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UP: रिश्वतखोर सिपाहियों की गिरफ्तारी न होने पर पूर्व आईपीएस ने उठाए सवाल; प्रशिक्षु दरोगाओं से ली थी रिश्वत
Sat, 29 Jun 2024 01:33 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 29 Jun 2024 01:33 PM IST
सार
प्रशिक्षु दरोगाओं से थाने में तैनाती के नाम पर रिश्वत लेने वाले सिपाहियों की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इस मामले में पूर्व आईपीएस व आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने डीजीपी को पत्र लिखकर शिकायत की है।
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agra police
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा के थाना शाहगंज में 16 अप्रैल 2024 को सिपाही सहगल तेवतिया और अभिषेक काकरान द्वारा प्रशिक्षु दरोगाओं से पोस्टिंग के लिए घूस मांगे जाने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी। इस मामले में आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर द्वारा की गई शिकायत के बाद इन सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है, किंतु अब तक इनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
यह जानकारी आगरा पुलिस द्वारा शाहगंज थाने के उप निरीक्षक राजेंद्र सिंह द्वारा दी गई आख्या में अंकित है। राजेंद्र सिंह ने अपनी आख्या में कहा है कि साक्ष्य संकलन और गवाहा के आधार पर मामले की विवेचना की जा रही है। अभी अन्य किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है.
इस पर अमिताभ ठाकुर ने डीजीपी को पत्र लिखकर कहा है कि यह एफआईआर प्रशिक्षु आईपीएस मयंक पाठक द्वारा की गई जांच में फोन पे के माध्यम से घूस लिए जाने की पुष्टि होने के बाद इंस्पेक्टर शाहगंज द्वारा दर्ज कराया गया। इसके बाद भी अभी ढाई महीने तक कोई कार्रवाई नहीं होना पुलिस के आचरण को संदिग्ध बनाता है। अतः उन्होंने इस मामले की विवेचना किसी वरिष्ठ अफसर से कराते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
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यह जानकारी आगरा पुलिस द्वारा शाहगंज थाने के उप निरीक्षक राजेंद्र सिंह द्वारा दी गई आख्या में अंकित है। राजेंद्र सिंह ने अपनी आख्या में कहा है कि साक्ष्य संकलन और गवाहा के आधार पर मामले की विवेचना की जा रही है। अभी अन्य किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है.
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इस पर अमिताभ ठाकुर ने डीजीपी को पत्र लिखकर कहा है कि यह एफआईआर प्रशिक्षु आईपीएस मयंक पाठक द्वारा की गई जांच में फोन पे के माध्यम से घूस लिए जाने की पुष्टि होने के बाद इंस्पेक्टर शाहगंज द्वारा दर्ज कराया गया। इसके बाद भी अभी ढाई महीने तक कोई कार्रवाई नहीं होना पुलिस के आचरण को संदिग्ध बनाता है। अतः उन्होंने इस मामले की विवेचना किसी वरिष्ठ अफसर से कराते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
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