेचना एसआई जितेंद्र गौतम कर रहे हैं। शुक्रवार को एसएसपी मुनिराज जी. ने उन्हें तलब किया। मुकदमे की प्रगति की जानकारी ली। विवेचक ने बताया कि निरीक्षक का तबादला हो गया है। पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला को पत्र भेजकर समय मांगा है। सच जानने के लिए चार पुलिसकर्मियों का टेस्ट कराया जाएगा।
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इस मामले में एसपी क्राइम कार्यालय में तैनात हेड कांस्टेबल सहित दो पुलिसकर्मियों से पूछताछ की गई थी। तत्कालीन एसएसपी बबलू कुमार और एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने भी पूछताछ की थी। मगर, कोई नतीजा नहीं निकल सका था। आशंका जताई गई कि बाहर का कोई व्यक्ति चोरी नहीं कर सकता है। फाइल गायब होने से जिन लोगों को फायदा होना था, उनको शक के घेरे में रखा गया है।
एसएसपी मुनिराज जी. ने बताया कि केस में विवेचना कराई जा रही है। पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का फैसला लिया गया है, जिससे सच सामने आ सके। मुकदमे को प्राथमिकता पर लिया गया है। पुलिसकर्मी दोषी साबित होते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।