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Agra News: नाम में अंतर और अंश निर्धारण न होने से फंसी 6500 से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री
Wed, 29 Apr 2026 02:40 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Wed, 29 Apr 2026 02:40 AM IST
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आगरा। किसानों को डिजिटल पहचान दिलाने के लिए गांव-गांव शिविर लगाए जा रहे हैं। हर पंचायत में एक कार्मिक नामित कर जिम्मेदारी दी है। किसान भी उत्साहित है इसी का नतीजा है कि 23 दिन में 25 हजार से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हुई है, लेकिन आधार कार्ड और खतौनी में दर्ज नाम में अंतर और हिस्सेदार का अंश निर्धारण न होने से 6,500 से आधिक किसान फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे है। शिविरों में रोजाना ऐसे मामले सामने आ रहे हैं।
जिला प्रशासन ने शत प्रतिशत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बनाने के लिए चार विभागों को लगाया है। इसमें कृषि, राजस्व के लेखपाल, मनरेगा के रोजगार सेवक और पंचायती राज विभाग से पंचायत सहायक शामिल हैं। हर पंचायत में एक कार्मिक को हर रोज कम से पांच रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य दिया है। कृषि विभाग इसका नोडल है। पंचायतों में लग रहे शिविरों में किसानों के सामने दो समस्याएं ज्यादा आ रही हैं। पहली है खतौनी में दर्ज नाम में कुछ अक्षर, उपनाम आदि में अंतर और दूसरी खतौनी में राजस्व विभाग का समय से किसान का अंश निर्धारण न करना है।
तहसील खेरागढ़ के सायपुर गांव के किसान उदय सिंह ने बताया कि उनके आधार कार्ड और खतौनी नाम तो एक ही है, लेकिन आधार कार्ड में नाम के पीछे उपनाम है। इसी कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो सकी हैं। इस बात को लेखपाल से कहे कई दिन बीत गए, लेकिन उन्होंने अभी तक सही नहीं किया है।
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शमसाबाद के गांव बरौरा कला के प्रभु ने बताया कि कई बार कृषि विभाग के चक्कर लगा चुके हैंं, लेकिन फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई है। पंचायत सहायक के पास गए तो वह कहता है कि अंश निर्धारण होने के बाद हो जाएगी। उनका नाम लेखपाल के पास भेज दिया है। वहां से जितना जल्दी हो जाएगा उतनी ही जल्दी फार्मर रजिस्ट्री बन जाएगी।
दफ्तर में भी समस्याएं लेकर पहुंच रहे किसान
खतौनी में दर्ज नाम में गलती होना और अंश का स्पष्ट निर्धारण होने के काफी मामले शिविरों आ रहे हैं। ऐसी ही समस्या लेकर किसान कार्यालय भी आ जाते हैं। उनकी सूचना को लेखपालों के पास भेज दिया जा रहा है। जिससे कि खतौनी में गलत जानकारी सही हो जाए और फार्मर रजिस्ट्री हो सके। -मुकेश कुमार, कृषि उपनिदेशक
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जिला प्रशासन ने शत प्रतिशत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बनाने के लिए चार विभागों को लगाया है। इसमें कृषि, राजस्व के लेखपाल, मनरेगा के रोजगार सेवक और पंचायती राज विभाग से पंचायत सहायक शामिल हैं। हर पंचायत में एक कार्मिक को हर रोज कम से पांच रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य दिया है। कृषि विभाग इसका नोडल है। पंचायतों में लग रहे शिविरों में किसानों के सामने दो समस्याएं ज्यादा आ रही हैं। पहली है खतौनी में दर्ज नाम में कुछ अक्षर, उपनाम आदि में अंतर और दूसरी खतौनी में राजस्व विभाग का समय से किसान का अंश निर्धारण न करना है।
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तहसील खेरागढ़ के सायपुर गांव के किसान उदय सिंह ने बताया कि उनके आधार कार्ड और खतौनी नाम तो एक ही है, लेकिन आधार कार्ड में नाम के पीछे उपनाम है। इसी कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो सकी हैं। इस बात को लेखपाल से कहे कई दिन बीत गए, लेकिन उन्होंने अभी तक सही नहीं किया है।
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शमसाबाद के गांव बरौरा कला के प्रभु ने बताया कि कई बार कृषि विभाग के चक्कर लगा चुके हैंं, लेकिन फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई है। पंचायत सहायक के पास गए तो वह कहता है कि अंश निर्धारण होने के बाद हो जाएगी। उनका नाम लेखपाल के पास भेज दिया है। वहां से जितना जल्दी हो जाएगा उतनी ही जल्दी फार्मर रजिस्ट्री बन जाएगी।
दफ्तर में भी समस्याएं लेकर पहुंच रहे किसान
खतौनी में दर्ज नाम में गलती होना और अंश का स्पष्ट निर्धारण होने के काफी मामले शिविरों आ रहे हैं। ऐसी ही समस्या लेकर किसान कार्यालय भी आ जाते हैं। उनकी सूचना को लेखपालों के पास भेज दिया जा रहा है। जिससे कि खतौनी में गलत जानकारी सही हो जाए और फार्मर रजिस्ट्री हो सके। -मुकेश कुमार, कृषि उपनिदेशक