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घरों में नहीं गूंज रही किलकारी: चॉकलेट सिस्ट से महिलाओं की गोद सूनी, झेल रहीं बांझपन का दर्द
Mon, 20 Sep 2021 12:01 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 20 Sep 2021 12:01 PM IST
सार
चिकित्सकों का कहना है कि एंड्रोमेट्रियोसिस बीमारी से पनपती हैं सिस्ट, नि:संतान महिलाओं में 20 से 25 फीसदी में यह बीमारी सामने आ रही है।
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patient prescription
- फोटो : iStock
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विस्तार
चॉकलेट सिस्ट (एंड्रोमेट्रियोसिस) की बीमारी से जूझ रहीं महिलाओं की के घरों में किलकारी नहीं गूंज पा रहीं। बांझपन के लिए इस बीमारी को चिकित्सक मुख्य वजह बता रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विभाग में इसकी रोजाना आठ से 10 मरीज मिल रहे हैं। इनमें अविवाहित युवतियां भी हैं।
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स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह ने बताया कि रोजाना 120 से 150 तक मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें से आठ से 10 महिलाओं में एंड्रोमेट्रियोसिस सिस्ट की परेशानी मिल रही है। इनमें तीन से चार और बाकी की शादीशुदा महिलाएं हैं। जांच करा दूरबीन विधि से उपचार देते हैं। गांठें बड़ी होने पर ऑपरेशन करना पड़ता है। इस बीमारी के कारण कई मरीज गर्भधारण नहीं कर पाते हैं। बांझपन की शिकार महिलाओं में से 25 प्रतिशत में चॉकलेट सिस्ट इसकी वजह मिली।
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जेनेटिक-एस्ट्रो हार्मोंस भी है वजह
एसएन कॉलेज की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि मासिक धर्म के दौरान निकलने वाला रक्त अंडाशय में पहुंचकर गांठें बनाता है। इसे एंड्रोमेट्रियोटिक सिस्ट कहते हैं। चॉकलेटी रंग के कारण चॉकलेट सिस्ट भी बोलते हैं। इसके रसौली आंत और बच्चेदानी की नलिकाओं से चिपक जाने से गर्भधारण की संभावनाएं कम हो जाती हैं। इसकी वजह जेनेटिक, एस्ट्रो हार्मोंस की अनियमितता और अन्य अज्ञात वजह भी हैं।
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खराब फिटनेस और फास्ट फूड से भी दिक्कत
एसएन स्त्री रोग विभाग की डॉ. निधि गुप्ता ने बताया कि युवतियों के पौष्टिक आहार की कमी और फास्ट फूड का चलन भी वजह है। ऐसी महिलाओं में ज्यादा यह परेशानी मिली, जिनकी फिटनेस खराब है और खानपान बिगड़ा हुआ है। डिब्बा बंद खाना, बाजार में मिलने वाला फास्ट फूड, कोल्डड्रिंग का अधिक उपयोग करती हैं। योग, व्यायाम और शारीरिक गतिविधियां भी कम हैं।
ये हैं लक्षण तो डॉक्टर से करें संपर्क
- माहवारी से पहले या बाद में तीन-चार दिन तक दर्द रहना।
- शारीरिक संबंध बनाते वक्त दर्द होना।
- मल त्यागने के वक्त पीड़ा होना।
- पेट में दर्द, सूजन और गैस की परेशानी रहना।
- माहवारी तय दिन से तीन-पांच दिन आगे-पीछे होना।
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