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कचौड़ी की दुकान से शुरू हुई थी डबल मर्डर की वारदात
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सुन्दर चतुर्वेदी के निवास पर तुलसी चबूतरा गली में मृतक परिवार के यहां शोक में डूबे परिवारीजन एंव
- फोटो : MATHURA
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मथुरा। डबल मर्डर की वारदात की शुरुआत गली भीकचंद में कचौड़ी वाले की दुकान से हुई थी। वारदात से कुछ देर पहले सब्जी विक्रेता यहां पर कचौड़ी खाने पहुंचा था। तभी गली भीकचंद में रहने वाले युवक मुलका-बंटू ने उससे मारपीट कर डाली थी। इससे बौखलाए सब्जी विक्रेता ने पुत्र के साथ वारदात को अंजाम दिया। यह खुलासा पकड़े गए आरोपी पुलिस अभिरक्षा में स्वीकार किया है।
वारदात की पटकथा करीब 15 दिन पूर्व उस वक्त लिखी गई, जब सब्जी विक्रेता संजय चौरसिया और गली भीकचंद में रहने वाले गोली नामक व्यक्ति में झगड़ा हुआ था। 15 दिन से दोनों एक-दूसरे पर वार करने की फिराक में थे। दोनों में इससे पूर्व भी कई झड़पें हुईं, लेकिन सोमवार सुबह सब्जी विक्रेता संजय गली सेठ भीकचंद के सामने दुकान पर कचौड़ी खाने पहुंचा ही था कि गोली के पुत्र ने संजय से मारपीट कर दी। इससे बौखलाया संजय अपने घर गया और बेटों को जानकारी दी। इसके बाद गली भीकचंद में गोली कांड हुआ और दो लोगों की हत्या हो गई।
पुलिस ने मंगलवार को वारदात के आरोपी आयुष को जेल भेजा दिया। पुलिस के मुताबिक अभिरक्षा में आयुष ने स्वीकार किया कि उसके पिता संजय चौरसिया के साथ बंटी और मुलका ने मारपीट की थी, उसी का बदला लेने के लिए वह सेठ गली भीकचंद में गया था। उनको देखकर बंटी-मुलका भाग गए। मंदिर के पास मौजूद लोगों ने उसे पकड़ने के प्रयास किया, जिसके विरोध में उसने उन पर गोलियां चला दीं। इस वारदात में सुंदर और बसंत की गोली लगने से मौत हो गई थी।
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कोतवाली प्रभारी अवधेश प्रताप सिंह ने बताया कि गली भीकचंद के सामने कचौड़ी की दुकान पर हुई मारपीट के बाद संजय चौरसिया अपने घर गया था। उसके बाद उसने अपने बेटों के साथ वारदात को अंजाम दिया। इधर, एसएपी सिटी उदय शंकर सिंह ने बताया कि एक आरोपी आयुष से वारदात में प्रयुक्त अवैध असलाह बरामद हुआ है, उसे जेल भेज दिया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी शीघ्र की जाएगी।
पुलिस चाहती तो रोक सकती थी वारदात
पुलिस कोतवाली क्षेत्र में चल रहे दबंगई के खेल को न रोक सकी, इसलिए सोमवार को गली सेठ भीकचंद में खूनी खेल खेला गया। पुलिस ने पहले ही यदि इसे रोक दिया होता तो शायद दो लोगों की जान नहीं जाती। बताया जाता है कि शुक्रवार को सौंख अड्डे के निकट भी दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी। दोनों पक्ष चौकी बाग बहादुर तक गए भी थे, परंतु कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
मारे गए निर्दोष सुंदर और बंसत चतुर्वेदी
कचौड़ी वाले के यहां पर हमलावरों को वास्तव में दो बंटी ओर मुलका को अपना निशाना बनाना था, परंतु जैसे ही हमलावर वहां पहुंचे वे भाग निकले। हमलावरों ने फिर उनके साथ रहने वाले सुंदर को निशाना बना लिया। जबकि बंसत चतुर्वेदी साउंड सर्विस का काम करके चबूतरा पर आकर बैठे ही थे। उनको इस वारदात का विरोध करने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी।
कुछ दिन पूर्व खारन में फैली थी दहशत
हत्याकांड से पूर्व खारन कहे जाने वाले चौबिया पाड़ा क्षेत्र के मोहल्ले में भी दहशत फैल गई थी। यहां पर हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन हुआ था, परंतु स्थिति विस्फोटक होने बच गई थी।
सब्जी विक्रेता पर कहां से आए हथियार ?
