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Agra News: खिलते हैं गुल यहां, खिल के बिखरने को
Fri, 05 Jan 2024 01:38 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Fri, 05 Jan 2024 01:38 AM IST
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आगरा। गीतों के वो राजकुमार थे। जब बोलते तो शब्द फूल बनकर झरते और व्यथा आंसू बनकर बह जाती। देश-काल-परिस्थिति चाहे कोई भी रही हो, न शोखियों में गुलाब घुलना बंद हुए और न ही गुजरते गुबार से कारवां का गुजरना। ए भाई जरा देख के चलो से खिलते हुए गुल यहां, खिल के बिछड़ने को... और नहीं होंगे जुदा से अब तो मजहब कोई ऐसा चलाया जाए तक नीरज का निरंतर कारवां बृहस्पतिवार को डॉ. एमपीएस वर्ल्ड स्कूल में चला।
मौका था इबादत फाउंडेशन और महाकवि गोपाल दास नीरज फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम निरंतर नीरज का। जिसमें पद्मश्री के 99वें जन्म दिवस पर नीरज के 70 सालों के सफर को किस्सों और गीतों में पिरोकर प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में नीरज से जुड़े तमाम अनजान किस्से और फिल्मी गीतों की रचना के बेमिसाल किस्से पेश किए गए। बताया कि एक बार नीरज मध्य प्रदेश से कवि सम्मेलन करके लौट रहे थे, रास्ते में डाकू मान सिंह ने उनको पकड़ लिया, पूछा क्या करते हो? नीरज बेखौफ बोले कवि हूं....इतना सुनते ही मानसिंह ने नीरज को कविताएं सुनाने को कहा....फिर उस रात बीहड़ का जंगल गीतों से गुलजार हुआ। अगली सुबह मानसिंह ने न केवल नीरज को ससम्मान छोड़ा बल्कि इनाम भी दिया।
किस्सों के बीच में इबादत फाउंडेशन के मंझे हुए कलाकार नीरज के सुप्रसिद्ध गानों को सुर देते तो लोग वाह-वाह कह उठते। रंगीला रे.....लिखे जो खत तुझे और फूलों के रंग से दिल की कलम से गीतों के साथ दर्शक खुद भी गीत गुनगुनाने को मजबूर हुए। मुख्य अतिथि उपेंद्र राय थे, इस दौरान डॉ. एमपीएस वर्ल्ड स्कूल के एके सिंह, केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल, कवि पवन आगरी, शशांक प्रभाकर, मृगांक प्रभाकर, अरस्तु प्रभाकर आदि मौजूद रहे।
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मौका था इबादत फाउंडेशन और महाकवि गोपाल दास नीरज फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम निरंतर नीरज का। जिसमें पद्मश्री के 99वें जन्म दिवस पर नीरज के 70 सालों के सफर को किस्सों और गीतों में पिरोकर प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में नीरज से जुड़े तमाम अनजान किस्से और फिल्मी गीतों की रचना के बेमिसाल किस्से पेश किए गए। बताया कि एक बार नीरज मध्य प्रदेश से कवि सम्मेलन करके लौट रहे थे, रास्ते में डाकू मान सिंह ने उनको पकड़ लिया, पूछा क्या करते हो? नीरज बेखौफ बोले कवि हूं....इतना सुनते ही मानसिंह ने नीरज को कविताएं सुनाने को कहा....फिर उस रात बीहड़ का जंगल गीतों से गुलजार हुआ। अगली सुबह मानसिंह ने न केवल नीरज को ससम्मान छोड़ा बल्कि इनाम भी दिया।
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किस्सों के बीच में इबादत फाउंडेशन के मंझे हुए कलाकार नीरज के सुप्रसिद्ध गानों को सुर देते तो लोग वाह-वाह कह उठते। रंगीला रे.....लिखे जो खत तुझे और फूलों के रंग से दिल की कलम से गीतों के साथ दर्शक खुद भी गीत गुनगुनाने को मजबूर हुए। मुख्य अतिथि उपेंद्र राय थे, इस दौरान डॉ. एमपीएस वर्ल्ड स्कूल के एके सिंह, केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल, कवि पवन आगरी, शशांक प्रभाकर, मृगांक प्रभाकर, अरस्तु प्रभाकर आदि मौजूद रहे।
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