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बीएसए कार्यालय में आगः फर्जी शिक्षकों को बचाने का 'खेल' खोलेगी कमेटी
Thu, 10 Oct 2019 02:08 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 10 Oct 2019 02:08 PM IST
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बीएसए कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला
बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के जिस कमरे में मंगलवार रात आग लगी थी, उसमें शिक्षकों की जांच से संबंधित करीब 1500 फाइलें रखी गई थीं। इसमें शिक्षकों के मूल प्रमाणपत्र भी हैं।
बीएसए, पटल सहायक व अन्य कर्मचारी कार्यालय पहुंचे, पर कितनी फाइलों को नुकसान पहुंचा है, यह नहीं पता चल सका। फाइलों के सत्यापन के लिए बीएसए स्तर से कमेटी बनाई जानी है।
कमरे में एसआईटी की सूची के आधार पर चिह्नित किए गए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के बीएड वर्ष 2004-05 की फर्जी व टेंपर्ड की डिग्री लगाने वाले शिक्षकों की पत्रावलियां और वर्ष 2010 और उसके बाद के वर्षोँ में हुई शिक्षकों की भर्ती की जांच के लिए फाइलें और मूल प्रमाणपत्र रखे हुए थे।
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बीएसए, पटल सहायक व अन्य कर्मचारी कार्यालय पहुंचे, पर कितनी फाइलों को नुकसान पहुंचा है, यह नहीं पता चल सका। फाइलों के सत्यापन के लिए बीएसए स्तर से कमेटी बनाई जानी है।
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कमरे में एसआईटी की सूची के आधार पर चिह्नित किए गए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के बीएड वर्ष 2004-05 की फर्जी व टेंपर्ड की डिग्री लगाने वाले शिक्षकों की पत्रावलियां और वर्ष 2010 और उसके बाद के वर्षोँ में हुई शिक्षकों की भर्ती की जांच के लिए फाइलें और मूल प्रमाणपत्र रखे हुए थे।
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पटल सहायक रक्षपाल सिंह के मुताबिक वर्ष 2015 की शिक्षक भर्ती में जिले में नियुक्त हुए करीब 580 और वर्ष 2016 में नियुक्त हुए करीब 570 शिक्षकों की फाइलें इसी कमरे में थीं। कुछ और भी फाइलें थीं। पटल सहायक के मुताबिक रिकार्ड रजिस्टर भी जल गया है। इससे यह भी बता पाना है मुश्किल है कि कुल कितनी फाइलें थीं।
सीबीसीआईडी की जांच कराने की मांग करेगा यूटा
यूनाइटेड टीचर एसोसिएशन (यूटा) के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर का कहना है कि मामले की सीबीसीआईडी जांच कराने की मांग की जाएगी। प्रकरण संदिग्ध है। इसमें विभागीय लोगों की मिलीभगत है। इन्हीं की वजह से जांच लटकती जा रही है। अब तक फर्जी प्रमाणपत्र लगाने वालों पर कार्रवाई हो जानी चाहिए थी।
सीबीसीआईडी की जांच कराने की मांग करेगा यूटा
यूनाइटेड टीचर एसोसिएशन (यूटा) के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर का कहना है कि मामले की सीबीसीआईडी जांच कराने की मांग की जाएगी। प्रकरण संदिग्ध है। इसमें विभागीय लोगों की मिलीभगत है। इन्हीं की वजह से जांच लटकती जा रही है। अब तक फर्जी प्रमाणपत्र लगाने वालों पर कार्रवाई हो जानी चाहिए थी।