{"_id":"5cfa70c5bdec2207843c1446","slug":"family-cremation-in-bihar-but-son-found-alive-in-kosi-kalan-ashram","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बेटे का 'अंतिम संस्कार' कर चुका था परिवार, 3 साल बाद मिली ऐसी खबर, आंखों से छलक आए खुशी के आंसू ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटे का 'अंतिम संस्कार' कर चुका था परिवार, 3 साल बाद मिली ऐसी खबर, आंखों से छलक आए खुशी के आंसू
Sat, 08 Jun 2019 09:20 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 08 Jun 2019 09:20 AM IST
विज्ञापन
कोसीकलां अपना घर आश्रम में बैठा राकेश दायें, साथ में पिता बुद्धन ठाकुर
- फोटो : अमर उजाला
जिस बेटे को तीन साल पहले मृत समझकर अंतिम संस्कार कर दिया गया, वही बेटा जब जिंदा सामने खड़ा देखा तो खुशी के चलते घरवालों की आंखें भर आईं और बेटे को सीने से लगा लिया। शुक्रवार को कोकिलावन धाम स्थित अपना घर आश्रम पर ये नजारा देखकर सभी की आंखें नम हो गईं।
चार दिन पहले अपना घर आश्रम की टीम के राजकुमार सैनी, दीपक व हिमांशु को राजमार्ग पर एक युवक मिला। जिसकी हालत खराब थी। उसे अपना घर आश्रम कोकिलावन ले आए। जहां उसका उपचार शुरू कर दिया गया।
युवक जब ठीक हुआ तो उसने अपना नाम राकेश पुत्र बुद्धन ठाकुर गांव कुमरिया, थाना मीनापुर जनपद मुजफ्फरपुर बिहार बताया। अपना घर के पदाधिकारियों ने संबंधित थाने में फोन कर घरवालों को सूचित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
चार दिन पहले अपना घर आश्रम की टीम के राजकुमार सैनी, दीपक व हिमांशु को राजमार्ग पर एक युवक मिला। जिसकी हालत खराब थी। उसे अपना घर आश्रम कोकिलावन ले आए। जहां उसका उपचार शुरू कर दिया गया।
विज्ञापन
युवक जब ठीक हुआ तो उसने अपना नाम राकेश पुत्र बुद्धन ठाकुर गांव कुमरिया, थाना मीनापुर जनपद मुजफ्फरपुर बिहार बताया। अपना घर के पदाधिकारियों ने संबंधित थाने में फोन कर घरवालों को सूचित किया।
विज्ञापन
Trending Videos
पता चला कि राकेश तो तीन साल पहले ट्रेन दुर्घटना में मर चुका है। जिसका अंतिम संस्कार भी परिजन कर चुके हैं। लेकिन जब उसकी तस्वीरें भेजीं तो घरवाले हैरान रह गए। उसे लेने के लिए शुक्रवार को पिता बुद्धन ठाकुर अन्य परिजनों के साथ आश्रम पहुंचे।
बुद्धन ने बताया कि मार्च 2016 में राकेश काम के लिए दिल्ली गया था। एक सप्ताह बाद भी जब वह घर नहीं पहुंचा और न ही उसका फोन आया तो घरवाले दिल्ली गए। जहां पता चला कि एक युवक ट्रेन की चपेट में आकर मरा है।
10 मार्च 2016 को दिल्ली स्थित मोर्चरी में जब शव की पहचान की गई तो घरवालों ने शव की पहचान राकेश के रूप में की। राकेश का भी एक हाथ नहीं है। शव का भी एक हाथ नहीं था। शव बुरी तरह कुचला हुआ था। इसलिए पहचान में नहीं आ रहा था।
बुद्धन ने बताया कि मार्च 2016 में राकेश काम के लिए दिल्ली गया था। एक सप्ताह बाद भी जब वह घर नहीं पहुंचा और न ही उसका फोन आया तो घरवाले दिल्ली गए। जहां पता चला कि एक युवक ट्रेन की चपेट में आकर मरा है।
10 मार्च 2016 को दिल्ली स्थित मोर्चरी में जब शव की पहचान की गई तो घरवालों ने शव की पहचान राकेश के रूप में की। राकेश का भी एक हाथ नहीं है। शव का भी एक हाथ नहीं था। शव बुरी तरह कुचला हुआ था। इसलिए पहचान में नहीं आ रहा था।
घरवाले राकेश का ही शव मानकर उसे गांव ले आए, जहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया और मृत्यु प्रमाणपत्र भी बनवा लिया। घरवालों ने बताया कि राकेश मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण इधर उधर भटक रहा था। तीन साल बाद जब वह मिला तो घरवालों की खुशी का ठिकाना नहीं है।