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Health News: पुरानी चोट को नजरअंदाज न करें... हड्डी में हो सकती है टीबी, जानें क्या कहते हैं चिकित्सक
Sat, 19 Oct 2024 10:25 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 19 Oct 2024 10:25 AM IST
सार
मॉल रोड स्थित होटल में इंडियन आर्थोपेडिक सोसाइटी की कार्यशाला में चिकित्सकों ने बताया कि पुरानी चोट को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। ये हड्डी की टीबी दे सकती है।
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इंडियन आर्थोपेडिक सोसाइटी की कार्यशाला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हड्डी में चोट लगने पर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। इससे हड्डी में टीबी बन रही है। सबसे ज्यादा रीढ़ की हड्डी और घुटनों में टीबी मिल रही है। ऐसे करीब 7-8 फीसदी मरीज हैं। मॉल रोड स्थित होटल में इंडियन आर्थोपेडिक सोसाइटी की कार्यशाला के दूसरे दिन इससे बचाव पर व्याख्यान दिए गए।
आईओए सेंट्रल जोन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. संजय धवन ने बताया कि कई बार हड्डी में चोट लगने से मामूली फ्रैक्चर होता है। लोग इलाज नहीं कराते, वहां टीबी का खतरा रहता है। भूख कम लगना, बुखार आना और वजन कम होना इसके लक्षण हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के हड्डी राेग विभाग के डॉ. रजत कपूर को शोधपत्र प्रस्तुत करने पर स्वर्ण पदक मिला। कार्यशाला में डॉ. डीडी तन्ना, डॉ. अमूल्य कुमार सिंह, डॉ. धीरेंद्र सिंह डॉ. ललित मैनी, डॉ. जमाल अशरफ, डॉ. मुथा संदीप कुमार, डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ, डॉ. अरुण कपूर, डॉ. राजेंद्र अरोड़ा, डॉ. बृजेश शर्मा आदि ने भी व्याख्यान दिए।
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आईओए सेंट्रल जोन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. संजय धवन ने बताया कि कई बार हड्डी में चोट लगने से मामूली फ्रैक्चर होता है। लोग इलाज नहीं कराते, वहां टीबी का खतरा रहता है। भूख कम लगना, बुखार आना और वजन कम होना इसके लक्षण हैं।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के हड्डी राेग विभाग के डॉ. रजत कपूर को शोधपत्र प्रस्तुत करने पर स्वर्ण पदक मिला। कार्यशाला में डॉ. डीडी तन्ना, डॉ. अमूल्य कुमार सिंह, डॉ. धीरेंद्र सिंह डॉ. ललित मैनी, डॉ. जमाल अशरफ, डॉ. मुथा संदीप कुमार, डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ, डॉ. अरुण कपूर, डॉ. राजेंद्र अरोड़ा, डॉ. बृजेश शर्मा आदि ने भी व्याख्यान दिए।
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