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अंबेडकर विविः 2004 में मर चुके अधिकारी के भी दस्तखत

Wed, 04 Nov 2015 02:10 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा Updated Wed, 04 Nov 2015 02:10 AM IST
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fake signature of dead officer
शातिरों ने जाली मार्कशीट को असली जैसा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सभी मार्कशीट और डिग्री भले ही नकली हो, लेकिन उस पर डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय का लगा लोगो असली जैसा है। असली मार्कशीट का रंग और प्रारूप को ध्यान में रख नकली मार्कशीट तैयार की गई है। इसकी बनावट काफी हद तक वास्तविक मार्कशीट से मिलती-जुलती है। कई में हस्ताक्षरयुक्त मुहर असली प्रतीत हो रही है।
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जानकार ही इन दोनों के अंतर को जान सकते हैं। फिर भी शातिरों की चूक पकड़ में आई। मार्कशीट-डिग्रियों पर उन अधिकारियों के भी हस्ताक्षर हैं, जिनकी मौत हो चुकी है। 2013 की मार्कशीट में उप कुलसचिव के हस्ताक्षर हैं, जिनका 2004 में देहांत हो चुका है। इंजीनियरिंग की फर्जी मार्कशीट और डिग्रियाें का मामला सामने आने पर डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, आनन फानन में कुलपति ने अपने निवास पर अधिकारियों की बैठक बुलाकर जांच की रूपरेखा तैयार की है।
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रोल नंबर, नामांकन गलत
मार्कशीट और डिग्री में अंकित रोल नंबर और नामांकन संख्या गलत है। संबंधित सत्र के आधार पर तय होने वाले क्रमांक संख्या भी सही नहीं है। जैसे कि 2010 सत्र का रोल नंबर 10 से शुरू होगा, ऐसे ही 2011 का 11 से।
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हिंदी और अंग्रेजी में डिग्री
डिग्री हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में है। बता दें कि विश्वविद्यालय ने 2013 में डिग्री हिंदी में छापना शुरू किया था। इससे पहले की डिग्री अंग्रेजी भाषा में ही छापी जाती रही हैं।

अब तो असली डिग्री पर यकीन मुश्किल
आगरा। डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय में जाली मार्कशीट का गोरखधंधा इतने बड़े पैमाने पर हुआ है कि अब तो कोई इस विवि की असली डिग्री पर भी आसानी से यकीन नहीं करेगा। सबसे पहले पता चला कि 2005 में बीएड में जाली मार्कशीट बनाई गई। जांच शुरू हुई तो 2009 तक की लगभग 25,000 जाली मार्कशीट मिल गई। इससे लगभग 4.5 हजार तो सहायक अध्यापक बन गए हैं। लगभग इतने ही प्राइवेट नौैकरी हासिल कर ली। इन पर कार्रवाई ठीक से हो भी न पाई थी कि 2013 तक का रिकार्ड गायब हो गया। छोटे कर्मचारियों से लेकर बड़े अधिकारी तक  जालसाजी में शामिल हैं।
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