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पाले से आलू में झुलसा रोग लगा

Mon, 30 Dec 2019 10:48 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 30 Dec 2019 10:48 PM IST
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due to cold potato crops make disease
30एमएनपी-15-खेत में खड़ी आलू की फसल - फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। सर्दी बढ़ने के साथ ही आलू की फसल पर खतरा मंडराने लगा है। कई दिनों से लगातार कोहरा और गलन के चलते आलू की फसल में झुलसा रोग शुरू हो गया है। ऐसे में किसानों को बड़ा नुकसान होने का डर सता रहा है। वहीं अभी दूर-दूर तक मौसम साफ होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
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जिले के किसानों के लिए आलू एक प्रमुख फसल है। इस बार किसानों ने करीब 21.5 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल की बुवाई की है। इस बार आलू की कीमत सही रहने के चलते किसानों को आलू की फसल से फायदे की उम्मीद है। लेकिन मौसम की मार से अब आलू की फसल में उन्हें नुकसान होने की आशंका सताने लगी है। दरअसल लगातार कई दिनों से तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है।
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पाला गिरने से आलू की फसल में झुलसा शुरू हो गई है। सबसे अधिक नुकसान उस आलू में होगा, जिसकी बुवाई देरी से हुई है। अगर जल्द ही मौसम साफ न हुआ तो आलू में नुकसान होगा।
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आलू में सबसे बड़ा रोग झुलसा रोग होता है। इसमें सर्दी के चलते आलू की बेल खराब होने लगती है। सबसे पहले बेल के कुछ पत्ते सिकुड़ने लगते हैं, धीरे-धीरे पूरी बेल सूख जाती है और आलू का विकास रुक जाता है। ऐसे में आलू पूरी तरह खराब हो जाता है।
जानकारों के अनुसार मौसम आलू के लिए बेहतर नहीं है। ऐसे में अगर आलू में झुलसा रोग फैल जाता है तो किसानों के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। किसानों के लिए आलू की लागत भी निकालना मुश्किल होगा। आलू में अब तक सात से नौ हजार रुपये प्रति बीघा का खर्च आ चुका है। ऐसे में अब किसान कहीं के नहीं रहेंगे।

झुलसा से आलू का बचाव करने के लिए हल्की सिंचाई सबसे बेहतर साधन है। जब तक खेत में नमी बनी रहती है तब तक पाला का प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके साथ ही किसान आलू की फसल में मैगनीज कार्बानमेट से 2.5 किलोग्राम को एक हजार लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से स्प्रे करें। इसके अलावा मैंकोजेब 2.5 किलोग्राम का भी प्रति हजार लीटर घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है।
अनीता सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
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