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योगिता हत्याकांड: साथी चिकित्सकों ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि, बोले- यकीन नहीं हो रहा
Fri, 21 Aug 2020 03:44 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 21 Aug 2020 03:44 PM IST
सार
- साथी डॉक्टरों का कहना था कि योगिता गौतम की कोई हत्या कर सकता है, इसका भरोसा ही नहीं हो रहा है।
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योगिता गौतम को दी गई श्रद्धांजलि
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की जूनियर डॉक्टर योगिता गौतम की हत्या पर चिकित्सा जगत में शोक की लहर है। एसएन मेडिकल कॉलेज जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने गुरुवार को पुस्तकालय के सामने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। उनके कई साथियों की आंखें भर आईं। साथी डॉक्टरों का कहना था कि उनकी कोई हत्या कर सकता है, इसका भरोसा ही नहीं हो रहा है।
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संवेदना प्रकट करने वालों में कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. एके आर्या, डॉ. सरोज सिंह, डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. प्रशांत लवानियां, डॉ. एसपी विश्नोई, डॉ. निधि गुप्ता, डॉ. रिचा सिंह, डॉ. भूपेंद्र चाहर, डॉ. जयदीप पटेल, डॉ. अमित कुमार, डॉ. जुनैद आलम, डॉ. सना इस्माइल, डॉ. अनुपम सिंह यादव, डॉ. जितेंद्र यादव, डॉ. आकाश शर्मा, डॉ. राहुल कुमार, डॉ. सुधीर सिंह, डॉ. मोहम्मद अदनान आदि रहे।
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जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सोहन स्वरूप ने कहा कि हमारे साथी और बेहतर सर्जन की बेरहमी से हत्या कर दी गई। बेहद ही मिलनसार थी, उनके हत्यारों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, तभी उनकी आत्मा को शांति मिलेगी।
उपाध्यक्ष डॉ. संदीप राय ने कहा कि साथी चिकित्सक की हत्या से सभी अचंभित और बेहद दुखी हैं। कोरोना वायरस जैसी महामारी में वह पूरी लगन से दिन-रात लगी हुईं थीं। उनकी आत्मा को शांति मिले।
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. भूपेंद्र चाहर ने कहा कि विकृत मानसिकता के चलते यह हत्या की गई है। किसी पर जोर-जबरदस्ती गलत है। आवेग में आने के बाद चिकित्सक की हत्या की गई, यह बेहद ही शर्मनाक और दुखद घटना है।
चिकित्सा जगत को बड़ी क्षति
चिकित्सकों ने नम आंखों से दी योगिता को श्रद्धांजलि
- फोटो : अमर उजाला
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च करने और लंबे समय की मेहनत के बाद समाज को एक चिकित्सक मिलता है, किसी ने आवेग में आकर उनकी हत्या कर समाज और चिकित्सा जगत को बड़ी क्षति पहुंचाई है।
स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह ने कहा कि डॉ. योगिता में सीखने और कार्य करने की लगन थी। उनको जो भी चिकित्सकीय कार्य करने दिया जाता, वह खुशी मन से उसे करती। इसके चलते वह हमारे विभाग में सभी की प्रिय थीं।
आईएमए आगरा के अध्यक्ष डॉ. आरएम पचौरी ने कहा कि डॉक्टर की हत्या से एक ही परिवार का नुकसान नहीं होता, उससे समाज को भी क्षति पहुंचती है। उनकी आत्मा को शांति तभी मिलेगी जब हत्यारे को कड़ी सजा मिले।
आईएमए आगरा के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. राजीव उपाध्याय ने कहा कि जानकर बेहद दुख और आश्चर्य भी हुआ। हत्या का आरोपी भी चिकित्सक है। ऐसे जिम्मेदार लोगों से यह कृत्य की उम्मीद नहीं थी। आवेग में कइयों को नुकसान हुआ है।
स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह ने कहा कि डॉ. योगिता में सीखने और कार्य करने की लगन थी। उनको जो भी चिकित्सकीय कार्य करने दिया जाता, वह खुशी मन से उसे करती। इसके चलते वह हमारे विभाग में सभी की प्रिय थीं।
आईएमए आगरा के अध्यक्ष डॉ. आरएम पचौरी ने कहा कि डॉक्टर की हत्या से एक ही परिवार का नुकसान नहीं होता, उससे समाज को भी क्षति पहुंचती है। उनकी आत्मा को शांति तभी मिलेगी जब हत्यारे को कड़ी सजा मिले।
आईएमए आगरा के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. राजीव उपाध्याय ने कहा कि जानकर बेहद दुख और आश्चर्य भी हुआ। हत्या का आरोपी भी चिकित्सक है। ऐसे जिम्मेदार लोगों से यह कृत्य की उम्मीद नहीं थी। आवेग में कइयों को नुकसान हुआ है।
गम में साथी चिकित्सक
डॉ. लोकश त्रिपाठी ने कहा कि वह हमारी सीनियर थी, हमनें उनके नेतृत्व में 30 से अधिक प्रसव कराए। वह स्टेप बाय स्टेप सिखाती थीं, गलती होने पर डपटते हुए समझाती थी। हमारी शिक्षक और बड़ी बहन नहीं रहीं, मन बेहद दुखी है।
डॉ. जैफ्रे कलाईसेलवन ने कहा कि वह मेरी बैचमेट थी, कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं के प्रसव कराने में हमारे साथ थीं। वह ड्यूटी के वक्त बेहद संजीदगी के साथ निभाती थीं। मरीजों की देखभाल करतीं, उनकी समस्या को तत्काल सुनतीं थीं।
डॉ. वंदना शर्मा ने कहा कि वह हमारी सीनियर थीं और बेहद ही अच्छी सर्जन थीं। पहली बार वह ही हमें ऑपरेशन में साथ लेकर गईं। उन्होंने केस से पहले तैयारियां, मरीज-नवजात की कैसे देखभाल को बारीकी से समझाया। उनकी मौत से निराश हूं।
डॉ. विकांशा कौशिक ने कहा कि डॉ. योगिता मैम बेहद सरल और शांत स्वभाव की थी। ऑपरेशन में उनकी कोई सानी नहीं थी। वह कभी सीनियर की तरह व्यवहार नहीं किया। छोटी बहन की तरह वह ऑपरेशन की बारीकियां समझाती थीं, उनकी हत्या से दुखी हूं।
डॉ. जैफ्रे कलाईसेलवन ने कहा कि वह मेरी बैचमेट थी, कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं के प्रसव कराने में हमारे साथ थीं। वह ड्यूटी के वक्त बेहद संजीदगी के साथ निभाती थीं। मरीजों की देखभाल करतीं, उनकी समस्या को तत्काल सुनतीं थीं।
डॉ. वंदना शर्मा ने कहा कि वह हमारी सीनियर थीं और बेहद ही अच्छी सर्जन थीं। पहली बार वह ही हमें ऑपरेशन में साथ लेकर गईं। उन्होंने केस से पहले तैयारियां, मरीज-नवजात की कैसे देखभाल को बारीकी से समझाया। उनकी मौत से निराश हूं।
डॉ. विकांशा कौशिक ने कहा कि डॉ. योगिता मैम बेहद सरल और शांत स्वभाव की थी। ऑपरेशन में उनकी कोई सानी नहीं थी। वह कभी सीनियर की तरह व्यवहार नहीं किया। छोटी बहन की तरह वह ऑपरेशन की बारीकियां समझाती थीं, उनकी हत्या से दुखी हूं।