पुलिस के अनुसार वारदात यदि सब्जी विक्रेता ने की है तो यह जानना भी जरूरी है कि उसके पास व्यवसायिक अपराधियों की तरह हथियार आखिरकार कहां से आए। वारदात से जुड़े ऐसे कौन लोग हैं, जिन्होंने बड़ी वारदात का प्लान तैयार किया था। इधर, तीन साल पहले मयंक चेन के यहां करोड़ों का डाका डालने वाले कुख्यात रंगा-बिल्ला के पास से मिले हथियार कहां से आए थे, पुलिस इसकी भी जानकारी आज तक नहीं जुटा सकी। वारदात से स्पष्ट है कि यह क्षेत्र हथियारों की तस्करी व नशीले पदार्थों की तस्करी का भी गढ़ बना हुआ है।
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वारदात की पटकथा करीब 15 दिन पूर्व उस वक्त लिखी गई, जब सब्जी विक्रेता संजय चौरसिया और गली भीकचंद में रहने वाले गोली नामक व्यक्ति में झगड़ा हुआ था। 15 दिन से दोनों एक-दूसरे पर वार करने की फिराक में थे। दोनों में इससे पूर्व भी कई झड़पें हुईं, लेकिन सोमवार सुबह सब्जी विक्रेता संजय गली सेठ भीकचंद के सामने दुकान पर कचौड़ी खाने पहुंचा ही था कि गोली के पुत्र ने संजय से मारपीट कर दी। इससे बौखलाया संजय अपने घर गया और बेटों को जानकारी दी। इसके बाद गली भीकचंद में गोली कांड हुआ और दो लोगों की हत्या हो गई।
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पुलिस ने मंगलवार को वारदात के आरोपी आयुष को जेल भेजा दिया। पुलिस के मुताबिक अभिरक्षा में आयुष ने स्वीकार किया कि उसके पिता संजय चौरसिया के साथ बंटी और मुलका ने मारपीट की थी, उसी का बदला लेने के लिए वह सेठ गली भीकचंद में गया था। उनको देखकर बंटी-मुलका भाग गए। मंदिर के पास मौजूद लोगों ने उसे पकड़ने के प्रयास किया, जिसके विरोध में उसने उन पर गोलियां चला दीं। इस वारदात में सुंदर और बसंत की गोली लगने से मौत हो गई थी।
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कोतवाली प्रभारी अवधेश प्रताप सिंह ने बताया कि गली भीकचंद के सामने कचौड़ी की दुकान पर हुई मारपीट के बाद संजय चौरसिया अपने घर गया था। उसके बाद उसने अपने बेटों के साथ वारदात को अंजाम दिया। इधर, एसएपी सिटी उदय शंकर सिंह ने बताया कि एक आरोपी आयुष से वारदात में प्रयुक्त अवैध असलाह बरामद हुआ है, उसे जेल भेज दिया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी शीघ्र की जाएगी।
पुलिस चाहती तो रोक सकती थी वारदात
पुलिस कोतवाली क्षेत्र में चल रहे दबंगई के खेल को न रोक सकी, इसलिए सोमवार को गली सेठ भीकचंद में खूनी खेल खेला गया। पुलिस ने पहले ही यदि इसे रोक दिया होता तो शायद दो लोगों की जान नहीं जाती। बताया जाता है कि शुक्रवार को सौंख अड्डे के निकट भी दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी। दोनों पक्ष चौकी बाग बहादुर तक गए भी थे, परंतु कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
मारे गए निर्दोष सुंदर और बंसत चतुर्वेदी
कचौड़ी वाले के यहां पर हमलावरों को वास्तव में दो बंटी ओर मुलका को अपना निशाना बनाना था, परंतु जैसे ही हमलावर वहां पहुंचे वे भाग निकले। हमलावरों ने फिर उनके साथ रहने वाले सुंदर को निशाना बना लिया। जबकि बंसत चतुर्वेदी साउंड सर्विस का काम करके चबूतरा पर आकर बैठे ही थे। उनको इस वारदात का विरोध करने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी।
कुछ दिन पूर्व खारन में फैली थी दहशत
हत्याकांड से पूर्व खारन कहे जाने वाले चौबिया पाड़ा क्षेत्र के मोहल्ले में भी दहशत फैल गई थी। यहां पर हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन हुआ था, परंतु स्थिति विस्फोटक होने बच गई थी।
सब्जी विक्रेता पर कहां से आए हथियार ?
पुलिस के अनुसार वारदात यदि सब्जी विक्रेता ने की है तो यह जानना भी जरूरी है कि उसके पास व्यवसायिक अपराधियों की तरह हथियार आखिरकार कहां से आए। वारदात से जुड़े ऐसे कौन लोग हैं, जिन्होंने बड़ी वारदात का प्लान तैयार किया था। इधर, तीन साल पहले मयंक चेन के यहां करोड़ों का डाका डालने वाले कुख्यात रंगा-बिल्ला के पास से मिले हथियार कहां से आए थे, पुलिस इसकी भी जानकारी आज तक नहीं जुटा सकी। वारदात से स्पष्ट है कि यह क्षेत्र हथियारों की तस्करी व नशीले पदार्थों की तस्करी का भी गढ़ बना हुआ है।