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डीजल महंगा होने से खेती महंगी हुई
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मैनपुरी। डीजल-पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। डीजल पर हुई मूल्यवृद्धि ने वाहन स्वामियों के साथ-साथ किसानों की कमर तोड़ दी है। फसलों की सिंचाई, जुताई और ढुलाई महंगी हो गई है। आज भी जिले में बड़ी संख्या में किसान डीजल पंप पर ही सिंचाई के लिए निर्भर हैं। बीते वर्ष की तुलना में डीजल पंप से सिंचाई इस वर्ष करीब 70 रुपये प्रति घंटा महंगी हो गई है। किसानों का कहना है कि खेत से मंडी तक फसल को ले जाने की भी लागत बढ़ी। सरकार को डीजल की कीमतों पर नियंत्रण करना चाहिए।
प्रति घंटा तीन सौ रुपये बढ़ी जुताई
डीजल महंगा होने से खेतों की जुताई तीन सौ रुपये प्रति घंटा बढ़ी है। दिसंबर 2020 में कल्टीवेटर से 600 रुपये प्रति घंटा होने वाली जुताई के ट्रैक्टर मालिक अब 900 रुपया प्रति घंटा वसूल कर रहे हैं। रोटावेटर और हेरो से 900 रुपया प्रति घंटा की जगह किसानों से 1200 रुपया प्रति घंटा वसूल किए जा रहे हैं। इसी तरह सिंचाई की लागत भी अब अधिक हो गई है। 2020 में पंपसेट से सिंचाई के लिए 130 रुपये घंटा लगता था अब यह दो सौ रुपये घंटा तक पहुंच गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अफरातफरी का माहौल है। कुछ देशों ने आपूर्ति बंद कर दी है। इससे डीजल और पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
घनश्याम दास गुप्ता, पेट्रोल पंप मालिक
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अब खेती करना महंगा हो गया है। डीजल लगातार महंगा होता जा रहा है। इससे खेत की जुताई कराना भी अब आसान नहीं रह गया है। ट्रैक्टर मालिकों ने भी रेट बढ़ा दिए हैं।
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-देवेंद्र सिंह रठेरा
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सिंचाई का कोई और साधन नहीं होने से डीजल पंप सैट से सिंचाई करना मजबूरी है। इसके लिए प्रति घंटा 200 रुपये सिंचाई के देने पड़ रहे हैं। छह महीने में सिंचाई के 50 रुपये बढ़ गए हैं।
बलराम सिंह, नगरिया
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महंगाई की मार सबसे ज्यादा खेती पर पड़ी है। चाहे सिंचाई हो अथवा जुताई दोनों ही महंगी हो गई हैं। डीजल महंगा होने से किसान खेती करने में परेशानी का सामना करने को मजबूर है।
सिद्धसरन, सीतापुर
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ऐसे हुई डीजल पर मूल्यवृद्धि
माह भाव
जनवरी 74.38
फरवरी 76.97
मार्च 81.94
अप्रैल 81.35
मई 81.21
जून 85.97
जुलाई 89.79
17 जुलाई 90.86
नोट- डीजल के रेट प्रति लीटर में हैं।
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प्रति घंटा तीन सौ रुपये बढ़ी जुताई
डीजल महंगा होने से खेतों की जुताई तीन सौ रुपये प्रति घंटा बढ़ी है। दिसंबर 2020 में कल्टीवेटर से 600 रुपये प्रति घंटा होने वाली जुताई के ट्रैक्टर मालिक अब 900 रुपया प्रति घंटा वसूल कर रहे हैं। रोटावेटर और हेरो से 900 रुपया प्रति घंटा की जगह किसानों से 1200 रुपया प्रति घंटा वसूल किए जा रहे हैं। इसी तरह सिंचाई की लागत भी अब अधिक हो गई है। 2020 में पंपसेट से सिंचाई के लिए 130 रुपये घंटा लगता था अब यह दो सौ रुपये घंटा तक पहुंच गई है।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में अफरातफरी का माहौल है। कुछ देशों ने आपूर्ति बंद कर दी है। इससे डीजल और पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
घनश्याम दास गुप्ता, पेट्रोल पंप मालिक
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अब खेती करना महंगा हो गया है। डीजल लगातार महंगा होता जा रहा है। इससे खेत की जुताई कराना भी अब आसान नहीं रह गया है। ट्रैक्टर मालिकों ने भी रेट बढ़ा दिए हैं।
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-देवेंद्र सिंह रठेरा
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सिंचाई का कोई और साधन नहीं होने से डीजल पंप सैट से सिंचाई करना मजबूरी है। इसके लिए प्रति घंटा 200 रुपये सिंचाई के देने पड़ रहे हैं। छह महीने में सिंचाई के 50 रुपये बढ़ गए हैं।
बलराम सिंह, नगरिया
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महंगाई की मार सबसे ज्यादा खेती पर पड़ी है। चाहे सिंचाई हो अथवा जुताई दोनों ही महंगी हो गई हैं। डीजल महंगा होने से किसान खेती करने में परेशानी का सामना करने को मजबूर है।
सिद्धसरन, सीतापुर
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ऐसे हुई डीजल पर मूल्यवृद्धि
माह भाव
जनवरी 74.38
फरवरी 76.97
मार्च 81.94
अप्रैल 81.35
मई 81.21
जून 85.97
जुलाई 89.79
17 जुलाई 90.86
नोट- डीजल के रेट प्रति लीटर में हैं।