{"_id":"6408a6139e6023d089016e85","slug":"forty-day-holi-festival-comes-to-grand-end-in-barsana-at-mathura-2023-03-08","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बरसाना में होली उत्सव का शानदार समापनः गर्भ गृह से निकल लाडली जी ने बरसाई कृपा, मस्ती में झूम उठे श्रद्धालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बरसाना में होली उत्सव का शानदार समापनः गर्भ गृह से निकल लाडली जी ने बरसाई कृपा, मस्ती में झूम उठे श्रद्धालु
Wed, 08 Mar 2023 08:43 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Wed, 08 Mar 2023 08:43 PM IST
सार
मथुरा के बरसाना में मनाए जाने वाले चालीस दिवसीय होली महोत्सव का बुधवार को समापन हो गया। इस मौके पर राधारानी के दर्शन को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। लाडलीजी ने अपने गर्भ गृह से निकलकर उन पर कृपा बरसाई।
विज्ञापन
लाडलीजी ने श्रद्धालुओं पर बरसाई कृपा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश की तीर्थनगरी मथुरा में चंहुओर होली की धूम रही। अपने आराध्य के दर्शन की अभिलाषा विश्वभर से श्रद्धालु पहुंचे। यहां उन्होंने होली उत्सव का जमकर आनंद लिया। इसके साथ ही बृषभान नंदनी के निज धाम बरसाना होली के धमार का समापन बुधवार को 'जो जीवैगो सो खेलेगौ, ढप धर दै यार गई अगले बरस की' पद के साथ हो गया। पद के अनुसार, समाज गायन में उपयोग आने वाली ढप का वर्णन है। इसमें यह भाव है कि ढप को अब सुरक्षित धर दें, जो अगली साल तक जीयेगा वो इस ढप को बजाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस दौरान राधारानी ने अपने गर्भगृह से बाहर निकलकर मंदिर परिसर में स्थित सफेद छतरी में विराजमान होकर अपने भक्तों पर कृपा का सागर उड़ेला। इस उत्सव की शुरुआत बंसत पंचमी के दिन से होती है और यह उत्सव चालीस दिन तक चलता है। बरसाना में होने वाली प्रसिद्ध लड्डू व लठामार होली के साथ फाग महोत्सव का शुभारंभ बंसत के दिन लाडली जी मंदिर में ध्वजरूपी डाड़ा गाड़कर किया जाता है। चालीस दिवसीय इस होली महोत्सव के आनंद के रंग में श्रद्धालु बड़े भाव से राधाकृष्ण की इन लीलाओं का आनंद लेते हैं।
विज्ञापन
गर्भ गृह से निकलता लाड़ली जी का डोला
- फोटो : अमर उजाला
गोस्वामी समाज के लोगों द्वारा मंदिर परिसर में फाग महोत्सव का अंतिम पद जीवेगो सो खेलेगो..... गाकर चलीस दिवसीय होली धमार का समापन कर दिया गया। इसके बाद ढप, मृदंग, झांझ आदि को अगले साल के लिए उठाकर रख दिया। वहीं शाम पांच बजे बृषभान नंदनी के डोला को सेवायत कंधों पर उठाकर मंदिर परिसर में बनी संगमरमर की सफेद छतरी में विराजमान किया। होली महोत्सव के अंतिम दिन राधाकृष्ण के युगल जोड़ी के दर्शनकर श्रद्धालु अपने आपको कृतार्थ मान रहे थे।
लाडली जी के दर्शनों को उमड़ा जनसैलाब
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान बृषभान नंदनी भी अपने भक्तों पर कृपा का सागर उडे़ल रही थी। शाम सात बजे लाडली जी के डोले को वापस मंदिर में ले जाया गया। इसके उपरांत गोस्वामी समाज की कन्याओं द्वारा आरती की गई। वहीं श्यामा प्यारी के नजदीक से दर्शन करने के लिए श्रद्धालु बेताब नजर आ रहे थे। पूरा मंदिर परिसर राधाकृष्ण के जयघोष से गुंजयमान हो रहा था।