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ये तो भोजन की तलाश में निकलें हैं; न डरें, न छेड़ें, न मारें इन्हें
ब्यूरो, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2015 02:26 AM IST
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महर्षिपुरम के यादव मार्केट स्थित दुकान में रविवार को पप्पू पान वाले तब सन्न रह गए जब उन्होंने दुकान में रखे रेफ्रीजरेटर और रैक के बीच एक फुट लंबे ‘अजगर’ के करीब बच्चा रेंगते देखा। उन्होंने हिम्मत कर उसे किसी तरह एक जार में बंद कर लिया। कुछ दिन पहले भी उनसे लगी दुकान के बाहर बड़ा सा अजगर पकड़ा गया था। इससे एक ही दिन पहले इसी चौराहे पर खड़ी कार में अजगर घुस गया था। शनिवार की रात गनपति आशियाना कालोनी में सात फुट के अजगर के कारण दहशत फैली थी। और भी कई इलाकों में सांप-अजगर निकले।
बहुत संभव है, आपके घर या आसपास कोई सांप अथवा अजगर रेंगता दिख जाए तो डरें नहीं। अमर उजाला फाउंडेशन आपसे अपील करता है कि न इ्न्हें छेड़ें और न ही मारें। इन्हें मारना कानूनन जुर्म भी है। ये शर्मीले जीव हमला छेड़छाड़ होने पर ही करते हैं। ऐसे में वाइल्ड लाइफ एसओएस को सूचित करें। उनकी टीम जल्द से जल्द पहुंचने की कोशिश करेगी।
रविवार शाम ‘अमर उजाला’ की सूचना पर पप्पू की दुकान में पकड़े गए ‘अजगर’ को कब्जे में लेने आए वाइल्ड लाइफ के रेस्क्यू कोआर्डिनेटर भूषण कुमार सोनू ने बताया कि यह अजगर नहीं बल्कि सांप (कॉमन सैंड बोया) है जो जहरीला नहीं होता। अभी भले इसके शरीर पर अजगर जैसे चकत्ते हैं पर थोड़ा बड़ा होने पर इसका रंग बदल जाएगा। इसकी त्वचा रुखी होती है जबकि अजगर चिकना होता है। पूंछ की बनीवट व रंग के कारण लोग इसे दोमुंहा सांप भी कहते हैं। सोनू ने बताया कि सरीसृप (रेेप्टाइल) वर्ग के ये जीव इन दिनों भोजन की तलाश में निकलते हैं। क्योंकि जाड़ा शुरू होने के साथ ही इन्हें ‘शीत सुप्तावस्था’ में अपने बिलों में छिपना और करीब पांच महीने बगैर कुछ खाए-पिए रहना पड़ता है। इसलिए ये पहले से शरीर में भोजन ‘स्टोर’ करते हैं। दूसरे यदि इनके हैबिटेट (बिल आदि) पर या आसपास घरों का निर्माण हो रहा हो तो भी ये सुरक्षित जगह की खोज में बाहर निकल सकते हैं।
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यहां दें सूचना
9917190666
9639001566
डा. बैजूराम, मैनेजमेंट डायरेक्टर, वाइल्ड लाइफ एसओएस
100
पुलिस कंट्रोल रूम
0562-2258400
जिलाधिकारी कैंप कार्यालय
ये भी जान लें
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डाक्टर को दिखाएं
फरेबियों को नहीं
आमतौर पर लोग सर्पदंश की दशा में झाड़फूंक करने वालों के पास जाते हैं। पीड़ित की दशा दंश से नहीं बल्कि भय से खराब होती है। थोड़ी देर बाद वह सामान्य होता है तो झाड-फूंक करने वाले उसे ठीक करने का दावा कर मुंहमांगी रकम ऐंठ लेते हैं। याद रहे, यदि जहरीले सर्प ने डसा है तो जहर से ज्यादा घातक झाड़-फूंक में बिताया वक्त हो सकता है। इसलिए फौरन अस्पताल या डाक्टर के पास ले जाएं।
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बहुत संभव है, आपके घर या आसपास कोई सांप अथवा अजगर रेंगता दिख जाए तो डरें नहीं। अमर उजाला फाउंडेशन आपसे अपील करता है कि न इ्न्हें छेड़ें और न ही मारें। इन्हें मारना कानूनन जुर्म भी है। ये शर्मीले जीव हमला छेड़छाड़ होने पर ही करते हैं। ऐसे में वाइल्ड लाइफ एसओएस को सूचित करें। उनकी टीम जल्द से जल्द पहुंचने की कोशिश करेगी।
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रविवार शाम ‘अमर उजाला’ की सूचना पर पप्पू की दुकान में पकड़े गए ‘अजगर’ को कब्जे में लेने आए वाइल्ड लाइफ के रेस्क्यू कोआर्डिनेटर भूषण कुमार सोनू ने बताया कि यह अजगर नहीं बल्कि सांप (कॉमन सैंड बोया) है जो जहरीला नहीं होता। अभी भले इसके शरीर पर अजगर जैसे चकत्ते हैं पर थोड़ा बड़ा होने पर इसका रंग बदल जाएगा। इसकी त्वचा रुखी होती है जबकि अजगर चिकना होता है। पूंछ की बनीवट व रंग के कारण लोग इसे दोमुंहा सांप भी कहते हैं। सोनू ने बताया कि सरीसृप (रेेप्टाइल) वर्ग के ये जीव इन दिनों भोजन की तलाश में निकलते हैं। क्योंकि जाड़ा शुरू होने के साथ ही इन्हें ‘शीत सुप्तावस्था’ में अपने बिलों में छिपना और करीब पांच महीने बगैर कुछ खाए-पिए रहना पड़ता है। इसलिए ये पहले से शरीर में भोजन ‘स्टोर’ करते हैं। दूसरे यदि इनके हैबिटेट (बिल आदि) पर या आसपास घरों का निर्माण हो रहा हो तो भी ये सुरक्षित जगह की खोज में बाहर निकल सकते हैं।
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9917190666
9639001566
डा. बैजूराम, मैनेजमेंट डायरेक्टर, वाइल्ड लाइफ एसओएस
100
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0562-2258400
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फरेबियों को नहीं
आमतौर पर लोग सर्पदंश की दशा में झाड़फूंक करने वालों के पास जाते हैं। पीड़ित की दशा दंश से नहीं बल्कि भय से खराब होती है। थोड़ी देर बाद वह सामान्य होता है तो झाड-फूंक करने वाले उसे ठीक करने का दावा कर मुंहमांगी रकम ऐंठ लेते हैं। याद रहे, यदि जहरीले सर्प ने डसा है तो जहर से ज्यादा घातक झाड़-फूंक में बिताया वक्त हो सकता है। इसलिए फौरन अस्पताल या डाक्टर के पास ले जाएं।