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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Englishpitrpaksh : pitaron ka shraaddh aur tarpan kiya Pitru Paksha: Shradh and Tarpan of ancestors were performed

पितृपक्ष : पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया

Tue, 09 Sep 2025 02:22 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Tue, 09 Sep 2025 02:22 AM IST
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Englishpitrpaksh : pitaron ka shraaddh aur tarpan kiya   Pitru Paksha: Shradh and Tarpan of ancestors were performed
सोरोंजी। पितृपक्ष के दूसरे दिन सोमवार को बड़ी संख्या में लोग श्राद्ध पूजा और पितरों के तर्पण के लिए तीर्थंनगरी पहुंचे। भगवान विष्णु के तृतीय अवतार भगवान वराह की भूमि पर पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है। इसी मान्यता के चलते पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग यहां आ रहे हैं।तीर्थंनगरी में श्राद्ध पक्ष के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्राद्ध और तर्पण के लिए पहुंचे। भोर के साथ ही हरि की पौड़ी के घाटों पर पितरों के तर्पण का सिलसिला शुरू हो जाता है। तीर्थपुरोहित पंडित शशिधर द्विवेदी ने बताया कि भगवान विष्णु के तृतीय अवतार भगवान वराह के क्षेत्र शूकरक्षेत्र सोरोंजी में पिंडदान एवं तर्पण का विशेष महत्व है। यहां पर पिंडदान एवं तर्पण से अन्य तीर्थों की अपेक्षा कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। श्राद्ध पूजा के लिए तिल और कुश का विशेष महत्व रहता है। मान्यता है कुश और तिल भगवान विष्णु के शरीर से निकले हैं बिना इस सामग्री के श्राद्ध पूजा और तर्पण अधूरा माना गया है। गरुण पुराण के अनुसार कुश में देवताओं का वास होता है। कुश का अग्र भाग देवताओं का माना गया है। मध्य भाग मनुष्य का और जड़ भाग पितरों का माना जाता है जबकि तिल पितरों को प्रिय होते है। दुष्ट आत्माओं को दूर भगाने के लिए तिल बिखेरे जाते हैं। मान्यता है कि तिल बिखेरे बिना श्राद्ध पूरा नहीं होता। तर्पण मुख्य रूप से कुश, तिल, जौ, चावल से होता है। पंडित हेमेंद्र शास्त्री ने बताया कि तर्पण और श्राद्ध में तिल और कुश का विशेष महत्व होता है। बिना इस सामग्री के श्राद्ध पूरा नही हो सकता है, मान्यता है कि दुष्ट आत्माओं को रोकने के लिए श्राद्ध में तिल बिखेरे जाते हैं पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष की बाधा दूर होती है और तमाम संकट दूर होते हैं, सामान्य तौर पर भी गाय को रोटी खिलाने से पितृदोष शांत होता है।
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