चंद्र ग्रहण के दौरान भी खुलेंगे द्वारिकाधीश मंदिर के पट, भक्त कर सकेंगे दर्शन
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गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण के कारण मथुरा में मंगलवार शाम को अधिकांश मंदिरों के पट बंद रहेंगे। सूतक के दौरान भक्त ठाकुर जी के दर्शन नहीं कर सकेंगे, लेकिन द्वारिकाधीश मंदिर में इस दौरान भी दर्शन किए जा सकेंगे।
मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी एडवोकेट राकेश तिवारी ने बताया कि बल्लभकुल संप्रदाय का द्वारकाधीश मंदिर ग्रहण के दौरान खुला रहेगा। मंगलवार को मंदिर में भगवान जी के दर्शन सुबह मंगला ग्वाल श्रृंगार के दर्शन समय अनुसार होंगे और राज भोग के दर्शन प्रात: 10 से 10:30 बजे तक होंगे।
उद्यापन के दर्शन दोपहर 2:30 से 2:40 तक होंगे। भोग संध्या आरती एक साथ दोपहर 3:15 से 3:25 तक होंगी, वहीं शयन के दर्शन सायंकाल चार से 4:30 तक होंगे। चंद्र ग्रहण के दर्शन रात्रि 1:30 बजे से मोक्ष तक होंगे।
इसके बाद मंगला श्रृंगार ग्वाल एवं राज भोग के दर्शन सेवा अनुसार चलेंगे और 17 तारीख को अध्यापन के दर्शन चार से 4:20 बजे तक होंगे। भोग और संध्या आरती एक साथ ठाकुर जी के डोले में विराजकर दर्शन होंगे और शयन 6:30 से 7:30 बजे तक होंगे।
धनु एवं मकर राशि पर पड़ेगा खग्रास चंद्रग्रहण
16 जुलाई की मध्यरात्रि में धनु और मकर राशि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में खग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि मंगलवार की मध्यरात्रि को 1:31 पर ग्रहण का स्पर्श होगा तथा सुबह 4:30 पर ग्रहण का मोक्ष होगा।
साहित्याचार्य शरद चतुर्वेदी ने बताया कि वृष, मिथुन, कन्या और तुला राशि वालों के लिए यह ग्रहण अशुभ है, वहीं धनु एवं मकर राशि वालों के लिए और अधिक अशुभ है। यह छह राशि वाले इस चंद्रग्रहण को न देखें तो अच्छा होगा।
उन्होंने बताया कि सभी राशि वाले ग्रहण के समय में स्नान दान एवं गोविंद गुणगान करें तो उनके लिए लाभ होगा। उन्होंने बताया कि गुरुपूर्णिमा को सायंकाल 4:30 तक पूजा-अर्चना कर लें। 4:31 से ग्रहण का सूतक लग जाएंगे।
ग्रहण 16 एवं 17 जुलाई की रात्रि 1:31 से 3:16 तक पड़ेगा। सूतक के समय बालक, वृद्ध, रोगी, गर्भिणी आदि को छोड़कर अन्य किसी व्यक्ति को भोजन एवं शयन नहीं करना चाहिए। स्नान और यात्रा करने से भी लोगों को बचना चाहिए।