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एटा में बुखार का कहर: एक दिन में बालिका सहित 10 की मौत, अस्पतालों में बेडों की कमी, बेंचों पर इलाज

Sun, 17 Oct 2021 10:55 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 17 Oct 2021 10:55 PM IST
सार

एटा जिले में बुखार से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। यहां बीते 24 घंटे में बुखार से बालिका सहित 10 लोगों की मौत हो गई। इनमें से तीन का उपचार आगरा के निजी अस्पतालों में चल रहा था। स्थिति यह है कि जिले के अस्पतालों में मरीजों की भीड़ है। 

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etah viral fever news: ten people died due to fever in etah
एटा: बेंच पर लेटा मरीज, पास में बैठा तीमारदार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एटा जिले में बुखार से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। रविवार को बुखार से बालिका सहित 10 मरीजों की मौत हो गई। जलेसर क्षेत्र के गांव लोहचा नाहरपुर निवासी खुर्शीद अली के 11 वर्षीय पुत्र रसूल खां को शनिवार को बुखार आया। रविवार दोपहर उसकी मौत हो गई। 

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जलेसर के ही गांव गढ़ी सलूकापुर निवासी विपिन पुत्र मुकेश कुमार, नाहरपुर निवासी 50 वर्षीय शकुंतला, जलेसर कस्बा के मोहल्ला शेरगंज निवासी हंसमुख की 14 वर्षीय पुत्री आफमीन ने दम तोड़ दिया। ये सभी बुखार से पीड़ित थे। 
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मारहरा के मोहल्ला कायस्थान निवासी अखिलेश की 15 वर्षीय पुत्री शीतल, मोहल्ले के ही नौबतराम की 13 वर्षीय पुत्री तारादेवी, जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में रविवार दोपहर के समय आयुष (7) पुत्री शिवशंकर निवासी भोगांव जिला मैनपुरी और राममूर्ति (45) पत्नी बिजेंद्र निवासी गांव करतला ब्लॉक शीतलपुर की बुखार से मौत हो गई। 
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जलेसर क्षेत्र के गांव गनेशपुर निवासी ओमप्रकाश (20) पुत्र राजवीर के परिजनों ने बताया कि ओमप्रकाश को डेंगू था। शनिवार शाम को इलाज के लिए आगरा ले जाते समय मौत हो गई। इसी मोहल्ले के सुरेश (40) की मौत आगरा में उपचार के दौरान हो गई। 

निजी चिकित्सकों के यहां बढ़ रही भीड़
शहर से देहात तक बुखार का प्रकोप फैला हुआ है। रविवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी बंद रहने से निजी चिकित्सकों के यहां और ज्यादा भीड़ नजर आई। स्थिति यह रही कि बेड न होने पर मरीजों को ब्रेंच पर लिटाकर ड्रिप चढ़ाई गई। 

झोलाछापों की कट रही चांदी
इन दिनों झोलाछापों की चांदी कट रही है। गांव-गांव बीमारी फैली हुई है। गांवों में डिग्रीधारी चिकित्सक नहीं हैं। सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं किसी से छिपी नहीं हैं। ऐसे में लोग झोलाछापों के पास पहुंच रहे हैं। कहीं खुले आसमान में तो कहीं पेड़ों के नीचे मरीजों को खटिया और ब्रेचों पर लिटाकर ड्रिप चढ़ाई जा रही हैं। 

प्रतिबंधित दवा का हो रहा प्रयोग 
बीते दिनों सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने बिल्सड़ गांव का दौरा किया था। उन्होंने बुखार पीड़ितों के पर्चे देखे तो वहां एक प्रतिबंधित दवा पर्चे पर लिखी मिली। सीएमओ ने ग्रामीणों को बताया यह दवा नहीं खानी चाहिए। इस दौरान झोलाछाप वहां दुकानें बंद कर भाग गए। 

सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने बताया कि जिस गांव से बुखार की सूचना आती है। वहां टीम भेजकर कैंप कराया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज सहित सभी सीएचसी पर मरीजों को भर्ती करने की पूरी व्यवस्थाएं है। लोगों से अपील है कि झोलाछाप के यहां उपचार न कराएं। सरकारी अस्पतालों से जांच कराकर दवा लें।

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