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मां का आंचल या दादी की गोद: दुर्लभ बीमारी से जूझ रहा मासूम किसके पास रहेगा, जानें कोर्ट ने किसे दी सुपुर्दगी
Tue, 25 Aug 2026 08:25 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 25 Aug 2026 08:25 AM IST
सार
आगरा परिवार न्यायालय ने दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बच्चे की सुपुर्दगी उसकी मां के बजाय दादी को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने बच्चे की विशेष देखभाल की जरूरत और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया।
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मासूम (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : FreePik
विस्तार
आगरा के परिवार न्यायालय ने बच्चे की सुपुर्दगी मां के बजाय उसकी दादी को सौंप दी। बच्चा एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है, जिसे विशेष देखभाल की जरूरत है। बच्चे की मां ने वर्ष 2021 में पुत्र की सुपुर्दगी के लिए अपने सास के खिलाफ वाद दायर किया था।
अदालत ने बच्चे की दादी को आदेश दिया कि वह महीने में एक बार किसी सार्वजनिक स्थान पर बच्चे को उसकी मां से मिलवा दिया करें। बच्चे की मां ने अदालत में बताया कि 2017 में उनकी शादी हुई और 2020 में पुत्र पैदा हुआ। उसी वर्ष पति की मृत्यु हो जाने पर सास ने उन्हें मायके भेज दिया। बच्चा सास के पास ही रह गया था।
सास पर कई आरोप लगाकर पुत्र की सुपुर्दगी मांगी गई थी। उधर, बच्चे की दादी ने अदालत में कहा कि मां बच्चे को पसंद नहीं करती और घर में क्लेश करती थी। उनका पौत्र दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है और केवल तरल पदार्थों पर जीवित है। बीमार बच्चे की देखभाल करने से मां ने पति की मृत्यु के बाद खुद मना कर दिया था।
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भरण-पोषण के लिए 4 लाख 50 हजार रुपये प्राप्त किए थे। इसके अतिरिक्त, उसने अपने पति के बीमा के 12 लाख 50 हजार रुपये भी लिए थे। हालांकि पति ने अपनी वसीयत में बच्चे की दादी को बच्चे का संरक्षक घोषित किया था। अदालत ने इन तर्कों पर विचार कर दादी के पक्ष में आदेश किए।
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अदालत ने बच्चे की दादी को आदेश दिया कि वह महीने में एक बार किसी सार्वजनिक स्थान पर बच्चे को उसकी मां से मिलवा दिया करें। बच्चे की मां ने अदालत में बताया कि 2017 में उनकी शादी हुई और 2020 में पुत्र पैदा हुआ। उसी वर्ष पति की मृत्यु हो जाने पर सास ने उन्हें मायके भेज दिया। बच्चा सास के पास ही रह गया था।
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सास पर कई आरोप लगाकर पुत्र की सुपुर्दगी मांगी गई थी। उधर, बच्चे की दादी ने अदालत में कहा कि मां बच्चे को पसंद नहीं करती और घर में क्लेश करती थी। उनका पौत्र दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है और केवल तरल पदार्थों पर जीवित है। बीमार बच्चे की देखभाल करने से मां ने पति की मृत्यु के बाद खुद मना कर दिया था।
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भरण-पोषण के लिए 4 लाख 50 हजार रुपये प्राप्त किए थे। इसके अतिरिक्त, उसने अपने पति के बीमा के 12 लाख 50 हजार रुपये भी लिए थे। हालांकि पति ने अपनी वसीयत में बच्चे की दादी को बच्चे का संरक्षक घोषित किया था। अदालत ने इन तर्कों पर विचार कर दादी के पक्ष में आदेश किए।