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UP: अमरूद, नींबू, आंवला और बेल जैसे फलदार पौधों के लिए उपयुक्त समय, मानसून से पहले ऐसे करें बागवानी की तैयारी
Mon, 01 Jun 2026 09:47 AM IST
Dhirendra Singh
देवेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
देवेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 01 Jun 2026 09:47 AM IST
सार
कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के विशेषज्ञों ने किसानों को मानसून से पहले फलदार बागों के लिए गड्ढे तैयार करने की सलाह दी है। वैज्ञानिक तरीके से पौधारोपण करने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और किसानों की आय बढ़ने की संभावना रहती है।
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आम के पेड़। संवाद
विस्तार
मानसून से पहले का वर्तमान समय नए फलदार बाग लगाने की तैयारी के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के उद्यान विशेषज्ञ अनुपम दुबे ने किसानों को सलाह दी है कि वे अभी से फलदार पौधों के लिए गड्ढे तैयार करना शुरू कर दें, ताकि बारिश शुरू होते ही पौधारोपण आसानी से किया जा सके।
अनुपम दुबे ने बताया कि अमरूद, नींबू, आंवला और बेल जैसे फलदार पौधों के लिए खेत में 1×1×1 मीटर आकार के गड्ढे खोदकर करीब 20 दिन तक धूप में खुला छोड़ देना चाहिए। इससे मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीट व रोगाणुओं की संभावना कम होती है और पौधों की जड़ों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनता है। उद्यान विशेषज्ञ के अनुसार, गड्ढों में सड़ी गोबर खाद, नीमखली और जैविक खाद मिलाकर भरने से पौधों को शुरुआती पोषण बेहतर मिलता है।
उन्होंने कहा कि दोमट एवं अच्छी जल निकासी वाली भूमि फलदार बागों के लिए सबसे उपयुक्त रहती है, इसलिए पौधारोपण से पहले मिट्टी की जांच अवश्य करानी चाहिए। दुबे ने किसानों को जुलाई-अगस्त में मानसून की शुरुआती बारिश के साथ पौधारोपण करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि तेज धूप में पौधे लगाने से बचें और सुबह या शाम के समय ही पौधारोपण करें।
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पौधे लगाने के बाद हल्की सिंचाई और मल्चिंग करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है तथा पौधों पर गर्मी का असर कम पड़ता है। साथ ही, उन्होंने बताया कि प्रमाणित नर्सरी से ही रोगमुक्त एवं उन्नत किस्मों के पौधे खरीदने चाहिए। वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए गए फलदार बाग भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर माध्यम बन सकते हैं।
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अनुपम दुबे ने बताया कि अमरूद, नींबू, आंवला और बेल जैसे फलदार पौधों के लिए खेत में 1×1×1 मीटर आकार के गड्ढे खोदकर करीब 20 दिन तक धूप में खुला छोड़ देना चाहिए। इससे मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीट व रोगाणुओं की संभावना कम होती है और पौधों की जड़ों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनता है। उद्यान विशेषज्ञ के अनुसार, गड्ढों में सड़ी गोबर खाद, नीमखली और जैविक खाद मिलाकर भरने से पौधों को शुरुआती पोषण बेहतर मिलता है।
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उन्होंने कहा कि दोमट एवं अच्छी जल निकासी वाली भूमि फलदार बागों के लिए सबसे उपयुक्त रहती है, इसलिए पौधारोपण से पहले मिट्टी की जांच अवश्य करानी चाहिए। दुबे ने किसानों को जुलाई-अगस्त में मानसून की शुरुआती बारिश के साथ पौधारोपण करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि तेज धूप में पौधे लगाने से बचें और सुबह या शाम के समय ही पौधारोपण करें।
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पौधे लगाने के बाद हल्की सिंचाई और मल्चिंग करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है तथा पौधों पर गर्मी का असर कम पड़ता है। साथ ही, उन्होंने बताया कि प्रमाणित नर्सरी से ही रोगमुक्त एवं उन्नत किस्मों के पौधे खरीदने चाहिए। वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए गए फलदार बाग भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर माध्यम बन सकते हैं।