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फिर शर्मसार हुई मानवता, नहीं मिला वाहन तो रिक्शा पर ले जाना पड़ा शव

Sun, 11 Nov 2018 08:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Sun, 11 Nov 2018 08:24 PM IST
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family members carried dead body on the rickshaw in agra
रिक्शे पर लादकर शव ले जाते परिजन - फोटो : अमर उजाला
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर शर्मसार करने वाला मामला सामने आया। यहां मरीज की मौत के बाद शव के लिए वाहन नहीं मिला। अधिकारियों ने वाहन का ड्राइवर आने तक रुकने को कहा। घंटों इंतजार के बाद भी वाहन नहीं मिला तो तीमारदार शव को रिक्शा में ले जाने के लिए मजबूर हुए। 
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तमौलीपाड़ा स्थित इंद्रापुरम निवासी पप्पू (40) को टीबी था। सात नवंबर को उनको क्षय एवं वक्ष रोग विभाग में भर्ती कराया गया। रविवार की सुबह 11 बजे के करीब उन्होंने दम तोड़ दिया। पत्नी सीमा को भी टीबी है और वह भी इसी वार्ड में भर्ती है। 
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पत्नी-पति के अलावा उनका कोई और परिजन नहीं था। पत्नी ने पड़ोसी सुरेश चंद्र और प्रताप सिंह को फोन कर बुलाया। शव का अंतिम संस्कार करवाने की गुहार लगाई। प्रताप ने 108 एंबुलेंस पर फोन किया तो कहा गया कि यह सेवा शव ले जाने के लिए नहीं है। 
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गायब मिले वाहनों के ड्राइवर

एसएन के एसआईसी को फोन मिलाया तो वह बंद आ रहा था। इसके बाद सीएमओ को फोन मिलाया। प्रताप के अनुसार, सीएमओ ने बताया कि ड्राइवर नहीं है, अभी घंटा भर लग जाएगा। दोबारा फोन लगाया तो कहा कि अभी और इंतजार करो। 

काफी देर होने पर भी वाहन नहीं आया तो दोनों पड़ोसी रिक्शे में लादकर शव को ले गए। पड़ोसी सुरेश चंद्र ने बताया कि पप्पू के घर में पत्नी के सिवाय कोई नहीं है। वह भी रिक्शा चलाकर परिवार का पेट भरते हैं, निजी वाहन के लिए उनके पास भी पैसे नहीं थे। 

इस संबंध में सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने बताया कि फोन आया तो तीमारदार से कहा कि ड्राइवर को फोन कर दिया है, करीब घंटा भर लग जाएगा। लेकिन वह बहुत जल्दी में था। वाहन पहुंचने से पहले ही वह चला गया। 

एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा ने कहा कि शव वाहन उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा है। वैसे हमने अपने कॉलेज के लिए शव वाहन खरीदने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। 

शहर की सीमा तक निशुल्क वाहन की है सुविधा

स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर की सीमा तक शव को पहुंचाने की निशुल्क व्यवस्था की गई है। इसके लिए एसएन कॉलेज, जिला अस्पताल और लेडी लायल में शव वाहन की व्यवस्था की गई है। लेकिन ये शव वाहन जिला अस्पताल और सीएमओ ऑफिस में ही खड़े रहते हैं। इनके चालक भी गायब रहते हैं। 

ठेले पर लादकर लाई थी पति को
एंबुलेंस और शव वाहन न मिलने की यह कोई नई बात नहीं है। इससे पहले सात अगस्त को टेढ़ी बगिया निवासी रेखा अपने बीमार पति को दिखाने के लिए ठेले पर लेकर आई थी। साथ में आठ साल का बच्चा पैदल चला आ रहा था। रेखा ने करीब 15 किमी की दूरी ठेले पर पति को लेकर तय की थी। उसे भी एंबुलेंस सेवा का लाभ नहीं मिला था।  
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