बीएड फर्जीवाड़ा: मथुरा में 32 शिक्षकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज, फर्जी डिग्री से नौकरी पाने का आरोप
मथुरा जिले में बीएड की फर्जी डिग्री पर प्राथमिक विद्यालयों में बने सहायक अध्यापकों के खिलाफ खंड शिक्षा अधिकारियों ने शुक्रवार को रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें वृंदावन के प्राथमिक विद्यालय मघेरा के सहायक अध्यापिका सहित जनपद भर में 32 नाम शामिल हैं।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के शैक्षिक सत्र 2004-05 के बीएड धारकों की एसआईटी जांच में बड़े स्तर पर फर्जी डिग्रियों का खुलासा कुछ साल पहले हुआ था। इसमें मथुरा जनपद के उन शिक्षकों के नाम भी शामिल थे, जिनकी बीएड डिग्री को एसआईटी ने फर्जी या फिर छेड़छाड़ वाली सूची में शामिल किया था।
विभागीय आदेश के बाद जनपद स्तर पर ऐसे शिक्षकों की पहचान करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सेवा समाप्ति की कार्रवाई की। इनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गईं। कुछ शिक्षक न्यायालय की शरण में भी गए। अब एक बार फिर विभागीय स्तर पर जनपद में 32 सहायक अध्यापकों के खिलाफ फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी में आने पर रिपोर्ट दर्ज कराई है।
वृंदावन कोतवाली में खंड शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार ने दर्ज कराई रिपोर्ट में प्राथमिक विद्यालय माघेरा की सहायक अध्यापिका प्रीति राठौर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस क्षेत्राधिकारी गौरव त्रिपाठी ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी है।
विश्वविद्यालय: 1021 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों को टेंपर्ड
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीएड सत्र 2004-05 के 1021 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों को टेंपर्ड (अंकों से छेड़छाड़) माना है। शुक्रवार को विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में जांच समिति की रिपोर्ट रखी गई, जिसे मंजूरी दे दी गई। विश्वविद्यालय का यह निर्णय हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया जाना है।
एसआईटी (विशेष जांच दल) की ओर से तैयार की गई टेंपर्ड प्रमाणपत्रों की सूची में 1084 अभ्यर्थियों के नाम शामिल थे। स्पेशल अपील की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 26 फरवरी 2021 को मामले की जांच के आदेश विश्वविद्यालय प्रशासन को दिए। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।
समिति की जांच रिपोर्ट को कार्य परिषद में रखा गया। समिति ने जांच में पाया कि एसआईटी की ओर से तैयार टेंपर्ड प्रमाणपत्र की 1084 अभ्यर्थियों की सूची में एक ही अभ्यर्थी का नाम 61 बार है। एक छोड़कर 60 जगह से नाम हटा दिए गए। बचे 1024 में से तीन अभ्यर्थियों के साक्ष्य सही पाए गए। इनके नामों को टेंपर्ड प्रमाणपत्रों की सूची से हटा दिया गया।