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Agra News: फेंफड़ों में कैंसर से हर साल हो जाती है 30 से 40 लोगों की मौत
Thu, 01 Aug 2024 02:09 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Thu, 01 Aug 2024 02:09 AM IST
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मैनपुरी। फेफड़ों का कैंसर एक तेजी से बढ़ती गंभीर समस्या है। इसके कारण हर साल जिले में 30 से 40 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ जाती है। फेफड़े के कैंसर के बारे में लोगों को जागरूक करने और इससे बचाव के बारे में सतर्क करने के लिए हर साल 1 अगस्त को वर्ल्ड लंग कैंसर डे मनाया जाता है। फेंफड़ों में कैंसर की बजह धूम्रपान और प्रदूषण माना गया है। इसलिए इन चीजों से बचकर रहना होगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कई कारक आपमें फेफड़ों के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। अपने जोखिम कारकों को समझते हुए सभी लोगों को इससे बचाव के उपाय करते रहना चाहिए। धूम्रपान के अलावा रसायनों के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों में भी इसका खतरा हो सकता है। जिन लोगों के परिवार में किसी को पहले से ही इस तरह की समस्या रह चुकी हो, ऐसे लोगों में भी फेफड़े के कैंसर के विकसित होने का जोखिम हो सकता है।
सीएमओ डॉ. आरसी गुप्ता बताते हैं कि फेफड़ों का कैंसर एक घातक बीमारी है। जिले में हर साल 30 से 40 लोगों की फेफड़ों के कैंसर के कारण मौत हो जाती है। ऐसे में सभी लोगों को इसके खतरे को समझते हुए बचाव के उपाय करते रहने चाहिए। हालांकि ज्यादातर मामलों में जब तक स्थिति गंभीर नहीं हो जाती तब तक इसके लक्षण समझ नहीं आते हैं। फिर भी इस बीमारी से बचने के लिए लोगों को हमेशा अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। फेफड़ों के कैंसर के कुछ शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देकर इस गंभीर और जानलेवा समस्या से बचाव किया जा सकता है।
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फेफड़ों के कैंसर के क्या कारण
मेडिकल रिपोर्ट्स की मानें तो ज्यादातर फेफड़ों के कैंसर के लिए धूम्रपान को प्रमुख कारण माना जाता है। धूम्रपान करने वालों और सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आने वाले लोगों में भी इसका खतरा अधिक होता है। डॉक्टरों का मानना है कि धूम्रपान, फेफड़ों को लाइन करने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर का कारण बनता है। जब आप सिगरेट के धुएं को अंदर लेते हैं तो इसके कारण फेफड़े के ऊतकों में परिवर्तन होना शुरू हो जाता है। सिगरेट के धुंए में कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ (कार्सिनोजेन्स) पाए जाते हैं।
शुरुआती लक्षणों को न करें अनदेखा
- लगातार बनी रहने वाली खांसी की समस्या।
- खांसी के साथ खून आना।
- सांस लेने में कठिनाई
- छाती में दर्द
- अक्सर आवाज बैठना
- वजन कम होते जाना
- हड्डी और सिरदर्द की समस्या बने रहना
बचाव के उपाय
- धूम्रपान तुरंत बंद कर दें
- रसायनों की फैक्ट्री में काम करते हैं तो मास्क और बचाव के सभी उपकरणों का निरंतर प्रयोग करें
- इनडोर प्रदूषण से बचाव करना भी बहुत आवश्यक है
- स्वस्थ और पौष्टिक भोजन के साथ सांस वाले अभ्यास रोजाना करते रहें।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कई कारक आपमें फेफड़ों के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। अपने जोखिम कारकों को समझते हुए सभी लोगों को इससे बचाव के उपाय करते रहना चाहिए। धूम्रपान के अलावा रसायनों के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों में भी इसका खतरा हो सकता है। जिन लोगों के परिवार में किसी को पहले से ही इस तरह की समस्या रह चुकी हो, ऐसे लोगों में भी फेफड़े के कैंसर के विकसित होने का जोखिम हो सकता है।
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सीएमओ डॉ. आरसी गुप्ता बताते हैं कि फेफड़ों का कैंसर एक घातक बीमारी है। जिले में हर साल 30 से 40 लोगों की फेफड़ों के कैंसर के कारण मौत हो जाती है। ऐसे में सभी लोगों को इसके खतरे को समझते हुए बचाव के उपाय करते रहने चाहिए। हालांकि ज्यादातर मामलों में जब तक स्थिति गंभीर नहीं हो जाती तब तक इसके लक्षण समझ नहीं आते हैं। फिर भी इस बीमारी से बचने के लिए लोगों को हमेशा अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। फेफड़ों के कैंसर के कुछ शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देकर इस गंभीर और जानलेवा समस्या से बचाव किया जा सकता है।
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फेफड़ों के कैंसर के क्या कारण
मेडिकल रिपोर्ट्स की मानें तो ज्यादातर फेफड़ों के कैंसर के लिए धूम्रपान को प्रमुख कारण माना जाता है। धूम्रपान करने वालों और सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आने वाले लोगों में भी इसका खतरा अधिक होता है। डॉक्टरों का मानना है कि धूम्रपान, फेफड़ों को लाइन करने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर का कारण बनता है। जब आप सिगरेट के धुएं को अंदर लेते हैं तो इसके कारण फेफड़े के ऊतकों में परिवर्तन होना शुरू हो जाता है। सिगरेट के धुंए में कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ (कार्सिनोजेन्स) पाए जाते हैं।
शुरुआती लक्षणों को न करें अनदेखा
- लगातार बनी रहने वाली खांसी की समस्या।
- खांसी के साथ खून आना।
- सांस लेने में कठिनाई
- छाती में दर्द
- अक्सर आवाज बैठना
- वजन कम होते जाना
- हड्डी और सिरदर्द की समस्या बने रहना
बचाव के उपाय
- धूम्रपान तुरंत बंद कर दें
- रसायनों की फैक्ट्री में काम करते हैं तो मास्क और बचाव के सभी उपकरणों का निरंतर प्रयोग करें
- इनडोर प्रदूषण से बचाव करना भी बहुत आवश्यक है
- स्वस्थ और पौष्टिक भोजन के साथ सांस वाले अभ्यास रोजाना करते रहें।