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Agra News: धूल के गुबार से नाक में एलर्जी, अस्थमा का भी खतरा बढ़ा
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आगरा। अगर आपको लगातार छींक आ रही है और जलन के साथ आंखें लाल हो रही हैं तो इसे मामूली जुकाम समझ कर अनदेखी नहीं करें। सर्दी के माैसम में शहर की वायु में पीएम 2.5 (अति सूक्ष्म कण) और पीएम 10 (धूल कण) की अधिकता के कारण लोगों को सांस की नली में एलर्जी की परेशानी हो रही है।
चिकित्सकों का कहना है कि समय से इलाज न कराने पर व्यक्ति को क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और अस्थमा की बीमारी भी हो सकती है। इससे बचाव के लिए चिकित्सक घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं।
जिला अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अतुल जैन ने बताया कि ओपीडी में रोजाना करीब 80 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। सर्दी के माैसम में पीएम 2.5 और पीएम 10 के कण एक निश्चित ऊंचाई तक ही ऊपर जा पाते हैं। इसके चलते वायु में धुआं और धूल के कण की मात्रा बढ़ रही है।
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भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में अधिक समय रहने वालों को ऐसे माैसम में प्रदूषित वायु में सांस लेने के कारण एलर्जी हो रही है। लगातार छींक आने,नाक से पानी बहने और जलन के साथ आंखें लाल हो रही हैं। सर्दी शुरू होने के बाद वायु गुणवत्ता खराब होने से सांस के रोग के मरीज बढ़ गए हैं। मरीजों में एलर्जी फार्माकाइटिस से पीड़ितों की संख्या सबसे अधिक है। इसके साथ ही सीओपीडी और अस्थमा के मरीज भी हैं।
एलर्जी फार्माकाइटिस के मरीजों को साधारण जुकाम समझ कर अनदेखी नहीं करनी चाहिए। अधिक दिनों तक इलाज नहीं कराने पर खांसी और फिर अस्थमा की बीमारी भी हो सकती है। ऐसे मरीजों की जांच के बाद दवाइयां और नेबोलाइजर का इस्तेमाल कराया जाता है। जरूरत पड़ने पर स्टेरायड भी देना पड़ सकता है। ऐसे मरीजों को काफी दिनों तक इलाज कराना पड़ सकता है।
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चिकित्सकों का कहना है कि समय से इलाज न कराने पर व्यक्ति को क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और अस्थमा की बीमारी भी हो सकती है। इससे बचाव के लिए चिकित्सक घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं।
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जिला अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अतुल जैन ने बताया कि ओपीडी में रोजाना करीब 80 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। सर्दी के माैसम में पीएम 2.5 और पीएम 10 के कण एक निश्चित ऊंचाई तक ही ऊपर जा पाते हैं। इसके चलते वायु में धुआं और धूल के कण की मात्रा बढ़ रही है।
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भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में अधिक समय रहने वालों को ऐसे माैसम में प्रदूषित वायु में सांस लेने के कारण एलर्जी हो रही है। लगातार छींक आने,नाक से पानी बहने और जलन के साथ आंखें लाल हो रही हैं। सर्दी शुरू होने के बाद वायु गुणवत्ता खराब होने से सांस के रोग के मरीज बढ़ गए हैं। मरीजों में एलर्जी फार्माकाइटिस से पीड़ितों की संख्या सबसे अधिक है। इसके साथ ही सीओपीडी और अस्थमा के मरीज भी हैं।
एलर्जी फार्माकाइटिस के मरीजों को साधारण जुकाम समझ कर अनदेखी नहीं करनी चाहिए। अधिक दिनों तक इलाज नहीं कराने पर खांसी और फिर अस्थमा की बीमारी भी हो सकती है। ऐसे मरीजों की जांच के बाद दवाइयां और नेबोलाइजर का इस्तेमाल कराया जाता है। जरूरत पड़ने पर स्टेरायड भी देना पड़ सकता है। ऐसे मरीजों को काफी दिनों तक इलाज कराना पड़ सकता है।