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कासगंज में बाढ़ : तटीय गावों में पहुंची गंगा की धार
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कासगंज/गंजडुंडवारा। उफनती गंगा की धारा अब नदी की सीमाओं को लांघकर खादर के खेतों तक पहुंच गई है। तटवर्ती इलाके के खेतों की फसलों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। गन्ना को छोड़कर अन्य फसलों को नुकसान की आशंका है। मीडियम फ्लड के लिए संवेदनशील 15 से अधिक गांव की आबादी तक बाढ़ का पानी दस्तक दे चुका है। ग्रामीण जगह-जगह मिट्टी के बंधे बनाकर आबादी में पानी को घुसने से रोकने के उपाय कर रहे हैं। हालांकि गंगा नदी का जलस्तर बुधवार की सुबह स्थिर रहा। मंगलवार को कछला ब्रिज का गेज 163.70 मीटर के निशान पर था। बुधवार सुबह 8 बजे भी गंगा इसी निशान पर थी।
मीडियम फ्लड के लिए सर्वाधिक संवेदनशील माने जाने वाले गांव किलौनी, किसौल, बस्तौली, नगला दल, बरौना, महमूदपुर पुख्ता, समसपुर, बगवास, नगरिया दुलाई, नगला खंदारी, नैथरा, मेहोला, निबिया असदगढ़, नरदौली इलाके के खादर के खेतों में बाढ़ का पानी भर गया है। पूरा इलाका जलमग्न है। धीरे-धीरे आबादी क्षेत्रों तक पानी की दस्तक पहुंच रही है जिसे रोकने की कोशिशों में ग्रामीण जगह-जगह बंधे बना रहे हैं। नगला तिलक इलाके में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
ग्रामीण इलाकों में बुधवार को बाढ़ के पानी का जमाव होता रहा। जगह-जगह पानी भर जाने के कारण पशुओं के चरने के लिए भी स्थान नहीं मिला। गंगा के बढ़ते पानी से चिंतित ग्रामीणों ने ऊंचाई वाले स्थानों पर अपने पशुओं को बांधा है। कई स्थानों पर पशुओं के चारे की बुर्जियों तक बाढ़ के पानी की दस्तक हो गई है जिससे संग्रहित किया चारा भी खराब हो सकता है।
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बाढ़ के पानी से सर्वाधिक क्षति मक्का, मूंगफली, शिवाला, अरबी सहित अन्य फसलों को है। गन्ना की फसल को बाढ़ के पानी से कोई क्षति नहीं बताई जा रही। अभी कितने हेक्टेयर क्षेत्रफल में बाढ़ का पानी पहुंचा है, इसका आकलन राजस्व टीमें नहीं कर पायी हैं। नवाबगंज नगरिया के किसान बहोरन ने बताया कि उसकी 5 बीघा अरबी की फसल में बाढ़ का पानी पहुंच गया है जिससे फसल खराब हो गई है। मेहोला के रामस्वरूप ने बताया कि उनकी शिवाला की फसल बाढ़ के पानी से गल गई है।
सोमवार को पानी का डिस्चार्ज-
- हरिद्वार- 47288 क्यूसेक।
- बिजनौर- 52734 क्यूसेक।
- नरौरा- 214807 क्यूसेक।
- कछला ब्रिज- 163.70 मीटर के निशान पर।
बुधवार की सुबह कछला ब्रिज पर नदी का जलस्तर स्थिर रहा। नरौरा से भी करीब 10 हजार क्यूसेक पानी का कम डिस्चार्ज है। वहीं हरिद्वार और बिजनौर से पानी काफी कम हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही मीडियम फ्लड से निजात मिल जाएगी। अभी किसी गांव की आबादी बाढ़ के पानी से प्रभावित नहीं हुई है। गांव के बाहर और खेतों तक ही पानी पहुंचा है। - अरूण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई
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मीडियम फ्लड के लिए सर्वाधिक संवेदनशील माने जाने वाले गांव किलौनी, किसौल, बस्तौली, नगला दल, बरौना, महमूदपुर पुख्ता, समसपुर, बगवास, नगरिया दुलाई, नगला खंदारी, नैथरा, मेहोला, निबिया असदगढ़, नरदौली इलाके के खादर के खेतों में बाढ़ का पानी भर गया है। पूरा इलाका जलमग्न है। धीरे-धीरे आबादी क्षेत्रों तक पानी की दस्तक पहुंच रही है जिसे रोकने की कोशिशों में ग्रामीण जगह-जगह बंधे बना रहे हैं। नगला तिलक इलाके में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
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ग्रामीण इलाकों में बुधवार को बाढ़ के पानी का जमाव होता रहा। जगह-जगह पानी भर जाने के कारण पशुओं के चरने के लिए भी स्थान नहीं मिला। गंगा के बढ़ते पानी से चिंतित ग्रामीणों ने ऊंचाई वाले स्थानों पर अपने पशुओं को बांधा है। कई स्थानों पर पशुओं के चारे की बुर्जियों तक बाढ़ के पानी की दस्तक हो गई है जिससे संग्रहित किया चारा भी खराब हो सकता है।
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बाढ़ के पानी से सर्वाधिक क्षति मक्का, मूंगफली, शिवाला, अरबी सहित अन्य फसलों को है। गन्ना की फसल को बाढ़ के पानी से कोई क्षति नहीं बताई जा रही। अभी कितने हेक्टेयर क्षेत्रफल में बाढ़ का पानी पहुंचा है, इसका आकलन राजस्व टीमें नहीं कर पायी हैं। नवाबगंज नगरिया के किसान बहोरन ने बताया कि उसकी 5 बीघा अरबी की फसल में बाढ़ का पानी पहुंच गया है जिससे फसल खराब हो गई है। मेहोला के रामस्वरूप ने बताया कि उनकी शिवाला की फसल बाढ़ के पानी से गल गई है।
सोमवार को पानी का डिस्चार्ज-
- हरिद्वार- 47288 क्यूसेक।
- बिजनौर- 52734 क्यूसेक।
- नरौरा- 214807 क्यूसेक।
- कछला ब्रिज- 163.70 मीटर के निशान पर।
बुधवार की सुबह कछला ब्रिज पर नदी का जलस्तर स्थिर रहा। नरौरा से भी करीब 10 हजार क्यूसेक पानी का कम डिस्चार्ज है। वहीं हरिद्वार और बिजनौर से पानी काफी कम हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही मीडियम फ्लड से निजात मिल जाएगी। अभी किसी गांव की आबादी बाढ़ के पानी से प्रभावित नहीं हुई है। गांव के बाहर और खेतों तक ही पानी पहुंचा है। - अरूण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई

कासगंज में किसौल गांव में बाढ से डूबी मक्का की फसल ।- फोटो : KASGANJ

कासगंज में सुन्नगढी क्षेत्र में बाढ का पानी पहुंचने पर पुलिया को मिटटी से बंद करते ग्रामीण।- फोटो : KASGANJ