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दशहरा 2025: जानें वो 10 बुराइयां, जिन्हें हर कोई करना चाहता है खत्म...बदलाव के लिए बेहद जरूरी
Thu, 02 Oct 2025 12:45 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 02 Oct 2025 12:45 PM IST
सार
दशहरा पर्व आज पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। बुराई पर अच्छाई की जीत के इस पर्व पर 10 बुराइयों को खात्मे का संकल्प लेना होगा, तभी बदलाव आएगा।
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रावण दहन
- फोटो : संवाद
विस्तार
दशहरे पर बुराई के प्रतीक रावण का दहन तो हो जाएगा मगर समाज में फैली असली बुराई कब खत्म होगी। इसके लिए किसी एक को नहीं बल्कि सभी को मिलकर संकल्प लेना होगा। लोगों को पहल करनी होगी तो संबंधित विभागीय अफसर भी उसे अमल में लाएं। इसके बाद ही बुराई का खात्मा हो सकेगा।
मिलावटी खाद्य, नकली दवाओं से जान का खतरा
मिलावटी दूध, घी, खोआ और नकली दवाएं। ये बाजार में खूब बिक रही हैं। हाल ही में पांच फर्म की 71 करोड़ की नकली दवाएं जब्त की गईं। दूध, पनीर, घी, तेल समेत 70 फीसदी जांच में नमूने फेल मिले। बीमारियांं बढ़ने के साथ ही जान का भी खतरा है। इतना ही नहीं कपड़े, जूते, ऑटोपार्ट्स, मोबिल ऑयल समेत अन्य जरूरत के सामान भी नकली मिले हैं। इस बुराई के खात्मे से सेहत सुधरेगी। लोग आर्थिक नुकसान से भी बचेंगे।
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मिलावटी खाद्य, नकली दवाओं से जान का खतरा
मिलावटी दूध, घी, खोआ और नकली दवाएं। ये बाजार में खूब बिक रही हैं। हाल ही में पांच फर्म की 71 करोड़ की नकली दवाएं जब्त की गईं। दूध, पनीर, घी, तेल समेत 70 फीसदी जांच में नमूने फेल मिले। बीमारियांं बढ़ने के साथ ही जान का भी खतरा है। इतना ही नहीं कपड़े, जूते, ऑटोपार्ट्स, मोबिल ऑयल समेत अन्य जरूरत के सामान भी नकली मिले हैं। इस बुराई के खात्मे से सेहत सुधरेगी। लोग आर्थिक नुकसान से भी बचेंगे।
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बाजारों में अतिक्रमण, कहां से निकलें
अहंकार का प्रमाण। नियमों का उल्लंघन। घर के गेट, रास्ते, सड़क से लेकर बाजार में व्यापार तक, हर जगह अतिक्रमण। पार्क, तालाब, खेल के मैदान से लेकर आम रास्ते तक अतिक्रमण से मुक्ति चाहते हैं। पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभाग इसे बुराई का जन सहयोग से अंत कर सकता है।
अहंकार का प्रमाण। नियमों का उल्लंघन। घर के गेट, रास्ते, सड़क से लेकर बाजार में व्यापार तक, हर जगह अतिक्रमण। पार्क, तालाब, खेल के मैदान से लेकर आम रास्ते तक अतिक्रमण से मुक्ति चाहते हैं। पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभाग इसे बुराई का जन सहयोग से अंत कर सकता है।
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सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की बुराई
विकास का पर्याय माने जानी वाली सड़कें सुरक्षित नहीं। वजह भ्रष्टाचार। इसके अलावा कहीं इंजीनियरिंग की खामियां, तो कहीं साइनेज नहीं। सड़क निर्माण की घटिया गुणवत्ता से सफर जोखिम से भरा हो रहा है। गड्ढा मुक्ति के दावे भी हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। सुरक्षित सड़क के लिए भ्रष्टाचार की बुराई का अंत होना चाहिए।
विकास का पर्याय माने जानी वाली सड़कें सुरक्षित नहीं। वजह भ्रष्टाचार। इसके अलावा कहीं इंजीनियरिंग की खामियां, तो कहीं साइनेज नहीं। सड़क निर्माण की घटिया गुणवत्ता से सफर जोखिम से भरा हो रहा है। गड्ढा मुक्ति के दावे भी हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। सुरक्षित सड़क के लिए भ्रष्टाचार की बुराई का अंत होना चाहिए।
साइबर अपराध बना मुसीबत
पहले चोर-लुटेरे सड़कों पर लूटते थे। मगर वर्तमान में साइबर अपराध अपने चरम पर है। पलभर में जमा पूंजी में सेंध लग जाती है। आरोपी भी पकड़े जाते हैं। मगर पीड़ितों की गई रकम बमुश्किल वापस मिल पाती है। सबसे पहले इस अपराध पर रोक लगना जरूरी है। लोग भी जागरूक बनें, जिससे इन अपराधियों को ठगने का माैका नहीं मिले।
पहले चोर-लुटेरे सड़कों पर लूटते थे। मगर वर्तमान में साइबर अपराध अपने चरम पर है। पलभर में जमा पूंजी में सेंध लग जाती है। आरोपी भी पकड़े जाते हैं। मगर पीड़ितों की गई रकम बमुश्किल वापस मिल पाती है। सबसे पहले इस अपराध पर रोक लगना जरूरी है। लोग भी जागरूक बनें, जिससे इन अपराधियों को ठगने का माैका नहीं मिले।
