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हवा में उछला डीसीएम और पलटकर नाले में जा गिरा
हवा में उछला डीसीएम और पलटकर नाले में जा गिरा
Updated Sat, 06 May 2017 12:42 AM IST
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हवा में उछला डीसीएम और पलटकर नाले में जा गिरा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हम सब डीसीएम में पीछे खड़े थे। सबको नींद की झपकी आ रही थी। रात के तीन जो बच चुके थे लेकिन कोई सोता कैसे, बार-बार झटके जो लग रहे थे, क्योंकि सड़क खराब थी। ड्राइवर ने गाड़ी को तूफान बना रखा था। बहुत तेज रफ्तार थी। तभी और खराब सड़क आ गई। पूरा डीसीएम जोर से हिलने लगा। डर के मारे सबने एक दूसरे को पकड़ लिया। तभी अचानक जोर से टक्कर सी लगी। डीसीएम हवा में उछला और नाले में जा गिरा। उसके पहिये आसमान की ओर हो गए। एक पल में कयामत आ गई। दो लोग बाहर जाकर गिरे, कुछ नाले में दूर जाकर पड़े, ज्यादातर डीसीएम के नीचे दब गए। यह बताते बताते सुरेंद्र की आंखों में आंसू आ जाते हैं, जुबां लड़खड़ाने लगती हैं। वह भी दर्दनाक हादसे में घायल हुए हैं। कहते हैं, बहुत बुरा हुआ, इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता। सुरेंद्र पावसर नगरिया के हैं। इसी गांव के 12 लोग मरे हैं। सुरेंद्र ने बताया, ड्राइवर ने बड़ी गलती की। वह गुस्से में था। शराब पी रखी थी। पहले तो रात में जाने के लिए मना कर रहा था। बाद में चल दिया। सौ से ऊपर की स्पीड पर डीसीएम चला रहा था । सराय नीम की जिस पुलिया पर हादसा हुआ, वह खूनी पुलिया बन चुकी है। वहां मोड़ है, बहुत ही खतरनाक। रेलिंग बहुत कमजोर लगी थी साइड में ।
बच्चे चीख रहे , लाशें निकालो, लाशें निकालो
हादसे में बच्चे भी घायल हुए हैं। उनकी हालत ज्यादा खराब है। शरीर ही नहीं, मन भी जख्मी हुआ है। गुमसुम रहते हैं। पूछने पर भी नहीं बोलते। फिर अचानक ही जोर से कहने लगते हैं, लाशें निकालो, लाशें निकालो । इनमें से दो बच्चों ने तो न अन्न का एक दाना खाया है। और न एक बूंद पानी पिया है। इनकी हालत बहुत खराब है। रोते हैं तो रोते ही चले जाते हैं। चुप होते हैं, तो चुप ही बैठ जाते हैं। किसी से बोल नहीं रहे। इन्हें शायद हादसे का सीन बार बार याद आ रहा है। उससे खुद को अलग नहीं कर पा रहे। उसे याद कर रहे हैं। क्रेन आ जाने के बाद यही शोर मचा था, लाशें निकालो, लाशें निकालो। बच्चे इसे दोहरा रहे हैं।
40 मिनट में पुलिस आई, तीन घंटे में क्रेन मंगाई
पावसर नगलिया के भगवान सिंह भी हादसे में घायल हैं। उनका कहना है कि अगर पुलिस फुर्ती दिखाती तो कम से कम सात लोगों की जान बच जाती। एक तो पुलिस सूचना के 40 मिनट में आई। दूसरा, आकर खड़ी हो गई। पुलिस वाले तमाशबीन बने रहे। नाले में कीचड़ थी, दलदल सा बना था। लोग इसमें फंसे थे। ज्यादातर डीसीएम के नीचे दबे थे। देर रात का वक्त था। सड़क सुनसान थी। पुलिस इस उम्मीद में रही कि लोग आएंगे और मदद करेंगे। यूपी - 100 की पुलिस पहुंची थी। उसने थाना पुलिस को फोन किया। रात में प्रशासन के अधिकारी भी नहीं आए। पुलिस ने अपनी तरफ से क्रेन का बंदोबस्त नहीं किया। लड़की पक्ष के रिश्तेदार आए। वे क्रेन लेकर आए। तब जाकर डीसीएम को नाले से बाहर निकाला जा सका। तीन घंटे का वक्त लग गया। इस दौरान घायलों की हालत और बिगड़ गई। सात को अस्पताल में मृत घोषित किया गया। अगर क्रेन जल्दी आ गई होती, तो शायद उनकी जान बच जाती।
बच्चे चीख रहे , लाशें निकालो, लाशें निकालो
हादसे में बच्चे भी घायल हुए हैं। उनकी हालत ज्यादा खराब है। शरीर ही नहीं, मन भी जख्मी हुआ है। गुमसुम रहते हैं। पूछने पर भी नहीं बोलते। फिर अचानक ही जोर से कहने लगते हैं, लाशें निकालो, लाशें निकालो । इनमें से दो बच्चों ने तो न अन्न का एक दाना खाया है। और न एक बूंद पानी पिया है। इनकी हालत बहुत खराब है। रोते हैं तो रोते ही चले जाते हैं। चुप होते हैं, तो चुप ही बैठ जाते हैं। किसी से बोल नहीं रहे। इन्हें शायद हादसे का सीन बार बार याद आ रहा है। उससे खुद को अलग नहीं कर पा रहे। उसे याद कर रहे हैं। क्रेन आ जाने के बाद यही शोर मचा था, लाशें निकालो, लाशें निकालो। बच्चे इसे दोहरा रहे हैं।
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40 मिनट में पुलिस आई, तीन घंटे में क्रेन मंगाई
पावसर नगलिया के भगवान सिंह भी हादसे में घायल हैं। उनका कहना है कि अगर पुलिस फुर्ती दिखाती तो कम से कम सात लोगों की जान बच जाती। एक तो पुलिस सूचना के 40 मिनट में आई। दूसरा, आकर खड़ी हो गई। पुलिस वाले तमाशबीन बने रहे। नाले में कीचड़ थी, दलदल सा बना था। लोग इसमें फंसे थे। ज्यादातर डीसीएम के नीचे दबे थे। देर रात का वक्त था। सड़क सुनसान थी। पुलिस इस उम्मीद में रही कि लोग आएंगे और मदद करेंगे। यूपी - 100 की पुलिस पहुंची थी। उसने थाना पुलिस को फोन किया। रात में प्रशासन के अधिकारी भी नहीं आए। पुलिस ने अपनी तरफ से क्रेन का बंदोबस्त नहीं किया। लड़की पक्ष के रिश्तेदार आए। वे क्रेन लेकर आए। तब जाकर डीसीएम को नाले से बाहर निकाला जा सका। तीन घंटे का वक्त लग गया। इस दौरान घायलों की हालत और बिगड़ गई। सात को अस्पताल में मृत घोषित किया गया। अगर क्रेन जल्दी आ गई होती, तो शायद उनकी जान बच जाती।
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