अटल जी के पैतृक गांव से मिलेगा इंसाफ, सरकार की ये है योजना
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जिला मुख्यालय से करीब 80 किमी दूर बसी बाह तहसील में हाईकोर्ट ने मुंसिफ कोर्ट की स्वीकृति दे दी थी। जमीन नहीं मिल पा रही थी। शनिवार को एसीजेएम आशीष चौरसिया के नेतृत्व में दिवानी के जजों की टीम बटेश्वर पहुंची। मंदिर के पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी, राकेश वाजपेयी, अशोक कुमार ने ऐतिहासिक शिव मंदिर शृंखला के इतिहास के बारे में उन्हें जानकारी दी।
इसके बाद मुंसिफ कोर्ट के लिए जमीन का स्थलीय निरीक्षण किया। 6 अप्रैल 1999 में जिस स्थल से अटल जी ने आगरा इटावा वाया बटेश्वर रेल लाइन का शिलान्यास किया था। उसके पास ही 20 एकड़ जमीन को चिह्नित कर लिया गया है। जज एडीजे अयूब खान, आरपी श्रीवास्तव, विवेक सिंघल ने इस जमीन को उपयुक्त पाया।
एसडीएम बाह अरुण कुमार यादव, तहसीलदार बाह हेमचंद्र शर्मा ने नायब तहसीलदार सुनील कुमार सिंह, राजस्व निरीक्षक विमल कुमार यादव, लेखपाल अशोक कुमार वर्मा ने जमीन की पैमाइश कराई। एसडीएम बाह अरुण कुमार यादव ने बताया कि जमीन का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। प्रस्ताव डीएम एनजी रवी कुमार के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा।
40 साल पुरानी है बाह में मुंसिफ कोर्ट की मांग
बाह में मुंसिफ कोर्ट की मांग 40 साल पुरानी है। इसको लेकर वकील से लेकर वादकारियों तक ने संघर्ष किया है। घर के नजदीक न्याय की मांग अब जाकर पूरी होने को है। जिससे इलाके के वकील ही नहीं आमजन की भी उम्मीदें जाग गई है। संघर्ष के बाद ही हाईकोर्ट ने 1989 में मुंसिफ कोर्ट की स्थापना को स्वीकृति दी थी।