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नकली निकली पशु चिकित्सालय की दवा
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पशु चिकित्सालय। अमर उजाला
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। सरकारी पशु चिकित्सालयों में आने वाली दवाएं नकली निकल रही हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से एक दवा की जांच में ये बात सामने आई है। इसके बाद पशुपालन विभाग और दवा की निर्माता कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। जिले में दवा की लाखों रुपये की सप्लाई होती है।
औषधि निरीक्षक उर्मिला अग्रवाल ने फरवरी में पशु चिकित्सालय सदर का निरीक्षण किया था। यहां से उन्होंने संदेह के आधार पर विटामिन स्टार सीरप का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा था। जांच रिपोर्ट आई तो नमूना फेल हो गया। रिपोर्ट के अनुसार जो साल्ट दवा के ऊपर लिखा था, वह तो उसमें था ही नहीं। यह दवा नकली थी। इसको अलीगढ़ की सैटिसफैक्शन हेल्थ केयर नाम की कंपनी ने बनाया था।
रिपोर्ट आने के बाद तत्काल मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को दवा का प्रयोग न करने का नोटिस भेजा गया, लेकिन तब तक दवा का स्टॉक खत्म हो चुका था। सरकारी सप्लाई में नकली दवा मिलना एक गंभीर मामला है। इसके बाद आनन फानन में दवा की निर्माता कंपनी को भी नोटिस जारी किया गया है। इस बात की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि अन्य दवाएं भी तो कहीं नकली तो नहीं हैं।
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पूरे प्रदेश में हुई दवा की आपूर्ति
विटामिन स्टार नाम की इस दवा की आपूर्ति केवल जिले में ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में हुई थी। शासन की ओर से दवा की निर्माता कंपनी सैटिसफैक्शन हेल्थ केयर को दवा आपूर्ति के लिए नामित किया गया था। ये आपूर्ति बीते वर्ष की गई थी। इसके चलते अधिकतर जिलों में इसका स्टॉक खत्म हो चुका है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पुष्प कुमार ने बताया कि अब उनके पास भी इस दवा का स्टॉक नहीं है।
कंपनी से नहीं मिला जवाब
औषधि निरीक्षक ने लगभग एक माह पहले सैटिसफैक्शन हेल्थ केयर अलीगढ़ को नोटिस भेजकर विटामिन स्टार दवा के संबंध में जानकारी मांगी थी। उन्होंने इस लॉट में तैयार दवा की आपूर्ति कहां-कहां हुई, कितना स्टॉक कंपनी के पास है। इस बारे में भी जानकारी मांगी थी। एक महीना बाद भी कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। इससे विभाग को कंपनी के भाग जाने की भी चिंता सता रही है।
जांच रिपोर्ट में दवा नकली निकलने के बाद पशुपालन विभाग और कंपनी को नोटिस भेजा गया है। अब तक कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है, जिससे मामला गंभीर प्रतीत हो रहा है। उच्चाधिकारियों को सूचित कर मामले में कार्रवाई की जाएगी।
-उर्मिला अग्रवाल, औषधि निरीक्षक।
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औषधि निरीक्षक उर्मिला अग्रवाल ने फरवरी में पशु चिकित्सालय सदर का निरीक्षण किया था। यहां से उन्होंने संदेह के आधार पर विटामिन स्टार सीरप का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा था। जांच रिपोर्ट आई तो नमूना फेल हो गया। रिपोर्ट के अनुसार जो साल्ट दवा के ऊपर लिखा था, वह तो उसमें था ही नहीं। यह दवा नकली थी। इसको अलीगढ़ की सैटिसफैक्शन हेल्थ केयर नाम की कंपनी ने बनाया था।
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रिपोर्ट आने के बाद तत्काल मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को दवा का प्रयोग न करने का नोटिस भेजा गया, लेकिन तब तक दवा का स्टॉक खत्म हो चुका था। सरकारी सप्लाई में नकली दवा मिलना एक गंभीर मामला है। इसके बाद आनन फानन में दवा की निर्माता कंपनी को भी नोटिस जारी किया गया है। इस बात की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि अन्य दवाएं भी तो कहीं नकली तो नहीं हैं।
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पूरे प्रदेश में हुई दवा की आपूर्ति
विटामिन स्टार नाम की इस दवा की आपूर्ति केवल जिले में ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में हुई थी। शासन की ओर से दवा की निर्माता कंपनी सैटिसफैक्शन हेल्थ केयर को दवा आपूर्ति के लिए नामित किया गया था। ये आपूर्ति बीते वर्ष की गई थी। इसके चलते अधिकतर जिलों में इसका स्टॉक खत्म हो चुका है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पुष्प कुमार ने बताया कि अब उनके पास भी इस दवा का स्टॉक नहीं है।
कंपनी से नहीं मिला जवाब
औषधि निरीक्षक ने लगभग एक माह पहले सैटिसफैक्शन हेल्थ केयर अलीगढ़ को नोटिस भेजकर विटामिन स्टार दवा के संबंध में जानकारी मांगी थी। उन्होंने इस लॉट में तैयार दवा की आपूर्ति कहां-कहां हुई, कितना स्टॉक कंपनी के पास है। इस बारे में भी जानकारी मांगी थी। एक महीना बाद भी कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। इससे विभाग को कंपनी के भाग जाने की भी चिंता सता रही है।
जांच रिपोर्ट में दवा नकली निकलने के बाद पशुपालन विभाग और कंपनी को नोटिस भेजा गया है। अब तक कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है, जिससे मामला गंभीर प्रतीत हो रहा है। उच्चाधिकारियों को सूचित कर मामले में कार्रवाई की जाएगी।
-उर्मिला अग्रवाल, औषधि निरीक्षक।