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Agra News: गढ़मुक्खा में पेयजल संकट गहराया, ग्रामीणों ने भूख हड़ताल की दी चेतावनी, तालाब पर पहुंचकर किया प्रदर्शन, 6 हजार की आबादी महज दो हैंडपंपों पर निर्भर, सूखा तालाब और बंद टंकियां बनीं मुसीबत, फ्लाराइड की मात्रा बढ़ने से बढ़ी बीमारियां

Mon, 27 Apr 2026 11:56 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2026 11:56 PM IST
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Drinking water crisis deepens in Garhmukkha; villagers threaten hunger strike, protest at pond; 6,000 people dependent on just two hand pumps; dry pond and closed tanks pose a problem; increased fluoride levels increase diseases.
पानी के लिए प्रदर्शन करते गढ़मुक्खा के  ग्रामीण। संवाद
कागारौल। विकास खंड खेरागढ़ की ग्राम पंचायत बेरी चाहर के गांव गढ़मुक्खा में भीषण पेयजल संकट गहरा गया है। सोमवार को परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सूखे तालाब पर प्रदर्शन किया। उन्होंने तत्काल समाधान की मांग की और भूख हड़ताल की चेतावनी दी।
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करीब 6 हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव में मीठे पानी के लिए मात्र दो हैंडपंप हैं। ये हैंडपंप गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर हनुमान मंदिर परिसर में स्थित हैं। सुबह होते ही पानी भरने के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के अधिकांश हैंडपंपों का पानी खारा हो चुका है। पानी में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ने से बीमारियां भी बढ़ रही हैं। खारे पानी की समस्या के कारण कई परिवारों ने पशुपालन बंद कर दिया है। भीषण गर्मी में यह संकट और गंभीर हो गया है।
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भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गईं टीटीएसपी टंकियां
गांव के बाहर दिगरौता सड़क पर कागारौल ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला तालाब भी सूखा पड़ा हुआ है, जिससे पशुओं के लिए भी पेयजल संकट बना हुआ है। हरिओम लवानियां ने बताया कि सांसद निधि से बनी पानी की टंकी आज तक उपयोग में नहीं आई, जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। गांव में बनी 6-7 टीटीएसपी टंकियां भी लंबे समय से बंद पड़ी हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चार वर्ष पूर्व तालाब की खुदाई पर लाखों रुपये खर्च हुए, पर उसमें पानी नहीं भरा गया। पशु-पक्षियों को भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
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मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत भी की, कार्रवाई नहीं हुई
देवेंद्र उर्फ भोलू जाट ने 21 अप्रैल को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहींए हीरालाल लवानियां और सूबेदार रामवीर सिंह ने बताया कि गांव में वर्षों से खारे पानी की समस्या बनी हुई है। इस संबंध में उप जिलाधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक कई बार शिकायत पत्र दिए जा चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं मिल सका। इस दौरान कंचन सिंह, रमेश वर्मा, इंद्रजीत प्रधान, देवीसिंह, भीम सिंह, बच्चू सिंह, हम्बीर सिंह, साबिर खान, उस्मान अली, धर्मवीर सिंह, अंतराम, महेश कुशवाह, रूप किशोर आदि ग्रामीणों ने रोष व्यक्त किया।

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नहर से तालाब तक पानी लाने को सुझाया समाधान
बुजुर्ग सुरेश लवानियां ने बताया कि तालाब से करीब आधा किलोमीटर की दूरी से नहर गुजरती है। यदि वहां से तालाब तक नाली का निर्माण कर पानी पहुंचाया जाए तो तालाब भर सकता है, जिससे गांव का जलस्तर भी बढ़ेगा और पशुओं को भी पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। ग्रामीण संतोष चाहर ने गांव की सभी बंद पड़ी टीटीएसपी टंकियों को तत्काल चालू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि टंकियों से नियमित पानी की सप्लाई शुरू हो जाए तो गांव के प्रत्येक घर तक पानी पहुंच सकता है और समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है।
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