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ये हैं आगरा के गणतंत्र के पहरुए: रक्तदान कर बचाते हैं दूसरों की जान, 108 बार दिया श्रीधर ने रक्त
Wed, 26 Jan 2022 10:27 AM IST
Abhishek Saxena
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 26 Jan 2022 10:27 AM IST
सार
अमर उजाला अखबार में विज्ञापन देकर रक्तदान करने का सिलसिला शुरू हुआ जो आज भी जारी है।
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रक्तदान करने वाले महादानी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
तंत्र को गणतंत्र बनाने में नागरिकों का योगदान अहम होता है। ऐसे नागरिक जो न केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों, बल्कि शहर और समाज के विकास के लिए भी काम करें। ताजनगरी में भी गणतंत्र के ऐसे पहरुए हैं। इनमें एनआर श्रीधर और अभिषेक शर्मा भी हैं। श्रीधर जहां 108 बार रक्त दे चुके हैं, वहीं युवा अभिषेक भी 30 बार लोगों की जान बचा चुके हैं।
अखबार में इश्तहार देख शुरू हुआ सिलसिला : एनआर श्रीधर
शमसाबाद रोड निवासी एनआर श्रीधर ने बताया कि पहली बार उन्होंने रक्तदान 19 साल की उम्र 1989 में किया। जब अमर उजाला अखबार में रक्त की आवश्यकता का इश्तहार छपा था। मैंने अखबार पढ़ा और रक्तदान किया। मरीज के परिजन मेरे आगे हाथ जोड़कर खड़े हो गए। तब से रक्त की महिमा जानी, उस वक्त तो रक्तदान करने के लिए इक्कादुक्का ही लोग आते थे। तब से वह जरूरत पर रक्तदान करने लगे हैं। अधिकांश ब्लड बैंकों में उनका नंबर दर्ज है और कई संस्थाओं की ओर से सम्मानित भी हो चुके हैं।
किसी की जान बचाना, सबसे बड़ा पुण्य : अभिषेक शर्मा
जज कंपाउंड में रहने वाले अभिषेक शर्मा ने बताया कि उनका ओ-निगेटिप ग्रुप है और रक्तदान अभियान चलाने वाले रोहित अग्रवाल अधिवक्ता उनके मित्र हैं, उनसे प्रभावित होकर उन्होंने रक्तदान करने का निर्णय लिया। जब भी किसी गर्भवती महिला, ऑपरेशन कराने वाले समेत अन्य को रक्त की जरूरत पड़ती तो वह उन्हें फोन कर देते। उन्होंने प्लेटलेट्स भी दान किए हैं। किसी की जान बचाने से बड़ा पुण्य और मानव सेवा कोई नहीं हो सकती।
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अखबार में इश्तहार देख शुरू हुआ सिलसिला : एनआर श्रीधर
शमसाबाद रोड निवासी एनआर श्रीधर ने बताया कि पहली बार उन्होंने रक्तदान 19 साल की उम्र 1989 में किया। जब अमर उजाला अखबार में रक्त की आवश्यकता का इश्तहार छपा था। मैंने अखबार पढ़ा और रक्तदान किया। मरीज के परिजन मेरे आगे हाथ जोड़कर खड़े हो गए। तब से रक्त की महिमा जानी, उस वक्त तो रक्तदान करने के लिए इक्कादुक्का ही लोग आते थे। तब से वह जरूरत पर रक्तदान करने लगे हैं। अधिकांश ब्लड बैंकों में उनका नंबर दर्ज है और कई संस्थाओं की ओर से सम्मानित भी हो चुके हैं।
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किसी की जान बचाना, सबसे बड़ा पुण्य : अभिषेक शर्मा
जज कंपाउंड में रहने वाले अभिषेक शर्मा ने बताया कि उनका ओ-निगेटिप ग्रुप है और रक्तदान अभियान चलाने वाले रोहित अग्रवाल अधिवक्ता उनके मित्र हैं, उनसे प्रभावित होकर उन्होंने रक्तदान करने का निर्णय लिया। जब भी किसी गर्भवती महिला, ऑपरेशन कराने वाले समेत अन्य को रक्त की जरूरत पड़ती तो वह उन्हें फोन कर देते। उन्होंने प्लेटलेट्स भी दान किए हैं। किसी की जान बचाने से बड़ा पुण्य और मानव सेवा कोई नहीं हो सकती।
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