कचरा-गंदगी की समस्या, कब दूर होगी
यमुना में कचरा और दीवारों पर पीक की समस्या कब दूर होगी। नगर निगम साफ सफाई पर जोर दे रहा है। लोगों को भी एक संकल्प लेना होगा। न खुले में कचरा फेंकेंगे, न ही किसी को फेंकने देंगे। सफाई निस्तारण पर अधिकारी और कर्मचारी मिलकर काम करें।
यमुना में कचरा और दीवारों पर पीक की समस्या कब दूर होगी। नगर निगम साफ सफाई पर जोर दे रहा है। लोगों को भी एक संकल्प लेना होगा। न खुले में कचरा फेंकेंगे, न ही किसी को फेंकने देंगे। सफाई निस्तारण पर अधिकारी और कर्मचारी मिलकर काम करें।
साफ हवा नहीं मिल रही
मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है। वाहन बढ़ने के साथ ही पेड़-पाैधों की कमी से भी साफ हवा मिल पाना मुश्किल है। हर साल लक्ष्य निर्धारित करके पाैधे भी लगाए जाते हैं। सहेजने का संकल्प भी लिया जाता है। मगर आधे से ज्यादा पाैधे भी पेड़ नहीं बन पाते हैं। संकल्प लेना होगा कि सब मिलकर पाैधे लगाएंगे और उन्हें सहेजने में मदद करेंगे।
मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है। वाहन बढ़ने के साथ ही पेड़-पाैधों की कमी से भी साफ हवा मिल पाना मुश्किल है। हर साल लक्ष्य निर्धारित करके पाैधे भी लगाए जाते हैं। सहेजने का संकल्प भी लिया जाता है। मगर आधे से ज्यादा पाैधे भी पेड़ नहीं बन पाते हैं। संकल्प लेना होगा कि सब मिलकर पाैधे लगाएंगे और उन्हें सहेजने में मदद करेंगे।
स्वच्छ पानी के लिए मशक्कत
शहर से लेकर देहात तक स्वच्छ पानी पीने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। गंगाजल घर-घर पहुंचने का दावा अब भी अधूरा है। बड़ी आबादी को आज भी पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में पाइप लाइन नहीं होने की समस्या है तो कई में लाइन होने के बाद भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
शहर से लेकर देहात तक स्वच्छ पानी पीने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। गंगाजल घर-घर पहुंचने का दावा अब भी अधूरा है। बड़ी आबादी को आज भी पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में पाइप लाइन नहीं होने की समस्या है तो कई में लाइन होने के बाद भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
नशे का धंधा फल-फूल रहा
आगरा कमिश्नरेट में कई बार पुलिस नशे के साैदागरों को पकड़ चुकी है। शराब से लेकर चरस और गांजा की सप्लाई देश से नहीं, बल्कि नेपाल तक से हो रही है। चंद रुपयों के लालच में युवाओं को नशाखोरी में धकेला जा रहा है। पुलिस कार्रवाई के साथ ही जागरूकता से ही इससे युवाओं को बचाया जा सकता है।
आगरा कमिश्नरेट में कई बार पुलिस नशे के साैदागरों को पकड़ चुकी है। शराब से लेकर चरस और गांजा की सप्लाई देश से नहीं, बल्कि नेपाल तक से हो रही है। चंद रुपयों के लालच में युवाओं को नशाखोरी में धकेला जा रहा है। पुलिस कार्रवाई के साथ ही जागरूकता से ही इससे युवाओं को बचाया जा सकता है।
यातायात नियमों का पालन हो
नो हेलमेट का नियम बनाया गया है। फिर भी लोग पालन नहीं कर रहे हैं। यह एक नियम नहीं है, बल्कि सुरक्षा के लिए जरूरी है। पुलिस को अभियान चलाकर कार्रवाई करनी पड़ रही है। जागरूकता के लिए अभियान भी चलाने पड़ रहे हैं। खुद से संकल्प लेना होगा कि वाहन चलाएंगे तो यातायात नियमों का पालन करेंगे।
नो हेलमेट का नियम बनाया गया है। फिर भी लोग पालन नहीं कर रहे हैं। यह एक नियम नहीं है, बल्कि सुरक्षा के लिए जरूरी है। पुलिस को अभियान चलाकर कार्रवाई करनी पड़ रही है। जागरूकता के लिए अभियान भी चलाने पड़ रहे हैं। खुद से संकल्प लेना होगा कि वाहन चलाएंगे तो यातायात नियमों का पालन करेंगे।
जाम से मुक्ति मिले
एमजी रोड हो या फिर हाईवे, प्रमुख बाजार से लेकर रास्ते, हर जगह पर जाम की समस्या से लोगों को दो-चार होना पड़ रहा है। एक जगह से राहत मिलती है तो दूसरी जगह पर परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुलिस की कवायद भी बेकार भी साबित होती हैं। कहीं बेतरतीब वाहन निकालने से लेकर से नियमों का पालन नहीं करने से जाम लगता है।
एमजी रोड हो या फिर हाईवे, प्रमुख बाजार से लेकर रास्ते, हर जगह पर जाम की समस्या से लोगों को दो-चार होना पड़ रहा है। एक जगह से राहत मिलती है तो दूसरी जगह पर परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुलिस की कवायद भी बेकार भी साबित होती हैं। कहीं बेतरतीब वाहन निकालने से लेकर से नियमों का पालन नहीं करने से जाम लगता है।