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दुश्मनों से हार न मानने वाले पूर्व सैनिक सिस्टम का ये सितम झेलने को मजबूर
न्यूज डेस्क अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 13 Jan 2018 10:06 AM IST
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लैंड
- फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के कासगंज में सेवानिवृत्त सैनिक सरकार से मिली जमीन को अपने नाम कराने के लिए 40 साल से परेशान है। समाधान दिवस में भी उसकी समस्या का निदान नहीं हो पाया। चक्कर काट-काटकर परेशान सेवानिवृत्त सैनिक ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु मांगी है।
पूर्व सैनिक 80 वर्षीय किशन लाल सागर निवासी वाहिदपुर खालसा का कहना है कि उनके नाम वर्ष 1971 में शासन ने 45 बीघा जमीन का पट्टा किया था। शासन से मिली जमीन के खेत संख्या 338 का पट्टा तत्कालीन प्रधान ने निरस्त कर दिया।
इस मामले को वे बोर्ड में ले गए। रेवेन्यू से 1975 में इसे बहाल कर दिया गया। इसके बाद भी आज तक इसका नामांतर नहीं किया गया। इस जमीन से अन्य को पट्टे कर दिए। खेत संख्या 71 पर वर्ष 2004 में तत्कालीन प्रधान ने कब्जा कर लिया।
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पूर्व सैनिक 80 वर्षीय किशन लाल सागर निवासी वाहिदपुर खालसा का कहना है कि उनके नाम वर्ष 1971 में शासन ने 45 बीघा जमीन का पट्टा किया था। शासन से मिली जमीन के खेत संख्या 338 का पट्टा तत्कालीन प्रधान ने निरस्त कर दिया।
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इस मामले को वे बोर्ड में ले गए। रेवेन्यू से 1975 में इसे बहाल कर दिया गया। इसके बाद भी आज तक इसका नामांतर नहीं किया गया। इस जमीन से अन्य को पट्टे कर दिए। खेत संख्या 71 पर वर्ष 2004 में तत्कालीन प्रधान ने कब्जा कर लिया।
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यहां भी की शिकायत
इसकी शिकायत 29 जून 2017 को शासन के पोर्टल पर की गई, लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं हो सका है। वह अपनी शिकायत कई बार समाधान दिवस में भी कर चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
जिलाधिकारी भी 20 सितंबर 17 तक समस्या का समाधान करने के आदेश कर चुके हैं, इस आदेश का भी पालन नहीं हुआ। वे अधिकारियों के चक्कर काटते थक चुके हैं। जिसके चलते राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु मांगी है।
जिलाधिकारी भी 20 सितंबर 17 तक समस्या का समाधान करने के आदेश कर चुके हैं, इस आदेश का भी पालन नहीं हुआ। वे अधिकारियों के चक्कर काटते थक चुके हैं। जिसके चलते राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु मांगी है।